स्ट्रॉबेरी की खेती से किसान की बदली किस्मत, साल में हो रही 10 लाख की कमाई
उत्तर प्रदेश में बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के बीच किसान स्ट्रॉबेरी खेती की ओर बढ़ रहे हैं. फतेहपुर के संत लाल मौर्य समेत कई किसान सरकारी सब्सिडी और तकनीकी मदद से यह खेती कर रहे हैं. राज्य में 440 हेक्टेयर में उत्पादन हो रहा है और रकबा लगातार बढ़ रहा है.
Agriculture News: इनपुट लागत बढ़ने और पारंपरिक खेती में मुनाफा घटने के कारण उत्तर प्रदेश में अब किसान स्ट्रॉबेरी की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. बेहतर आमदनी और सरकारी मदद के चलते कई किसान इस नई फसल को अपना रहे हैं. फतेहपुर जिले के एयरायन विकास खंड के सिमौरी गांव के संत लाल मौर्य भी ऐसे ही किसानों में शामिल हैं. उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की है और उनका कहना है कि इससे उन्हें पहले की फसलों की तुलना में कई गुना ज्यादा मुनाफा मिल रहा है.
संत लाल मौर्य ने ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ को कहा कि वे दो बीघा जमीन पर मल्चिंग तकनीक की मदद से स्ट्रॉबेरी उगा रहे हैं और अच्छी पैदावार प्राप्त कर रहे हैं. मौर्य ने कहा कि बागवानी विभाग ने पौधे खरीदने के लिए उन्हें 30,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी थी. साथ ही अगले साल मल्चिंग के लिए भी सब्सिडी देने की बात कही गई है. उन्होंने बताया कि उनके खेत में उगाई गई स्ट्रॉबेरी लखनऊ और वाराणसी के बाजारों में भेजी जाती है, जिससे उन्हें हर सीजन में करीब 8 से 10 लाख रुपये का मुनाफा हो रहा है. अच्छा रिटर्न मिलने के बाद अब वे आने वाले सीजन में खेती का रकबा बढ़ाने की योजना बना रहे हैं.
खेती पर करीब 12 से 13 लाख रुपये का खर्च
अधिकारियों के अनुसार, सरकारी सब्सिडी और तकनीकी मदद के कारण कई किसान अब ज्यादा शुरुआती लागत होने के बावजूद स्ट्रॉबेरी की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं. फतेहपुर जिले के बागवानी अधिकारी सौरभ रमेश पाठक ने कहा कि स्ट्रॉबेरी की खेती पारंपरिक फसलों की तुलना में ज्यादा महंगी है, लेकिन इससे किसानों की आमदनी काफी बढ़ सकती है. उन्होंने कहा कि एक हेक्टेयर में इसकी खेती पर करीब 12 से 13 लाख रुपये का खर्च आता है, जबकि सही बाजार भाव मिलने पर किसानों को प्रति हेक्टेयर 7 से 8 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हो सकता है.
90 फीसदी तक सब्सिडी
उन्होंने यह भी कहा कि बागवानी विभाग और राज्य सरकार ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग, पौधों और अन्य संसाधनों पर सब्सिडी दे रही है, ताकि खेती की लागत कम हो सके. छोटे और सीमांत किसानों को 90 फीसदी तक सब्सिडी मिलती है, जबकि दो हेक्टेयर से अधिक खेती करने वाले सामान्य श्रेणी के किसानों को 80 फीसदी तक सब्सिडी का लाभ दिया जाता है.
आधुनिक खेती की विधियां
पाठक ने बताया कि किसानों को तकनीकी जानकारी देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों, गांव की चौपालों और किसान कार्यशालाओं के जरिए प्रयास किए जा रहे हैं. इन कार्यक्रमों में कृषि विशेषज्ञ और वैज्ञानिक किसानों को मल्चिंग तकनीक और ड्रिप इरिगेशन जैसी आधुनिक खेती की विधियां सिखाते हैं, जिससे उत्पादन बढ़े और पानी की खपत कम हो सके. विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में स्ट्रॉबेरी की खेती लगभग दो दशक पहले सहारनपुर और पीलीभीत जिलों में छोटे स्तर पर शुरू हुई थी. बाद में इसे उन किसानों ने अपनाया जो पहले पॉलीहाउस में टमाटर की खेती करते थे.
हर साल 2,600 मीट्रिक टन उत्पादन
आज यह फसल राज्य के दो दर्जन से अधिक जिलों में उगाई जा रही है, जिसमें सूखा प्रभावित बुंदेलखंड क्षेत्र भी शामिल है. अधिकारियों के अनुसार, राज्य में फिलहाल करीब 440 हेक्टेयर क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती की जा रही है, जिससे हर साल लगभग 2,600 मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा है. एक वरिष्ठ बागवानी विशेषज्ञ ने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए हल्की और भुरभुरी मिट्टी, कम पानी की जरूरत और 12 से 18 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त होता है. ये परिस्थितियां सर्दियों में राज्य के ज्यादातर हिस्सों में आसानी से मिल जाती हैं.