सिंदूर की खेती से बिहार के किसानों की बढ़ेगी कमाई, 2 सैन्य छावनियों में खुलेंगे सिंदूर पार्क

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने सिंदूर उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए भागलपुर के रामसी गांव में सिंदूर ग्राम विकसित करने की पहल की है. साथ ही गया और दानापुर की सैन्य छावनियों में सिंदूर पार्क बनाए जाएंगे. विश्वविद्यालय किसानों को पौधे, प्रशिक्षण और वैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराएगा, जिससे रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे.

नोएडा | Updated On: 30 Jun, 2026 | 07:54 PM

Sindoor Farming: भागलपुर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) अपने कृषि अनुसंधानों के लिए देशभर में पहचान रखता है. आम, लीची और परवल पर सफल शोध के बाद अब विश्वविद्यालय सिंदूर के पौधों को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है. विश्वविद्यालय द्वारा किए गए शोध के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए सिंदूर की खेती का दायरा बढ़ाया जा रहा है. भागलपुर में सिंदूर ग्राम विकसित करने के बाद अब बिहार की दो सैन्य छावनियों में भी सिंदूर पार्क स्थापित किए जाएंगे. इस पहल का उद्देश्य सिंदूर के पौधों के संरक्षण और विस्तार के साथ-साथ लोगों को इसके आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व से परिचित कराना है.

विशेषज्ञों का मानना है कि सिंदूर की खेती किसानों के लिए आय का नया स्रोत बन सकती है. साथ ही इसके विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. विश्वविद्यालय की यह पहल कृषि विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. भागलपुर का सिंदूर अब पूरे बिहार में अपनी पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है. बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने राज्य को सिंदूर उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नई पहल शुरू की है. इसके तहत भागलपुर के रामसी गांव को ‘सिंदूर ग्राम’ के रूप में विकसित किया जाएगा. विश्वविद्यालय का मानना है कि इस योजना से गांव की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर बदल सकती है.

छावनी में सिंदूर पार्क विकसित किए जाएंगे

बीएयू के कुलपति डॉ. दुनिया राम सिंह ने मीडिया को कहा कि पहले चरण में गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग कैम्प (ओटीसी) और दानापुर छावनी में सिंदूर पार्क विकसित किए जाएंगे. इसके लिए विश्वविद्यालय की टीम जल्द ही दोनों स्थानों का दौरा कर स्थल का चयन करेगी और पौधारोपण का काम शुरू किया जाएगा. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में सिंदूर के पौधे  तैयार किए जा चुके हैं और जल्द ही इन्हें लगाया जाएगा. सिंदूर का उपयोग केवल पारंपरिक रूप से लगाने के लिए ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक खाद्य रंग के रूप में भी किया जा सकता है. इस परियोजना से गांव की महिलाओं को भी जोड़ा जाएगा, जिससे उन्हें रोजगार के अवसर मिलेंगे और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी.

किसानों को जागरूक किया जाएगा

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर सिंदूर की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को जागरूक कर रहा है. विश्वविद्यालय का कहना है कि जो किसान सिंदूर की खेती शुरू करना चाहते हैं, वे बीएयू द्वारा विकसित सिंदूर बागान से संपर्क कर सकते हैं. यहां किसानों को पौधे उपलब्ध कराने के साथ-साथ खेती से जुड़ी पूरी जानकारी भी दी जाएगी.

सिंदूर की खेती की दी जाएगी जानकारी

विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ किसानों को बताएंगे कि सिंदूर की खेती कैसे करनी है, कौन-सी किस्म के पौधे लगाने हैं और बेहतर उत्पादन  के लिए किन बातों का ध्यान रखना होगा. इतना ही नहीं, पौधारोपण के बाद फसल की देखभाल और प्रबंधन के लिए भी वैज्ञानिक समय-समय पर तकनीकी सलाह और सहायता उपलब्ध कराएंगे. बीएयू का उद्देश्य किसानों को नई फसलों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना और बिहार में सिंदूर उत्पादन को बढ़ावा देना है.

Published: 30 Jun, 2026 | 11:30 PM

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