जम्मू में शुरू हुई बासमती की बुवाई, 63 हजार हेक्टेयर में होगी खेती.. GI टैग से मिली नई पहचान

जम्मू संभाग के सीमावर्ती इलाकों में बासमती धान की बुवाई शुरू हो गई है. इस साल जम्मू, सांबा और कठुआ में करीब 63,000 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती होने की उम्मीद है. GI टैग प्राप्त RS पुरा बासमती अपनी खास खुशबू और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है, जिससे हजारों किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है.

नोएडा | Updated On: 17 Jun, 2026 | 08:39 AM

Basmati Rice Cultivation: जम्मू संभाग के सीमावर्ती इलाकों में मशहूर बासमती धान की बुवाई शुरू हो गई है. कृषि विभाग का कहना है कि इस साल जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में करीब 63,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बासमती की खेती होने की संभावना है. अपनी खास खुशबू और उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए दुनिया भर में पहचान रखने वाला जम्मू का बासमती चावल क्षेत्र की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है. खासकर आरएस पुरा की बासमती को वर्ष 2016 में जीआई टैग मिलने के बाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी पहचान और मजबूत हुई है. फिलहाल, इंडो-पाक सीमा से लगे गजानसू, मार, RS पुरा, अरनिया और बिश्नाह जैसे इलाकों में मजदूर तेज गर्मी के बावजूद खेतों में धान की रोपाई कर रहे हैं.

जम्मू के कृषि निदेशक अनिल गुप्ता ने ‘द ट्रिब्यून’ से कहा कि सीमावर्ती जिलों के पारंपरिक बासमती  उत्पादक क्षेत्रों में बुवाई शुरू हो चुकी है और सरकार इसकी खेती को और बढ़ाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि बासमती जम्मू संभाग की एक प्रमुख फसल है, खासकर जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में इसकी खेती बड़े पैमाने पर होती है. यह लगभग 63,000 हेक्टेयर क्षेत्र में उगाई जाती है और इसके विस्तार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. अनिल गुप्ता ने कहा कि इस क्षेत्र में बासमती चावल का सालाना उत्पादन करीब 20 लाख क्विंटल है. इसमें से लगभग 16 लाख क्विंटल देश के भीतर ही खपत हो जाता है, जबकि 4 से 5 लाख क्विंटल अन्य क्षेत्रों में भेजा जाता है और निर्यात भी किया जाता है.

किसान कर रहे इन किस्मों की खेती

अधिकारियों के अनुसार, किसान बासमती की कई लोकप्रिय किस्मों की खेती कर रहे हैं, जिनमें बासमती-370, बासमती-564, पूसा बासमती-1121, पूसा बासमती-1718 और जम्मू बासमती-123 शामिल हैं. इन किस्मों की देश और विदेश दोनों में अच्छी मांग है. कृषि निदेशक अनिल गुप्ता ने कहा कि जम्मू बासमती को मिला GI टैग इसकी खास पहचान बनाता है और इससे इसकी बाजार कीमत और वैश्विक प्रतिष्ठा मजबूत हुई है. उन्होंने बताया कि यह टैग जम्मू बासमती की विशेष गुणवत्ता और भौगोलिक पहचान को दर्शाता है, जिससे इसे दुनिया भर में एक अलग पहचान मिली है.

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अलग पहचान

RS पुरा बासमती को जम्मू का एक प्रमुख और खास कृषि उत्पाद  माना जाता है. यह अपनी लंबे और पतले दानों, तेज सुगंध और बेहतरीन पकाने की गुणवत्ता के लिए जाना जाता है. क्षेत्र की विशेष कृषि और जलवायु परिस्थितियों के कारण इस चावल की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अलग पहचान बनी हुई है. कृषि विभाग किसानों की आय बढ़ाने और कृषि निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत बासमती की खेती को बढ़ावा दे रहा है. जम्मू जिले के RS पुरा और बिश्नाह क्षेत्रों में उगाया जाने वाला यह बासमती अपनी सुगंध और गुणवत्ता के कारण काफी मांग में रहता है और केंद्र शासित प्रदेश की प्रमुख चावल किस्मों में शामिल है.

हजारों किसानों की आजीविका का साधान

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, RS पुरा बासमती की बेहतरीन गुणवत्ता का कारण यहां की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, अनुकूल मौसम और किसानों की पारंपरिक खेती पद्धतियां हैं. उच्च गुणवत्ता और बेहतर बाजार मूल्य के कारण जम्मू बासमती सीमा क्षेत्रों के हजारों किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है. यह न केवल क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि जम्मू को विश्वस्तरीय बासमती उत्पादक क्षेत्र के रूप में भी पहचान दिला रहा है.

Published: 17 Jun, 2026 | 08:37 AM

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