मानसून में किसान खरीफ फसलों के साथ इन सब्जियों की करें खेती, पूरे सीजन होगी तगड़ी कमाई
Monsoon Farming: IMD के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल पहुंच चुका है और इस साल अच्छी बारिश की उम्मीद जताई जा रही है. ऐसे में किसान खरीफ फसलों के साथ खीरा, ककड़ी, भिंडी और फूलगोभी जैसी सब्जियों की खेती करके अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं.
Vegetables To Grow In Monsoon: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल पहुंच चुका है और तटीय इलाकों में 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से तेज हवाएं चल रही हैं. मौसम विभाग ने इस साल सामान्य कम होने की संभावना जताई है. कई राज्यों में प्री-मानसून बारिश भी शुरू हो चुकी है और किसान खरीफ फसलों की बुवाई में जुट गए हैं.
ऐसे में अगर किसान खरीफ फसलों के साथ कुछ ऐसी सब्जियां भी उगाएं जिनकी बाजार में सालभर मांग बनी रहती है, तो उनकी कमाई कई गुना बढ़ सकती है. बारिश के कारण सिंचाई पर होने वाला खर्च भी कम होगा और फसलों को पर्याप्त नमी मिलती रहेगी.
मानसून में सब्जी खेती क्यों है फायदेमंद?
बरसात का मौसम सब्जियों की खेती के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. इस दौरान खेतों में प्राकृतिक रूप से नमी बनी रहती है, जिससे सिंचाई की जरूरत काफी हद तक कम हो जाती है और किसानों का खर्च भी बचता है. साथ ही बारिश के मौसम में कई सब्जियों की बढ़वार तेज होती है, जिससे कम समय में अच्छी पैदावार मिल सकती है. बाजार में ताजी सब्जियों की मांग पूरे सीजन बनी रहती है, इसलिए किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है.
खीरा और लोबिया
खीरे की मांग गर्मी और बरसात दोनों मौसम में बनी रहती है. सलाद और हेल्दी डाइट का हिस्सा बनने के कारण इसकी खपत लगातार बढ़ रही है. इसकी खेती लगभग सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है.
लोबिया बरसात के मौसम की लोकप्रिय फसल है. इसकी खासियत यह है कि यह कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है. इसके दाने और हरे फल दोनों बाजार में अच्छी कीमत दिलाते हैं.
चौलाई और ककड़ी
चौलाई की खेती गर्मी और बरसात दोनों मौसम में की जा सकती है. इसकी पत्तियां और दाने दोनों उपयोगी होते हैं. यह कम समय में तैयार होने वाली फसल है, जिससे किसानों को जल्दी आय प्राप्त होती है.
ककड़ी को मुख्य रूप से सलाद के रूप में खाया जाता है. गर्मी और उमस वाले मौसम में इसकी मांग तेजी से बढ़ जाती है. अच्छी देखभाल और उन्नत बीजों के उपयोग से किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.
| सब्जी | प्रमुख उन्नत किस्में |
|---|---|
| खीरा | पंजाब नवीन, हिमांगी, जापानी लॉन्ग ग्रीन, पूसा संयोग, पूना खीरा, शीतल |
| लोबिया | पूसा बरसानी, पूसा फाल्गुनी, पूसा कोमल, सी-152, स्वर्ण, अम्बा |
| चौलाई | अन्नपूर्णा, सुवर्णा, पूसा लाल, पूसा किरण, कपिलासा, आरएमए-4 |
| ककड़ी | अर्का शीतल, लखनऊ अर्ली, सिक्किम ककड़ी, लंबा हरा |
| तुरई | पंजाब सदाबहार, पूसा नसदार, एमए-11, कोयम्बूर-1, पीकेएम-1 |
| करेला | पूसा दो मौसमी, पूसा विशेष, अर्का हरित, कल्याणपुर बारहमासी |
| भिंडी | पूसा सावनी, परभनी क्रांति, पंजाब-7, हिसार नवीन, पंजाब-8 |
| लौकी | काशी गंगा, काशी बहार, पूसा नवीन, पूसा सन्देश, उत्तरा |
| टमाटर | पूसा गौरव, अर्का विकास, अर्का सौरभ, पूसा हाइब्रिड-4, रक्षिता |
| फूलगोभी | सा स्नोबाल-1, स्नोबाल-16, पंत शुभ्रा, पूसा दीपाली, अर्ली कुंवारी |
तुरई और करेला
तुरई की सब्जी गांव से लेकर शहर तक हर जगह पसंद की जाती है. इसकी खेती हल्की दोमट और जैविक पदार्थों से भरपूर मिट्टी में आसानी से की जा सकती है. इसके अलावा आप करेला भा लगा सकते हैं. करेला सिर्फ सब्जी नहीं बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर फसल भी है. मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के बीच इसकी मांग हमेशा बनी रहती है.
भिंडी और लौकी
भिंडी की मांग लगभग पूरे साल बनी रहती है. शादी समारोहों से लेकर घरों तक इसकी खपत लगातार होती है. इसकी खेती कम समय में अच्छा मुनाफा दे सकती है. इसके साथ ही आप लौकी भी उगा सकते हैं. लौकी का उपयोग सब्जी, रायता, हलवा और कई अन्य व्यंजनों में किया जाता है. इसके पौष्टिक गुणों के कारण बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है.
टमाटर और फूलगोभी
टमाटर की जरूरत लगभग हर रसोई में होती है. सॉस, चटनी, सूप और सलाद में इस्तेमाल होने के कारण इसकी मांग कभी कम नहीं होती. इसके अलावा फूलगोभी की खेती किसानों के लिए लाभदायक विकल्प मानी जाती है. सही किस्म और तकनीक अपनाकर किसान अच्छी गुणवत्ता और अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.
मानसून में सब्जी खेती से बढ़ सकती है आय
विशेषज्ञों का मानना है कि, मानसून के दौरान सब्जी खेती अपनाने से किसान पारंपरिक खरीफ फसलों के साथ अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं. बारिश का पानी उपलब्ध होने से सिंचाई लागत कम होती है और फसलों की वृद्धि भी बेहतर होती है. ऐसे में किसान यदि अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार सही सब्जियों का चयन करें, तो इस मानसून सीजन में अच्छी कमाई कर सकते हैं.