गहराता जा रहा सूखा संकट.. कई बांधों में पानी की आवक थमी, सीएम बोले- बुवाई से पहले सोच लें किसान

Kharif Crops Sowing : मुख्यमंत्री ने कहा कि सूखे की समस्या गंभीर होती दिख रही है. पिछले साल की तुलना में इस साल बांधों में पानी की आवक में 20 फीसदी से ज्यादा की कमी है. कई बांधों में पानी की आवक शून्य दर्ज की गई है. ऐसे में उन्होंने किसानों को बुवाई से पहले दोबारा सोचने की सलाह दी है.

नोएडा | Updated On: 3 Jul, 2026 | 01:48 PM

अल नीनो के असर से मॉनसून कमजोर रहा है और बारिश सामान्य काफी कम दर्ज की गई है. ऐसे में जलाशयों और बांधों में पानी की आवक में कमी से खेती पर सूखे के बादल गहराने लगे हैं. कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कमजोर मॉनसून को देखते हुए किसानों से बुवाई से पहले दोबारा सोचने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि कर्नाटक के कई बांधों में पानी की आवक शून्य दर्ज की गई है. इसके अलावा उन्होंने अधिकारियों और मंत्रियों को निर्देश दिया है कि मवेशियों के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था कराएं.

किसानों को जलाशयों पर निर्भर न रहने की सलाह

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस साल मानसून की खराब स्थिति के बारे में बताया और किसानों से बुवाई करने से पहले दोबारा सोचने की अपील की. कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए शिवकुमार ने कहा कि बांधों में पानी की आवक कम है. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को इस साल जलाशयों पर तब तक निर्भर नहीं रहना चाहिए जब तक वे पूरी तरह भर न जाएं.

बांधों में पानी की आवक में 20 फीसदी से ज्यादा की कमी

मुख्यमंत्री ने कहा कि सूखे की समस्या गंभीर होती दिख रही है. पिछले साल की तुलना में इस साल बांधों में पानी की आवक में 20 फीसदी से ज्यादा की कमी है. मैंने मंत्रियों से दो-तीन जिलों का दौरा करने को कहा है. मैं भी चार डिवीजनों का दौरा करूंगा और स्थिति की समीक्षा करूंगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में पूरे देश में पानी और बिजली की भारी कमी हो सकती है.

5 बांधों में पानी की आवक शून्य दर्च की गई

मुख्यमंत्री ने कहा कि तुंगभद्रा, मल्लप्रभा, अलमट्टी, नारायणपुरा और वाणी विलास सागर बांधों में पानी की आवक शून्य है, जबकि कावेरी बेसिन में पानी का बहाव बहुत कम है. पिछले साल इसी समय हेमावती बांध में 98 फीसदी पानी था, जो अब घटकर 40 फीसदी रह गया है. कावेरी नदी पर बने कृष्णराज सागर बांध में 100 प्रतिशत पानी था, जो अब घटकर 22 फीसदी रह गया है.

बांधों से पानी छोड़ने के लिए किसान दबाव न बनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम पानी को लेकर एक बड़ी समस्या देख रहे हैं. बांधों का पानी छोड़ने के लिए किसानों को हम पर दबाव नहीं बनाना चाहिए. किसान सिर्फ बारिश के भरोसे बुवाई न करें. हम पानी नहीं छोड़ सकते क्योंकि पर्याप्त बारिश नहीं हुई है. इसलिए आपको मानसून की स्थिति को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना होगा. उन्होंने याद दिलाया कि केंद्र सरकार ने पहले ही राज्य सरकारों को चेतावनी दी है कि इस साल देश में गंभीर सूखा पड़ सकता है.

बिजली उत्पादन पर भी संकट

शिवकुमार ने कहा कि इसके साथ ही बांधों में पानी की कमी के कारण पनबिजली (हाइडल पावर) के लिए बिजली का संकट भी पैदा हो सकता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि  बिजली के मामले में भी मैंने अपने विभागों को तुरंत कोयला और अन्य जरूरी सामान का स्टॉक करने का निर्देश दिया है ताकि बाद में कोई आपातकालीन स्थिति न बने. उन्होंने याद दिलाया कि जब वे ऊर्जा मंत्री थे तो उन्होंने बेंगलुरु में 340-MW के गैस-आधारित पावर प्लांट का इंतजाम किया था.

मवेशियों के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था के निर्देश

शिवकुमार ने कहा कि चूंकि हमारे हाइड्रो-पावर प्रोजेक्ट्स में उम्मीद के मुताबिक पानी नहीं आ रहा है, इसलिए हमें बहुत सावधान रहना होगा. मैंने अधिकारियों को इस स्थिति के बारे में जागरूकता फैलाने का निर्देश दिया है. आपातकालीन योजना के बारे में उन्होंने कहा कि जिले के प्रभारी मंत्रियों को निर्देश दिया है कि वे पीने के पानी और मवेशियों के लिए चारे का पर्याप्त स्टॉक की व्यवस्था कराएं. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने उन्हें निर्देश दिया है कि जहां भी आपातकालीन स्थिति हो, वहां बोरवेल खोदे जाएं.

Published: 3 Jul, 2026 | 01:42 PM

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