Tip Of The Day: धान की फसल हर साल डूब जाती है? ये 4 किस्में जलभराव में भी देंगी बंपर पैदावार

Paddy Cultivation: मानसून किसानों के लिए राहत और खुशी लेकर आता है, लेकिन जिन इलाकों में खेतों में पानी भर जाता है, वहां यह परेशानी का कारण भी बन सकता है. कई दिनों तक खेत में पानी भरा रहने से सामान्य धान की फसल खराब हो सकती है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. हालांकि, अब इस समस्या का समाधान भी मौजूद है. कृषि वैज्ञानिकों ने धान की कुछ ऐसी उन्नत किस्में विकसित की हैं, जो लंबे समय तक पानी में डूबे रहने पर भी खराब नहीं होतीं और अच्छी पैदावार देती हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 2 Jun, 2026 | 09:01 AM
1 / 6मानसून के दौरान निचले इलाकों में कई दिनों तक पानी जमा रहने से सामान्य धान की फसलें सड़ने लगती हैं. इससे पौधों की ग्रोथ रुक जाती है और किसानों को उत्पादन में भारी नुकसान झेलना पड़ता है.

मानसून के दौरान निचले इलाकों में कई दिनों तक पानी जमा रहने से सामान्य धान की फसलें सड़ने लगती हैं. इससे पौधों की ग्रोथ रुक जाती है और किसानों को उत्पादन में भारी नुकसान झेलना पड़ता है.

2 / 6किसानों की इस समस्या को ध्यान में रखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने ऐसी उन्नत धान किस्में विकसित की हैं, जो लंबे समय तक पानी में रहने के बावजूद सुरक्षित रहती हैं और बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हैं. इनमें ‘जलमग्न’ किस्म और ‘मधुकर चकिया’ किस्म शामिल हैं.

किसानों की इस समस्या को ध्यान में रखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने ऐसी उन्नत धान किस्में विकसित की हैं, जो लंबे समय तक पानी में रहने के बावजूद सुरक्षित रहती हैं और बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हैं. इनमें ‘जलमग्न’ किस्म और ‘मधुकर चकिया’ किस्म शामिल हैं.

3 / 6‘जल लहरी’ और ‘पंत धान 95’ जैसी उन्नत किस्में भी जलभराव वाले इलाकों के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं. ये किस्में प्रतिकूल मौसम और अधिक पानी की स्थिति में भी अच्छा प्रदर्शन करती हैं.

‘जल लहरी’ और ‘पंत धान 95’ जैसी उन्नत किस्में भी जलभराव वाले इलाकों के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं. ये किस्में प्रतिकूल मौसम और अधिक पानी की स्थिति में भी अच्छा प्रदर्शन करती हैं.

4 / 6इन किस्मों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि खेत में पानी का स्तर बढ़ने पर पौधे भी अपनी लंबाई बढ़ा लेते हैं. इससे पौधों का ऊपरी हिस्सा पानी के ऊपर बना रहता है और फसल डूबने से बच जाती है.

इन किस्मों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि खेत में पानी का स्तर बढ़ने पर पौधे भी अपनी लंबाई बढ़ा लेते हैं. इससे पौधों का ऊपरी हिस्सा पानी के ऊपर बना रहता है और फसल डूबने से बच जाती है.

5 / 6विशेषज्ञों का कहना है कि जलभराव वाले क्षेत्रों में धान की नर्सरी समय से तैयार कर लेनी चाहिए. मजबूत और विकसित पौधे बाढ़ या अधिक पानी की स्थिति को बेहतर तरीके से सहन कर पाते हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि जलभराव वाले क्षेत्रों में धान की नर्सरी समय से तैयार कर लेनी चाहिए. मजबूत और विकसित पौधे बाढ़ या अधिक पानी की स्थिति को बेहतर तरीके से सहन कर पाते हैं.

6 / 6धान की रोपाई करते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि पौध का ऊपरी हिस्सा पानी से कम से कम 2 से 4 इंच ऊपर रहे. इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और फसल खराब होने का खतरा कम हो जाता है.

धान की रोपाई करते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि पौध का ऊपरी हिस्सा पानी से कम से कम 2 से 4 इंच ऊपर रहे. इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और फसल खराब होने का खतरा कम हो जाता है.

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