पराली जलाने वालों की अब खैर नहीं! पंजाब-हरियाणा में ड्रोन करेंगे निगरानी, तुरंत होगी कार्रवाई

पराली जलाने पर सख्ती के लिए पंजाब और हरियाणा में जल्द ड्रोन तैनात किए जा सकते हैं. CAQM ने दोनों राज्यों को तैयारी शुरू करने को कहा है. ड्रोन की मदद से खेतों में रियल-टाइम निगरानी होगी और तुरंत कार्रवाई संभव होगी. फिलहाल प्रशासन सैटेलाइट डेटा पर निर्भर है, जिससे कई घटनाएं रिकॉर्ड नहीं हो पातीं.

नोएडा | Updated On: 29 Jul, 2026 | 01:25 PM

Air Pollution: सर्दियों में पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए सरकार अब नई तकनीक का सहारा लेने जा रही है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब और हरियाणा सरकारों से ड्रोन खरीदने की तैयारी शुरू करने को कहा है. इन ड्रोन की मदद से खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर रियल-टाइम नजर रखी जाएगी, ताकि मौके पर ही तुरंत कार्रवाई की जा सके. फिलहाल प्रशासन सैटेलाइट से मिलने वाले डेटा के आधार पर निगरानी करता है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2026 में CAQM ने पंजाब के पटियाला जिले में ड्रोन के इस्तेमाल का पायलट प्रोजेक्ट  चलाया था. इसमें ड्रोन से मिली तस्वीरें काफी साफ और सटीक थीं, जिससे अधिकारियों को पराली जलाने वाली जगहों की सही पहचान करने में आसानी हुई. एक अधिकारी के अनुसार, ड्रोन ने ऊंचाई से स्पष्ट तस्वीरें उपलब्ध कराईं, जिससे पराली जलाने की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई संभव हुई. इसी अनुभव के आधार पर CAQM ने पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों से ड्रोन खरीदने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है, ताकि आने वाले खरीफ सीजन के बाद पराली जलाने पर अधिक प्रभावी ढंग से निगरानी रखी जा सके.

गाइडलाइन जल्द जारी होने की उम्मीद

पराली जलाने पर प्रभावी रोक लगाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग  ड्रोन के इस्तेमाल की विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार कर रहा है. यह गाइडलाइन जल्द जारी होने की उम्मीद है. हालांकि, अभी यह तय किया जा रहा है कि किस जिले या गांव में कितने ड्रोन तैनात किए जाएंगे. दोनों राज्यों को कुल कितने ड्रोन की जरूरत होगी, इन्हें कौन संचालित करेगा और इनमें कौन-कौन सी तकनीकी सुविधाएं होंगी.

सैटेलाइट से मिलने वाला डेटा एक दिन पुराना

फिलहाल योजना है कि ड्रोन का इस्तेमाल पहले उन इलाकों में किया जाए, जहां पराली जलाने की घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं. बाद में जरूरत के अनुसार इनकी तैनाती अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ाई जा सकती है. इससे पराली जलाने की घटनाओं पर तेजी से नजर रखी जा सकेगी और समय रहते कार्रवाई करना आसान होगा. अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल सैटेलाइट से मिलने वाला डेटा एक दिन पुराना होता है. ऐसे में पराली जलाने की सूचना प्रशासन तक पहुंचते-पहुंचते खेतों में आग बुझ चुकी होती है, जिससे मौके पर कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है.

सैटेलाइट दिन में सिर्फ दो बार तस्वीरें लेता है

इसके अलावा, सैटेलाइट दिन में सिर्फ दो बार ही संबंधित इलाकों की तस्वीरें लेता है. वहीं, अगर ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा तो रियल-टाइम में पराली जलाने की घटनाओं का पता चल सकेगा. इससे मौके पर मौजूद टीमें तुरंत पहुंचकर किसानों को पराली जलाने से रोक सकेंगी. अधिकारियों के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा में कई किसान दोपहर 3 बजे के बाद पराली जलाते हैं. उस समय तक सैटेलाइट अपनी तस्वीरें ले चुका होता है, इसलिए कई घटनाएं रिकॉर्ड ही नहीं हो पातीं. यही वजह है कि सैटेलाइट के आंकड़ों में पराली जलाने की वास्तविक संख्या कम दिखाई देती है.

पंजाब में जली हुई कृषि भूमि का क्षेत्रफल 31,447 वर्ग किलोमीटर

iFOREST की दिसंबर 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में जली हुई कृषि भूमि का क्षेत्रफल  2022 के 31,447 वर्ग किलोमीटर से घटकर 2025 में करीब 20,000 वर्ग किलोमीटर रह गया. यानी इसमें करीब 37 फीसदी की कमी आई है. इसी तरह हरियाणा में 2019 के 11,633 वर्ग किलोमीटर से घटकर 2025 में 8,812 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पराली जलाई गई, जो 25 फीसदी की कमी दर्शाता है. वहीं, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के आंकड़ों के अनुसार, इस साल 1 अप्रैल से 31 मई के बीच रबी फसल की कटाई के दौरान पंजाब में 9,806 और हरियाणा में 3,398 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं.

Published: 29 Jul, 2026 | 01:18 PM

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