वैश्विक चावल-गेहूं के उत्पादन पर अल नीनो का झटका, उपज में 15 फीसदी तक गिरावट की चेतावनी
El Nino Effect on Rice Production : वैश्विक रिसर्च एजेंसी BMI ने रिपोर्ट में कहा है कि अल नीनो की शुरुआत के बाद से चावल, गेहूं, गन्ना और कॉफी जैसी खाद्य उत्पादन पर इसका बुरा असर पड़ सकता है. कई कृषि फसलों पर मौसम का खतरा चिंताजनक बताया गया है.
अल नीनो की शुरुआत के बाद दुनिया की कई कृषि फसलों पर मौसम का खतरा बढ़ गया है. चावल, गेहूं, कोको, पाम ऑयल, चीनी और रोबस्टा कॉफी जैसी खाद्य पदार्थों पर इसका असर पड़ सकता है. हालांकि, अल नीनो का प्रभाव हर फसल पर एक जैसा नहीं होगा. इसका असर उत्पादन वाले क्षेत्रों और वहां के मौसम पर निर्भर करेगा. वैश्विक स्तर पर धान की पैदावार में 5 से 15 फीसदी तक की गिरावट का अनुमान जताया गया है. जबकि, गेहूं के लिए पर्याप्त नमी की कमी अच्छे उत्पादन के लिए मुसीबत बन सकती है.
फिच सॉल्यूशंस की यूनिट रिसर्च एजेंसी BMI ने कहा है कि चावल सबसे ज्यादा चिंता का विषय है. इसकी वजह यह है कि दुनिया में चावल का अतिरिक्त स्टॉक सीमित है और उत्पादन व निर्यात का बड़ा हिस्सा एशियाई देशों पर निर्भर है. इन देशों में मौसम में बदलाव का असर चावल की फसल पर जल्दी पड़ सकता है.
वैश्विक चावल खपत के लिए बाजारों को भारत से उम्मीदें
भारत में चावल का बफर स्टॉक बढ़ने से कुछ राहत मिली है. BMI के अनुसार भारत का चावल भंडार 2023-24 में कुल खपत के 30.1 फीसदी के बराबर था, जो 2026-27 में बढ़कर अनुमानित 42.2 फीसदी हो गया है. एजेंसी का कहना है कि बढ़ा हुआ स्टॉक भारत को चावल के निर्यात पर अचानक प्रतिबंध लगाने से बचा सकता है. 2023-24 में चावल की कीमतों में तेजी का बड़ा कारण फसल को हुए नुकसान से ज्यादा भारत समेत कुछ देशों की ओर से पहले ही लगाए गए निर्यात प्रतिबंध थे. इस बार पर्याप्त भंडार होने से ऐसी स्थिति बनने की संभावना कम है.
15 फीसदी तक चावल उत्पादन गिरने की चेतावनी
अल नीनो के कारण वैश्विक स्तर पर कुल खाद्यान्न भंडार पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है. लेकिन एशिया-प्रशांत और दक्षिण-पूर्व एशिया में मॉनसूनी बारिश कमजोर होने और सूखे के चलते धान (चावल) के उत्पादन में 5 फीसदी से 15 फीसदी तक की कमी होने की चिंता जताई गई है. भारत, थाईलैंड, वियतनाम और कंबोडिया जैसे प्रमुख एशियाई देशों में मॉनसूनी बारिश कम देखी जा रही है और यह स्थिति धान की रोपाई के बाद अब पैदावार पर बुरा असर डाल सकती है.
गेहूं के लिए पर्याप्त नमी की कमी बनेगी मुसीबत
गेहूं की पैदावार को अल नीनो की स्थितियां कमजोर बना सकती हैं. वर्तमान में कम बारिश के चलते गेहूं की बुवाई के दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी की कमी मुश्किल बढ़ाएगी, जो बीजों का अंकुरण और पौधे की ग्रोथ को प्रभावित करेंगी. इस स्थिति के नतीजे में गेहूं का उत्पादन घटने के साथ ही क्वालिटी प्रभावित होने का खतरा रहेगा. जबकि, इस स्थिति से बचने के लिए सिंचाई लागत बढ़ेगी, जो किसानों की जेब पर बोझ बनेगी.