मकर संक्रांति पर PM मोदी ने खिलाया दुनिया की सबसे छोटी गाय को चारा, लाखों में है कीमत

प्रधानमंत्री आवास से सामने आई गौ-सेवा की तस्वीरों ने सबका दिल जीत लिया है. पीएम मोदी जिस नन्हीं और दुर्लभ नस्ल की गाय को दुलारते नजर आए, वह अपनी खासियतों के कारण दुनिया भर में मशहूर है. विलुप्त होने की कगार पर खड़ी इस नस्ल को बचाने और इसके महत्व को समझाने के लिए पीएम ने यह खास संदेश दिया है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 15 Jan, 2026 | 03:56 PM

World Smallest Cow  : मकर संक्रांति का पावन अवसर हो और सुबह-सुबह प्रधानमंत्री आवास से दिल छू लेने वाली तस्वीरें सामने आएं, तो चर्चा होना लाजमी है. हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ, जिसमें वे अपने हाथों से कुछ बेहद छोटी और प्यारी गायों को चारा खिलाते नजर आ रहे हैं. ये गायें इतनी छोटी हैं कि पहली नजर में कोई इन्हें खिलौना या बछड़ा समझ ले, लेकिन असल में ये दुनिया की सबसे दुर्लभ और खास पुंगनूर नस्ल की गायें हैं. पीएम मोदी द्वारा इन गायों की सेवा करने के पीछे सिर्फ श्रद्धा नहीं, बल्कि एक विलुप्त होती अनमोल विरासत को बचाने का संदेश भी छिपा है.

कद में छोटी पर गुणों में सबसे बड़ी

पुंगनूर गाय  को दुनिया की सबसे छोटी कूबड़ वाली बौनी नस्ल माना जाता है. इनकी ऊंचाई जानकर आप हैरान रह जाएंगे-ये मात्र ढाई से तीन फीट तक की होती हैं. वजन में भी ये काफी हल्की होती हैं और अधिकतम 200 किलो तक ही पहुंचती हैं. मूल रूप से आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले की रहने वाली यह देसी नस्ल  अपनी शांत प्रवृत्ति के लिए जानी जाती है. इनका आकार भले ही छोटा हो, लेकिन भारतीय संस्कृति और आयुर्वेद में इनका स्थान बहुत ऊंचा है.

दूध नहीं, अमृत देती है यह गाय

भले ही पुंगनूर गाय दिन भर में केवल दो से तीन लीटर दूध देती हो, लेकिन वह दूध किसी औषधि से कम नहीं है. इसके दूध में औषधीय तत्व  और एंटी-बैक्टीरियल गुण भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. खास बात यह है कि इसके दूध में फैट की मात्रा काफी कम होती है, जिससे यह स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. पुराने समय में मंदिरों में अभिषेक और पूजा के लिए इसी गाय के दूध का इस्तेमाल किया जाता था, जो इसकी शुद्धता का प्रमाण है.

विलुप्त होने का खतरा और संरक्षण की पहल

इतनी खूबियों के बाद भी यह दुखद है कि पुंगनूर गाय आज विलुप्त होने की कगार पर है. किसानों द्वारा ज्यादा दूध के लालच में अन्य नस्लों के साथ क्रॉस-ब्रीडिंग करवाने की वजह से इनकी शुद्ध नस्ल खत्म होती जा रही है. यही कारण है कि फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) ने इसे संकटग्रस्त नस्लों की सूची में डाल दिया है. पीएम मोदी  ने इन्हें अपने आवास में जगह देकर पूरी दुनिया को यह संदेश दिया है कि हमें अपनी इन दुर्लभ स्वदेशी नस्लों को सहेजने की सख्त जरूरत है. फिलहाल, आंध्र प्रदेश के वैज्ञानिक इन पर शोध कर इन्हें बचाने में जुटे हैं.

कीमत सुनकर रह जाएंगे दंग

अगर आप सोच रहे हैं कि छोटी सी गाय है तो सस्ती होगी, तो आप बिल्कुल गलत हैं. इस दुर्लभ नस्ल  की एक गाय की कीमत लाखों में होती है. इनकी शुद्धता और दुर्लभता के कारण बाजार में एक पुंगनूर गाय 1 लाख रुपये से शुरू होकर 10 लाख रुपये तक में बिकती है. लोग इन्हें न केवल दूध के लिए, बल्कि अपने घरों और फार्महाउस की शोभा बढ़ाने और सौभाग्य के प्रतीक के रूप में भी पालना पसंद करते हैं.

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