छोटे किसानों को सपोर्ट करने पर सहमत हुए ब्रिक्स देश, खाद्य सुरक्षा और उन्नत बीज विकास पर मंथन
BRICS Agri Meet Indore: ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के तीसरे दिन खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ खेती और किसानों की आय बढ़ाने पर सदस्य देशों ने प्रस्ताव पेश किए हैं. भारत ने कृषि तकनीक, बीज विकास और डिजिटल एग्रीकल्चर का प्रस्ताव दिया है. इसके अलावा जलवायु परिवर्तन समेत कई मुद्दों पर मंथन हुआ.
मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के तीसरे दिन ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों सहित करीब 20 देशों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और कृषि विशेषज्ञ शामिल हुए. सम्मेलन के दौरान संयुक्त घोषणा पत्र को लेकर चर्चा की गई और इसमें कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल खेती, किसानों की आय बढ़ाने और वैश्विक कृषि सहयोग पर सहमति जताई गई. भारत ने कृषि तकनीक और बीज अनुसंधान का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत उन्नत और जलवायु अनुकूल बीजों की उपलब्धता बढ़ सकेगी.
ब्रिक्स देशों में शामिल भारत, रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिधि इंदौर में आयोजित कृषि कार्यसमूह की बैठक में खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता के रूप में स्थापित करने पर सहमत हुए. बैठक का उद्देश्य बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधानों से निपटने के लिए समन्वित नीतियां और सहयोगी पहलों को तेज करना था.
सीमांत किसानों के समर्थन बढ़ाने समेत कई बिंदुओं पर सहमति
ब्रिक्स सदस्य देशों ने आपूर्ति शृंखला की पारदर्शिता पर जोर देते हुए कहा कि भंडारण इन्फ्रास्ट्रक्चर और सीमांत किसानों के लिये सामूहिक समर्थन बढ़ाना होगा और इस पर सभी ने सहमति व्यक्त की. वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर दबाव तेजी से बढ़ रहा है. इसके चलते बढ़ती जनसंख्या, चरम जलवायु घटनाएं और हालिया महामारी, भूराजनीतिक संकटों से आपूर्ति शृंखलाएं कमजोर हुई हैं. ब्रिक्स देशों में कृषि उत्पादकता और नीतिगत क्षमता दोनों में विविधता है, जिससे साझा नीतियां और तकनीकी सहयोग जरूरी बनते हैं.
कृषि तकनीक और बीज अनुसंधान का प्रस्ताव
प्रतिनिधियों ने जलवायु-सहनीय कृषि तकनीकों, भंडारण और प्रसंस्करण क्षमता के उन्नयन, वीजा और आयात-निर्यात नीतियों के समन्वय जैसे उपायों पर चर्चा की. आपद प्रबंधन और तात्कालिक मानवीय सहायता के तंत्र को मजबूत करने के लिए एक साझा फ्रेमवर्क की स्थापना के प्रस्ताव पर विचार किया गया. भारत ने अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स के बीच कृषि तकनीक, बीज अनुसंधान और डिजिटल कृषि मंच साझा करने का प्रस्ताव रखा. इससे उन्नत और जलवायु अनुकूल बीजों की उपलब्धता बढ़ सकेगी.
कृषि विशेषज्ञ समूहों की रिपोर्ट बाद में घोषित होगी
बैठक में सुझाई गई पहलें अपनाई जाती हैं तो वे खाद्य उपलब्धता, मूल्य स्थिरता और छोटे किसानों की आय में सुधार ला सकती हैं. जलवायु लचीलापन और तात्कालिक सहायता तंत्र विकसित करने की प्राथमिकता पर जोर रहा. तकनीकी विशेषज्ञों की समितियां बनाने, क्षेत्रीय पायलट प्रोजेक्ट और वित्तीय सहयोग के मापदंड तय किए जाएंगे. अंतिम निर्णय और विस्तृत कार्ययोजना आने वाली बैठकों तथा विशेषज्ञ समूहों की रिपोर्ट के बाद घोषित की जाएगी.