पैरों में सूजन और तेज बुखार? समय पर इलाज न हुआ तो जा सकती है पशु की जान

ग्रामीण इलाकों में जहां पशु खुले मैदानों में चरते हैं, वहां लंगड़ा बुखार का खतरा ज्यादा रहता है. बरसात के बाद या नम मिट्टी वाले क्षेत्रों में यह जीवाणु ज्यादा सक्रिय हो जाता है. अगर पशु के पैर या शरीर पर हल्की चोट भी हो, तो जीवाणु उसी रास्ते से शरीर में घुसकर तेजी से फैलने लगता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 13 Feb, 2026 | 08:15 AM

Blackleg disease in cattle: खेती के साथ-साथ आज पशुपालन किसानों की आमदनी का एक मजबूत सहारा बन चुका है. गाय-भैंस का दूध, बछड़े और डेयरी से जुड़ा काम लाखों परिवारों की रोजी-रोटी चलाता है. सरकार भी पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी, बीमा और कई योजनाएं चला रही है. लेकिन इसी बीच एक बड़ी परेशानी है पशुओं में फैलने वाली गंभीर बीमारियां. इन्हीं में से एक है लंगड़ा बुखार, जिसे पशुपालन की दुनिया में सबसे खतरनाक बीमारियों में गिना जाता है. अगर समय पर पहचान और इलाज न हो, तो यह बीमारी पशु की मौत तक का कारण बन सकती है.

क्या है लंगड़ा बुखार और क्यों है इतना खतरनाक

लंगड़ा बुखार एक संक्रामक रोग है, जो खासकर गाय, भैंस और अन्य दुधारू पशुओं को अपनी चपेट में लेता है. यह बीमारी देखने में अचानक शुरू होती है और बहुत तेजी से पूरे शरीर में असर दिखाने लगती है. इसकी सबसे बड़ी समस्या यही है कि कई बार किसान शुरुआती लक्षणों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे हालात बिगड़ जाते हैं.

यह रोग मुख्य रूप से क्लोस्ट्रीडियम चौवई नामक जीवाणु से फैलता है. यह जीवाणु मिट्टी में लंबे समय तक जीवित रह सकता है. दूषित चारागाह में चरने के दौरान यह जीवाणु चारे के साथ पशु के शरीर में चला जाता है. इसके अलावा शरीर पर मौजूद किसी छोटे-से घाव के जरिए भी यह संक्रमण अंदर प्रवेश कर सकता है.

कैसे फैलता है संक्रमण

ग्रामीण इलाकों में जहां पशु खुले मैदानों में चरते हैं, वहां लंगड़ा बुखार का खतरा ज्यादा रहता है. बरसात के बाद या नम मिट्टी वाले क्षेत्रों में यह जीवाणु ज्यादा सक्रिय हो जाता है. अगर पशु के पैर या शरीर पर हल्की चोट भी हो, तो जीवाणु उसी रास्ते से शरीर में घुसकर तेजी से फैलने लगता है. कुछ ही समय में यह पूरे शरीर में जहर की तरह असर दिखाने लगता है.

लंगड़ा बुखार के साफ-साफ दिखने वाले लक्षण

इस बीमारी की पहचान इसके लक्षणों से की जा सकती है. सबसे पहले पशु को तेज बुखार हो जाता है. इसके बाद उसकी पिछली या अगली टांगों के ऊपरी हिस्से में अचानक सूजन आ जाती है. यह सूजन शुरुआत में नरम होती है, लेकिन धीरे-धीरे सख्त होने लगती है. सूजन वाली जगह की चमड़ी कड़ी हो जाती है और कुछ समय बाद वहां घाव जैसा बन जाता है.

बीमारी बढ़ने पर पशु चलने-फिरने में दिक्कत महसूस करता है, लंगड़ाने लगता है और खाना-पीना भी कम कर देता है. अगर इलाज में देरी हो जाए, तो जीवाणु शरीर में जहर फैला देते हैं और पशु की हालत गंभीर हो जाती है. कई मामलों में समय पर इलाज न मिलने से पशु की मौत तक हो जाती है.

इलाज में देरी क्यों बनती है जानलेवा

लंगड़ा बुखार की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि यह बहुत तेजी से फैलता है. कई बार किसान सोचते हैं कि सूजन या बुखार अपने-आप ठीक हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होता. जैसे-जैसे समय गुजरता है, जीवाणु और ज्यादा ताकतवर हो जाते हैं. इसलिए इस बीमारी में समय ही सबसे बड़ा इलाज माना जाता है.

पशु चिकित्सकों के अनुसार शुरुआती चरण में सही दवाइयां और इंजेक्शन दिए जाएं, तो पशु को बचाया जा सकता है. आमतौर पर इलाज में प्रोकेन पेनिसिलीन जैसे एंटीबायोटिक का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन यह सिर्फ डॉक्टर की सलाह से ही देना चाहिए.

बचाव ही सबसे बेहतर उपाय

लंगड़ा बुखार से पशु को बचाने का सबसे अच्छा तरीका है सावधानी और रोकथाम. अगर किसी पशु में इस बीमारी के लक्षण दिखें, तो उसे तुरंत दूसरे स्वस्थ पशुओं से अलग कर देना चाहिए. इससे संक्रमण फैलने का खतरा कम हो जाता है.

कई मामलों में सूजन वाली जगह पर चीरा लगाकर उसे खोल दिया जाता है, ताकि जीवाणु हवा के संपर्क में आएं और उनका असर कम हो जाए. लेकिन यह काम खुद करने के बजाय पशु चिकित्सक से ही करवाना चाहिए.

टीकाकरण और साफ-सफाई है सबसे बड़ी ढाल

लंगड़ा बुखार से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी है. पशुओं को तय समय पर टीके लगवाने से इस बीमारी का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है. इसके साथ-साथ पशुओं के रहने की जगह साफ-सुथरी रखें, गीली और गंदी मिट्टी से बचाएं और चारागाह का ध्यान रखें.

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Published: 13 Feb, 2026 | 08:15 AM

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