धान की खेती का खर्च होगा आधा और पैदावार दोगुनी, इस तकनीक से बदलेगा कमाई का फॉर्मूला
Paddy Cultivation: धान की सीधी बुवाई (DSR) तकनीक किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है, क्योंकि इससे पानी और मजदूरी दोनों की बचत होती है. बेहतर उत्पादन के लिए सामान्य धान में प्रति एकड़ 20-25 किलोग्राम और बासमती धान में 15-18 किलोग्राम बीज का उपयोग करने की सलाह दी जाती है.
Paddy Cultivation: भारत में धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है, लेकिन पारंपरिक तरीके से धान लगाने में पानी और मजदूरी दोनों की काफी जरूरत पड़ती है. बढ़ती लागत और जल संकट को देखते हुए अब किसान धान की सीधी बुवाई (DSR – Direct Seeded Rice) तकनीक की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, यह तकनीक न केवल पानी की बचत करती है, बल्कि खेती की लागत को भी कम करने में मददगार साबित हो रही है. हालांकि, इस तकनीक से बेहतर उत्पादन लेने के लिए बीज और उर्वरकों का सही इस्तेमाल बेहद जरूरी है.
क्यों बढ़ रही है DSR तकनीक की लोकप्रियता?
धान की सीधी बुवाई में नर्सरी तैयार करने और पौधों की रोपाई की जरूरत नहीं पड़ती. किसान सीधे खेत में बीज बो सकते हैं. इससे मजदूरी का खर्च कम होता है और खेती का काम भी जल्दी पूरा हो जाता है. इसके अलावा इस तकनीक में पारंपरिक खेती की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है, जो जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है.
सामान्य धान के लिए कितनी हो बीज की मात्रा?
सीधी बुवाई में बीज की मात्रा का सही निर्धारण बहुत जरूरी है. अगर बीज ज्यादा या कम डाला जाए तो पौधों की संख्या और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं. सामान्य या मोटे धान की किस्मों के लिए प्रति एकड़ 20 से 25 किलोग्राम बीज पर्याप्त माना जाता है. इतनी मात्रा खेत में पौधों का संतुलित जमाव सुनिश्चित करती है और बाद में अच्छी संख्या में कल्ले निकलने में मदद करती है.
बासमती और महीन धान में रखें विशेष ध्यान
अगर किसान बासमती या अन्य महीन धान की किस्मों की सीधी बुवाई कर रहे हैं, तो उन्हें बीज की मात्रा कम रखनी चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी किस्मों के लिए सामान्य धान की तुलना में लगभग एक-चौथाई कम बीज की जरूरत होती है. ऐसे में प्रति एकड़ 15 से 18 किलोग्राम बीज पर्याप्त रहता है. इससे पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है और फसल की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है.
उर्वरक प्रबंधन से बढ़ेगी फसल की ताकत
धान की सीधी बुवाई में शुरुआती पोषण बहुत महत्वपूर्ण होता है. पौधों की जड़ों के विकास और अच्छी बढ़वार के लिए बुवाई के समय ही संतुलित मात्रा में उर्वरक देना चाहिए. विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रति एकड़ 20 किलोग्राम नाइट्रोजन, 25 किलोग्राम फास्फोरस और 15 से 20 किलोग्राम पोटाश का उपयोग किया जाए. इससे पौधे मजबूत बनते हैं और फसल की वृद्धि तेज होती है.
बीज उपचार करना न भूलें
अच्छी पैदावार के लिए बीज उपचार भी बेहद जरूरी है. बिना उपचार वाले बीज कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं, जिससे अंकुरण और उत्पादन दोनों प्रभावित होते हैं. बुवाई से पहले बीजों को हल्का गीला करके कार्बेन्डाजिम से उपचारित करना चाहिए. इससे बीजों को शुरुआती रोगों से सुरक्षा मिलती है और अंकुरण बेहतर होता है. उपचारित बीजों से फसल का जमाव भी अधिक समान और मजबूत होता है.
सही प्रबंधन से मिलेगा बेहतर उत्पादन
धान की सीधी बुवाई तकनीक किसानों के लिए लागत कम करने और पानी बचाने का प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है. लेकिन इसका पूरा लाभ तभी मिलेगा, जब किसान बीज की सही मात्रा, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और बीज उपचार जैसी जरूरी बातों का पालन करेंगे. सही तरीके से अपनाई गई DSR तकनीक खेती को अधिक लाभदायक और टिकाऊ बना सकती है.