महंगी खाद छोड़िए..सिर्फ 5 चीजों से बनाएं पंचगव्य, फसल होगी हरी-भरी और उत्पादन बढ़ेगा
खेती की बढ़ती लागत के बीच किसान अब प्राकृतिक और सस्ते विकल्पों की तलाश कर रहे हैं. पंचगव्य ऐसा ही एक जैविक उर्वरक है, जो फसलों को पोषण देने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद करता है. इसके नियमित उपयोग से उत्पादन बेहतर हो सकता है और खेती का खर्च भी कम किया जा सकता है.
Organic Farming: खेती में बढ़ती लागत और मिट्टी की घटती उर्वरता के बीच किसान अब प्राकृतिक खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं. जैविक खेती में पंचगव्य एक ऐसा देसी उर्वरक माना जाता है, जो कम लागत में तैयार होकर फसलों को बेहतर पोषण प्रदान करता है. कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार के अनुसार, पंचगव्य का नियमित उपयोग फसल की वृद्धि, मिट्टी की गुणवत्ता और पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है. यही वजह है कि देशभर में कई किसान इसे अपनाकर रासायनिक खादों पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं.
पंचगव्य क्या है और क्यों है खास?
पंचगव्य एक प्राकृतिक जैविक उर्वरक है, जिसे देसी गाय से प्राप्त पांच प्रमुख उत्पादों-गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी-से तैयार किया जाता है. कई किसान इसकी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए इसमें गुड़, पके केले और नारियल पानी भी मिलाते हैं. कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार बताते हैं कि पंचगव्य में प्राकृतिक रूप से लाभकारी सूक्ष्म जीव और पोषक तत्व मौजूद होते हैं. ये तत्व पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देने के साथ मिट्टी में जैविक गतिविधियों को भी सक्रिय करते हैं. इससे खेत की उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहती है.
ऐसे तैयार करें पंचगव्य उर्वरक
पंचगव्य तैयार करने की प्रक्रिया काफी आसान है. इसके लिए सबसे पहले लगभग 20 किलो ताजा गोबर और 1 किलो देसी घी को किसी प्लास्टिक या सीमेंट की टंकी में मिलाकर तीन दिन तक रखा जाता है. इसके बाद इसमें 10 लीटर गोमूत्र और 10 लीटर पानी मिलाया जाता है. फिर निर्धारित मात्रा में दूध, दही, गुड़ का घोल, पके केले और नारियल पानी डालकर मिश्रण को अच्छी तरह तैयार किया जाता है. इस घोल को छायादार स्थान पर रखा जाता है और रोजाना सुबह-शाम लकड़ी की सहायता से चलाया जाता है. लगभग 15 से 20 दिनों में पंचगव्य उपयोग के लिए तैयार हो जाता है.
फसलों में कैसे करें उपयोग?
कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार के अनुसार, पंचगव्य का उपयोग छिड़काव और सिंचाई दोनों तरीकों से किया जा सकता है. इसके लिए 3 से 5 प्रतिशत घोल बनाकर फसलों पर छिड़काव करना लाभदायक माना जाता है. इसका प्रयोग सब्जियों, अनाज, फलदार पौधों, दलहनी और तिलहनी फसलों में आसानी से किया जा सकता है. नियमित उपयोग से पौधों की पत्तियां अधिक हरी रहती हैं, जड़ें मजबूत बनती हैं और फूल-फल बनने की क्षमता में सुधार होता है.
मिट्टी की सेहत सुधारने में भी कारगर
पंचगव्य केवल पौधों को पोषण ही नहीं देता, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है. यह मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ाने में मदद करता है, जिससे जल धारण क्षमता और पोषक तत्वों की उपलब्धता में सुधार होता है. कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार का कहना है कि पंचगव्य का नियमित उपयोग करने से रासायनिक खादों की आवश्यकता कम हो सकती है. इससे खेती की लागत घटती है, पर्यावरण सुरक्षित रहता है और किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाली फसल प्राप्त होती है. जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए पंचगव्य आज टिकाऊ और लाभदायक खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है.