Natural Farming: हरियाणा सरकार ने प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने घोषणा की है कि कृषि विभाग के स्वामित्व वाली करीब 800 एकड़ भूमि उन किसानों को 10 साल के पट्टे पर दी जाएगी, जो लंबे समय तक प्राकृतिक और जैविक खेती करने के लिए तैयार होंगे. ये घोषणा उन्होंने पानीपत जिले के समालखा स्थित सेवा साधना एवं ग्राम विकास केंद्र के वार्षिक स्थापना दिवस समारोह में की.
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की मजबूत नींव गांवों में है और गांवों के विकास के बिना विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता. उन्होंने युवाओं से गांवों को आत्मनिर्भर और किसानों को सक्षम बनाने में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया.
800 एकड़ भूमि और नई नीति से मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग की लगभग 800 एकड़ भूमि किसानों को पट्टे पर उपलब्ध कराई जाएगी. यह भूमि उन किसानों को दी जाएगी जो कम से कम अगले 10 वर्षों तक प्राकृतिक खेती करने के लिए तैयार होंगे. इसके अलावा पंचायत की जमीन पर भी प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए नई नीति तैयार की जा रही है. सरकार का उद्देश्य खेती में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करना और किसानों को टिकाऊ खेती की ओर प्रोत्साहित करना है.
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किसानों को मिलेगी आर्थिक सहायता और सब्सिडी
सरकार ने प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए कई प्रोत्साहन योजनाओं की भी घोषणा की है. एपीडा (APEDA) से प्रमाणित प्राकृतिक और जैविक किसानों को पांच वर्षों तक हर साल 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की वित्तीय सहायता दी जाएगी. इसके साथ ही प्राकृतिक खेती अपनाने वाले पात्र किसानों को देसी गाय खरीदने पर 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी भी मिलेगी. प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले कच्चे माल पर भी सरकार सब्सिडी उपलब्ध कराएगी. सरकार का मानना है कि इन योजनाओं से अधिक किसान प्राकृतिक खेती की ओर आकर्षित होंगे.
10 मंडियों में मिलेगा विशेष स्थान
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की 10 मंडियों में प्राकृतिक और जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए अलग और विशेष स्थान उपलब्ध कराया जाएगा. इससे किसानों को अपनी उपज बेचने में आसानी होगी और उन्हें बेहतर बाजार मिलेगा. इसके अलावा परीक्षण प्रयोगशालाएं और एपीडा मान्यता प्राप्त प्रमाणन केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे. इससे किसानों को अपनी उपज की गुणवत्ता प्रमाणित कराने में मदद मिलेगी और उन्हें उत्पाद का उचित मूल्य मिल सकेगा.
100 गांवों के विकास का मॉडल बना केंद्र
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि समालखा का सेवा साधना एवं ग्राम विकास केंद्र केवल एक संस्था नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत का एक सफल मॉडल है. यह केंद्र आसपास के लगभग 100 गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, कौशल विकास, खेल और रोजगार जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र वसुधैव कुटुम्बकम है और यही भावना इस केंद्र के कार्यों में दिखाई देती है. मुख्यमंत्री ने युवाओं के कौशल विकास पर जोर देते हुए कहा कि समय की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण देना जरूरी है. केंद्र में स्थापित कौशल विकास केंद्र और श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के साथ हुए समझौते से युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे.