चावल डिलीवरी में देरी पर सरकार सख्त, करनाल की मिलों का होगा सत्यापन… बढ़ सकती है डेडलाइन!

करनाल में CMR डिलीवरी की स्थिति जांचने के लिए 6 समितियां गठित की गई हैं. ये टीमें राइस मिलों के स्टॉक और चावल आपूर्ति का सत्यापन करेंगी. रिपोर्ट के आधार पर जून अंत की डेडलाइन बढ़ाने पर फैसला होगा. दूसरी ओर, राइस मिलर्स एसोसिएशन ने FCI गोदामों में जगह की कमी और लॉजिस्टिक समस्याओं का हवाला देते हुए समय सीमा बढ़ाने की मांग की है.

नोएडा | Published: 20 Jun, 2026 | 12:04 PM

Haryana Farmers: कस्टम मिल्ड राइस (CMR) की डिलीवरी की समय सीमा नजदीक आने के बीच खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने करनाल जिले में 6 समितियों का गठन किया है. ये टीमें उन राइस मिलों का भौतिक सत्यापन करेंगी, जिन्हें खरीद सीजन के दौरान धान आवंटित किया गया था. जांच के दौरान टीमें मिलों में उपलब्ध चावल के स्टॉक और CMR डिलीवरी की स्थिति का आकलन करेंगी. सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि CMR जमा कराने की जून अंत तक की समय सीमा बढ़ाई जाए या नहीं.

CMR नीति के अनुसार मिलरों को जून महीने के अंत तक चावल की आपूर्ति  पूरी करनी होती है. विभाग के अनुसार अब तक करीब 60 प्रतिशत चावल की डिलीवरी भारतीय खाद्य निगम (FCI) को की जा चुकी है. जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) मुकेश कुमार ने ‘द ट्रिब्यून’ से कहा कि भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग समय सीमा बढ़ाने या न बढ़ाने पर अंतिम फैसला लेगा.

10 फीसदी चावल जून के अंत तक जमा कराना अनिवार्य

मिलरों को तय कार्यक्रम के अनुसार सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) की आपूर्ति करनी होती है. इसके तहत दिसंबर के अंत तक 15 फीसदी, जनवरी तक 25 फीसदी, फरवरी तक 20 फीसदी, मार्च तक 15 फीसदी, मई तक 15 फीसदी और शेष 10 फीसदी चावल जून के अंत तक जमा कराना अनिवार्य है. निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं करने वाले मिलरों को विभाग पहले ही नोटिस जारी कर चुका है.

सीएमआर जमा करने की समय सीमा बढ़ाने की मांग

वहीं, करनाल राइस मिलर्स एसोसिएशन ने सीएमआर जमा करने की समय सीमा बढ़ाने की मांग की है. एसोसिएशन का कहना है कि परिवहन संबंधी दिक्कतों और एफसीआई गोदामों में पर्याप्त जगह न होने के कारण मिलरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उनका आरोप है कि अंबाला, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर जैसे पड़ोसी जिलों के मिलरों को भी करनाल के एफसीआई गोदामों से जोड़ा गया है, जिससे गोदामों पर दबाव बढ़ गया  है और स्थानीय मिलरों के लिए भंडारण की जगह कम पड़ रही है.

भंडारण की सुविधा दी जानी चाहिए थी

राइस मिलर्स एसोसिएशन का कहना है कि दूसरे जिलों के मिलरों को उनके अपने जिलों में ही भंडारण की सुविधा दी जानी चाहिए थी. एसोसिएशन के अध्यक्ष सौरभ गुप्ता ने कहा कि करनाल के लिए अलग एफसीआई गोदाम की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. उन्होंने सरकार से सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) जमा कराने की समय सीमा बढ़ाने की भी मांग की.

अभी तक कोई समाधान नहीं निकला

सौरभ गुप्ता ने कहा कि इस समस्या को लेकर एसोसिएशन ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) और खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अधिकारियों से कई बार संपर्क किया है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है. उनका कहना है कि गोदामों में जगह की कमी के कारण मिलरों को चावल की आपूर्ति करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

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