मोरिंगा की खेती बनाएगी लखपति.. फली-पत्तियों की खूब डिमांड.. जानिए दोगुनी आय का फार्मूला
मोरिंगा (सहजन) की खेती करके किसान लखपति बन सकते हैं. इस फसल की खास बात यह है कि एक बार लगाकर साल में दो बार फलन पाया जा सकता है. बाजार में इसकी खुदरा कीमत 100 रुपए प्रति किलो और बडे़ दुकानदार थोक के भाव में किसानों के दरवाजे से 50-60 रूपये में खरीद लेते हैं.
Moringa Farming Tips: अब किसान अपनी आमदनी को बढ़ाने के नए-नए रास्ते तलाश रहें है. मोरिंगा (सहजन) की खेती करके एक सीजन में ही लखपति बन सकते हैं क्योंकि एक बार लगाकर साल में दो बार फलन लिया जा सकता है. किसान अपने खेत की मेड़ पर मोरिंगा के पौधे लगाकर दोगुनी कमाई हासिल कर रहे हैं. बाजार में मोरिंगा की खुदरा कीमत 100 रुपए प्रति किलो तक पहुंच जाती है. बडे़ दुकानदार इसे थोक के भाव में किसानों के दरवाजे से 50-60 रुपये में खरीद लेते है.
कब करें सहजन की रोपाई
एक्सपर्ट्स के अनुसार जून से सितंबर तक मोरिंगा की रोपाई के लिए सर्वोत्तम समय है, लेकिन नवंबर में भी इसकी बुआई की जा सकती है. इस फसल खास बात यह है कि बाजार में केवल सहजन ही नहीं, इसकी पत्तियों की भी खूब डिमांड रहती है. इस फसल को एक बार लगाकर पूरे साल फलन ले सकते है, जिससे किसानों की अच्छी कमाई हो जाती है.
सहजन की खास वेराइटी PKM-1
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मोरिंगा की खेती लाभ कर रहे किसानों का कहना है कि सहजन की खास वेराइटी PKM-1 की खेती करनी चाहिए क्योंकि इस किस्म से पूरे साल फलन लिया जा सकता है. स्थानीय किसान बताते हैं कि, बाज़ार में बारहमासी मोरिंगा की बुकिंग फल आने से पहले ही हो जाती है. इसकी पत्तियों की भी दवा कंपनियों में काफी डिमांड रहती है. यही कारण है कि किसानों को सब्जी और पत्ते दोनों बेचकर लागत निकालने के साथ-साथ भरपूर मुनाफा मिलता है.
एक सीजन में करीब 15 किलो फलन
स्थानीय किसान अपना अनुभव साझा करते बताते हैं कि, उन्होने 2 हेक्टेयर में फैली नर्सरी की मेड़ पर करीब 1000 मोरिंगा पौधे लगाए हैं. रोपाई के पहले ही साल में प्रत्येक पौधे से पहले सीजन में करीब 15 किलो फलन मिल गया, जबकि दूसरे सीजन में भी इतना ही उत्पादन हुआ. यानी एक पौधा सालभर में लगभग 30 किलो सहजन दे रहा है.
किसानों को मिल रहा अच्छा मुनाफा
बाजार में सहजन की खुदरा कीमत 100 रुपए प्रति किलो तक पहुंच जाती है, जबकि मंडी में दुकानदार किसान के घर से 50–60 रुपए किलो में थोक के भाव में खरीदते हैं. इसी के आधार पर 1000 पौधों से साल भर में करीब 30 हजार किलो उत्पादन मिलता है. यदि किसान 50 रुपए किलो के हिसाब से भी बेचें तो भी यह कमाई करीब 15 लाख रुपए तक पहुंच जाती है.