Kharif Season: खाद की खपत में 3 फीसदी से ज्यादा की गिरावट, क्या किसानों ने ढूंढ लिया विकल्प?
Fertilizer Demand Fallen: केंद्र सरकार के 6 नए यूरिया प्लांट को मंजूरी दिए जाने के बाद 76.2 लाख मीट्रिक टन का घरेलू उत्पादन बढ़ा है. हालांकि, इस बीच कुल खाद खपत 3 फीसदी अधिक घट गई है.
अल नीनो के चलते देरी से हुई बारिश ने खरीफ सीजन की शुरुआती बुवाई को बुरी तरह प्रभावित किया है. इसके चलते खरीफ सीजन अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान खाद की खपत में 3 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं, जो किसान बारिश पर बुवाई के लिए निर्भर नहीं तो उन्होंने केमिकल खाद इस्तेमाल के लिए दूसरे विकल्प जैसे जैविक खाद, नैनो लिक्विड को तलाश लिया और उन्हें इस्तेमाल किया है. इस बीच खाद की उपलब्धता बीते साल की तुलना में बढ़ी है और स्टॉक में भी इजाफा हुआ है. वहीं, खाद कंपनियों को सब्सिडी देने के लिए फंड किल्लत की आशंकाओं को भी केंद्र सरकार ने नकार दिया है.
खरीफ बुवाई का रकबा 42.28 लाख हेक्टेयर घटा
खरीफ सीजन की बुवाई ने भले ही अब तेजी पकड़ी हो लेकिन अल नीनो के असर के चलते शुरुआती रकबे में भारी गिरावट दर्ज की गई थी. देरी से बारिश होने से कई इलाकों में सूखे की चिंताओं ने किसानों को बुवाई से रोक दिया. वहीं, राज्य सरकारों और कृषि विशेषज्ञों ने भी जल्दी बुवाई करने से बचने की सलाह किसानों को दी थी. केंद्र सरकार के आंकड़े बताते हैं कि खरीफ सीजन की बुवाई 17 जुलाई तक देशभर में 658.19 लाख हेक्टेयर में की गई है, जो बीते साल के रकबे 700.47 लाख हेक्टेयर की तुलना में अभी भी 42.28 लाख हेक्टेयर कम है.
खाद की खपत 3 फीसदी घटी
पहले मॉनसूनी बारिश में देरी फिर खरीफ सीजन की बुवाई में देरी से किसानों ने खाद की खपत कम की है. इसके नतीजे में खरीफ सीजन के अप्रैल से जुलाई 2026 तक खाद खपत के आंकड़ों में 3 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है. उर्वरक मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान खरीफ 2026 सीजन के दौरान प्रमुख उर्वरकों जैसे यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस की कुल खपत 151.74 लाख मीट्रिक टन रही है. जबकि खरीफ 2025 की इसी अवधि के दौरान यह 157.05 लाख मीट्रिक टन थी. वहीं, बड़ी संख्या में किसान केमिकल फर्टिलाइजर की बजाय जैविक खाद और नैनो लिक्विड खाद की ओर शिफ्ट हो गए हैं.
यूरिया उत्पादन में तेज बढ़ोत्तरी, भरपूर स्टॉक
केंद्र सरकार के 6 नए यूरिया प्लांट को मंजूरी दिए जाने के बाद 76.2 लाख मीट्रिक टन का घरेलू उत्पादन बढ़ा है. इसके नतीजे में यूरिया उत्पादन 2014-15 के 225 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 के दौरान 293.30 लाख मीट्रिक टन का उत्पादन पहुंच गया है. हालांकि, 2023-24 में रिकॉर्ड 314.07 लाख मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया था. सरकार ने अप्रैल 2026 में वैश्विक टेंडर के जरिए 25 लाख मीट्रिक टन यूरिया और जून 2026 में 17.7 लाख मीट्रिक टन यूरिया का स्टॉक बढ़ाया है.
उर्वरक सब्सिडी के लिए सरकार के पास खूब फंड
केंद्र सरकार ने बताया कि 2026-27 के लिए खाद सब्सिडी की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए उसके पास पर्याप्त फंड है और 13 जुलाई तक 70,709 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं जो साल के लिए कुल 1.77 लाख करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन का 39.9 फीसदी है. रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में कहा कि सब्सिडी खर्च को पूरा करने के लिए सरकार के पास पर्याप्त फंड मौजूद है.