हरे धनिये से कम समय में होगी मोटी कमाई, बुवाई से पहले बस ये काम जरूर करें

हरे धनिये की खेती किसानों के लिए कम समय में आमदनी देने वाली फसल है. पहली कटाई 35 से 45 दिनों में हो सकती है. बुवाई से पहले बीज को हल्का रगड़कर दो हिस्सों में बांटें और 8-12 घंटे भिगोकर बोने से बेहतर अंकुरण में मदद मिल सकती है.

नोएडा | Updated On: 29 Aug, 2026 | 10:24 PM

हरे धनिये की खेती किसानों के लिए कम समय में तैयार होने वाली लाभदायक फसलों में शामिल है. सामान्य तौर पर इसकी पहली कटाई 35 से 45 दिनों में की जा सकती है. बाजार में ताजा हरे धनिये की मांग बनी रहने के कारण किसान कम अवधि में फसल तैयार कर अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, धनिये की खेती में बेहतर उत्पादन के लिए बुवाई से पहले बीज उपचार, खेत की तैयारी, सही किस्म और सिंचाई प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है.

बुवाई से पहले बीज को ऐसे करें तैयार

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के मुताबिक, धनिये के साबुत बीजों को बुवाई से पहले हल्के हाथों से रगड़कर दो हिस्सों में अलग करना बेहतर रहता है. इससे बीज के दोनों हिस्सों तक मिट्टी की नमी और हवा आसानी से पहुंच सकती है और अंकुरण में तेजी आने में मदद मिलती है. हालांकि, इससे शत-प्रतिशत अंकुरण की गारंटी नहीं होती. इसके लिए स्वस्थ और अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का इस्तेमाल भी जरूरी है. टूटे हुए बीजों को साफ पानी में करीब 8 से 12 घंटे भिगोया जा सकता है. इसके बाद बीजों को निकालकर छाया में हल्का सुखाकर बुवाई करें. जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से उपयुक्त जैविक बीज उपचार भी किया जा सकता है.

खेत की तैयारी में न बरतें लापरवाही

हरे धनिये की अच्छी फसल के लिए खेत की मिट्टी भुरभुरी और समतल होना जरूरी है. इसके लिए खेत की 2 से 3 बार जुताई करने के बाद रोटावेटर चलाकर मिट्टी के बड़े ढेलों को तोड़ें. इसके बाद पाटा लगाकर खेत को समतल कर लें. इससे मिट्टी में नमी समान रूप से बनी रहती है और बीजों की बुवाई उचित गहराई पर करने में आसानी होती है. अंतिम जुताई के समय अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके साथ उचित मात्रा में नीमखली मिलाने से मिट्टी की उर्वरता और जैविक गतिविधि को बेहतर करने में मदद मिल सकती है.

सही किस्म का चुनाव बढ़ा सकता है उत्पादन

कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, किसान अपने क्षेत्र की जलवायु और बाजार की मांग के हिसाब से धनिये की उन्नत किस्म का चयन करें. हरे धनिये के लिए ऐसी किस्मों को प्राथमिकता दी जा सकती है, जिनमें पत्तियां चौड़ी, मुलायम और अधिक हरी होती हैं. प्रमाणित और अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का इस्तेमाल करने से पौधों की बढ़वार एकसमान रहने और बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना बढ़ती है. बाजार में जिस प्रकार के हरे धनिये की मांग अधिक हो, उसी के अनुसार किस्म का चयन करना किसान के लिए फायदेमंद हो सकता है.

सिंचाई में ज्यादा पानी से बचें

बुवाई के बाद अंकुरण होने तक मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है. जरूरत के अनुसार हल्की सिंचाई करें, लेकिन खेत में पानी जमा न होने दें. अधिक पानी से मिट्टी में हवा का संचार कम हो सकता है, जिससे बीज सड़ने और जड़ों में गलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. इसलिए खेत में बेहतर जल निकासी की व्यवस्था रखें. बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी को खेत से बाहर निकालना भी जरूरी है. सही बीज तैयारी, उचित खेत प्रबंधन और संतुलित सिंचाई अपनाकर किसान कम अवधि में हरे धनिये की अच्छी फसल तैयार कर बाजार से बेहतर आमदनी हासिल कर सकते हैं.

Published: 30 Aug, 2026 | 06:00 AM

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