केंद्र सरकार ने अभी खाद की बिक्री को किसानों की वास्तविक जरूरत से जोड़ने के मामले में कोई जल्दी कदम नहीं उठाया है. हालांकि हरियाणा में चल रहे पायलट प्रोजेक्ट में खाद की खपत में काफी कमी देखी गई है. खास बात यह है कि फर्टिलाइजर पायलट प्रोजेक्ट में छोटे किसानों की खरीद बढ़ी है. अब लगभग 50 फीसदी खरीदार 10 बैग से कम खाद खरीद रहे हैं, जबकि 10 से 20 बैग खरीदने वालों का हिस्सा 37.8 फीसदी है. बड़ी खरीद में गिरावट आई है. 40- 50 बैग खाद खरीदने वालों की संख्या में 35 फीसदी और 30 से 40 बैग वालों की संख्या 10.5 फीसदी की कमी हुई है. कुल मिलाकर, यूरिया की खपत 10.9 फीसदी और डीएपी की खपत 24.9 फीसदी कम हुई. यूरिया खरीदारों की संख्या 2.3 फीसदी और फॉस्फेट-पोटाश (P और K) खरीदारों की संख्या 8 फीसदी घट गई. अधिकारियों के अनुसार, यह प्रणाली थोक खरीद रोकने और छोटे किसानों तक सब्सिडी वाली खाद पहुंचाने में प्रभावी साबित हुई है.
द बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, अब आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्य रासायनिक खाद के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने के लिए इसी तरह के मॉडल को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं. उर्वरक विभाग (भारत सरकार) ने हाल ही में संसदीय स्थायी समिति को बताया कि यह पायलट परियोजना अभी शुरुआती चरण में है. इसलिए इसे दूसरे राज्यों में लागू करने से पहले इसका स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाएगा. हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान युद्ध के बाद उर्वरकों की आपूर्ति में आई दिक्कतों को देखते हुए इस योजना को पूरे देश में लागू किया जा सकता है.
यूरिया की खपत 1,25,986 टन कम हुई
अधिकारियों के अनुसार, हरियाणा में पिछले रबी सीजन के दौरान 8 अक्टूबर 2025 से 18 फरवरी 2026 के बीच यूरिया की खपत 1,25,986 टन और डीएपी की खपत 23,489 टन कम हुई है. इससे सरकार को लगभग 700.53 करोड़ रुपये की सब्सिडी की बचत होने का अनुमान है. सरकार के अनुसार खाद की खपत में आई कमी से यह संकेत मिलता है कि पहले कई बार फसल के क्षेत्र से ज्यादा खाद खरीदी जा रही थी. इससे कुछ मामलों में खाद की डायवर्जन या बड़े खरीदारों के पास ज्यादा मात्रा में जमा होने की संभावना रहती थी. लेकिन अब फसल से जुड़े डिजिटल ऑथेंटिकेशन सिस्टम के कारण ऐसी गड़बड़ियों पर काफी हद तक रोक लगी है.
SMS आधारित OTP के जरिए पहचान की पुष्टि की जाती है
अभी पूरे देश में सब्सिडी वाली खाद की बिक्री ‘नो-डिनायल’ यानी बिना मना किए की नीति पर होती है. लेकिन हरियाणा में इसे राज्य सरकार के मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) पोर्टल से जोड़ा गया है. इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत केंद्र सरकार ने पीओएस मशीन से होने वाली खाद की बिक्री को MFMB पोर्टल के डेटा से लिंक कर दिया है. इस व्यवस्था में पंजीकृत किसान, उसका परिवार का सदस्य या खेती करने वाला व्यक्ति रिटेल दुकानों पर पीओएस मशीन के जरिए सब्सिडी वाली खाद खरीद सकता है. अगर किसान खुद खरीदारी करता है तो उसकी पहचान बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन से होती है, जबकि परिवार का सदस्य या खेती करने वाला व्यक्ति खरीदारी करता है तो SMS आधारित OTP के जरिए पहचान की पुष्टि की जाती है.
इस पायलट परियोजना को तीन चरणों में लागू किया गया
इस पायलट परियोजना को तीन चरणों में लागू किया गया. पहले चरण में खाद की बिक्री सामान्य रूप से की गई और सिर्फ डेटा का मिलान करके स्थिति का अध्ययन किया गया. दूसरे चरण में भी खुली बिक्री जारी रही, लेकिन सक्रिय रूप से डेटा का मिलान किया गया. तीसरे चरण में खरीदारों पर कुछ सीमाएं लागू की गईं और जोखिम प्रबंधन के उपाय भी अपनाए गए. इस व्यवस्था के बाद प्रति खरीदार खरीदी जाने वाली खाद की औसत मात्रा में कमी देखी गई. यूरिया की औसत खरीद करीब 11.6 फीसदी से घटकर 1.33 टन से 1.18 टन रह गई, जबकि फॉस्फेट (P) और पोटाश (K) खाद की खरीद लगभग 18.7 फीसदी घटकर 0.75 टन से 0.61 टन हो गई. अधिकारियों के अनुसार इससे साबित होता है कि यह प्रणाली थोक में ज्यादा खरीद को रोकने और किसानों के बीच सब्सिडी वाली खाद का समान वितरण सुनिश्चित करने में प्रभावी है.