अब सूखा भी नहीं रोकेगा कमाई, जंगली अरहर बनेगी किसानों की नई सुपरफसल

कम बारिश और बदलते मौसम के बीच जंगली अरहर किसानों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभर रही है. ये फसल कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने की क्षमता रखती है और नर्सरी विधि से इसकी उत्पादन क्षमता और बढ़ जाती है.

नोएडा | Updated On: 7 Aug, 2026 | 07:39 PM

Wild Pigeon Pea: कम बारिश और बदलते मौसम के बीच किसानों के लिए ऐसी फसलों की जरूरत बढ़ गई है जो कम पानी में भी अच्छा उत्पादन दे सकें. इसी क्रम में जंगली अरहर की खेती किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प बनकर सामने आ रही है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये कम सिंचाई में भी अच्छी पैदावार देने की क्षमता रखती है और बदलते मौसम में भी फसल सुरक्षित रहती है.

कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने वाली फसल

जंगली अरहर को ऐसी फसल माना जाता है जो सूखे और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी आसानी से उगाई जा सकती है. इसकी जड़ें मिट्टी में गहराई तक जाती हैं, जिससे यह कम पानी में भी पोषक तत्व और नमी प्राप्त कर लेती है. यही कारण है कि कम बारिश वाले इलाकों में भी किसान इसकी खेती को तेजी से अपना रहे हैं. सामान्य अरहर की तुलना में यह किस्म अधिक मजबूत और टिकाऊ मानी जाती है. किसान अब पारंपरिक खेती से हटकर ऐसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं, जो जोखिम कम और मुनाफा अधिक देती हैं. जंगली अरहर इसी श्रेणी में आती है, जिससे किसानों को स्थिर आय का साधन मिलता है.

नर्सरी विधि से खेती में मिल रहा अधिक फायदा

जंगली अरहर की खेती  में नर्सरी विधि का उपयोग करने से उत्पादन में सुधार देखने को मिल रहा है. इस तकनीक में पहले पौध तैयार की जाती है और फिर उसे खेत में रोपा जाता है. इससे बीज का नुकसान काफी कम हो जाता है और पौधों के जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है. नर्सरी विधि से तैयार पौधे मजबूत होते हैं और खेत में जल्दी स्थापित हो जाते हैं. इससे फसल की बढ़वार बेहतर होती है और उत्पादन अधिक मिलता है. साथ ही, बीज की बर्बादी भी कम होती है जिससे लागत में कमी आती है.

बदलते मौसम में किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प

मौसम में अनिश्चितता और कम बारिश की स्थिति को देखते हुए किसानों के लिए ये फसल एक सुरक्षित विकल्प बन रही है. जंगली अरहर न केवल सूखे को सहन कर सकती है बल्कि इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता  भी बेहतर होती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, बदलते मौसम में किसानों को ऐसी फसलों की ओर ध्यान देना चाहिए जो कम संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन दें. उनका कहना है कि जंगली अरहर की नर्सरी विधि अपनाने से उत्पादन क्षमता में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी जा सकती है.

किसानों के लिए मुनाफे का नया रास्ता

जंगली अरहर की खेती किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद  साबित हो रही है. कम लागत, कम पानी की जरूरत और बेहतर उत्पादन इसे लाभकारी फसल बनाते हैं. बाजार में इसकी मांग भी लगातार बनी रहती है, जिससे किसानों को अच्छी कीमत मिल जाती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसान आधुनिक तकनीक और नर्सरी विधि को अपनाते हैं तो वे कम बारिश के बावजूद भी अपनी आय को स्थिर और बेहतर बना सकते हैं. ये फसल आने वाले समय में सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है.

Published: 7 Aug, 2026 | 10:26 PM

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