हरियाणा में जल सुविधाओं की बड़ी सौगात! 712 परियोजनाओं को मंजूरी, शहरों और गांवों को मिलेगा बड़ा फायदा

हरियाणा सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में 2,534.39 करोड़ रुपये की लागत से 712 पेयजल, सीवरेज और स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इन योजनाओं से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति, सीवरेज और बारिश के पानी की निकासी व्यवस्था मजबूत होगी. सरकार ने मार्च 2027 तक शहरी जलापूर्ति कवरेज 93 फीसदी करने का लक्ष्य रखा है.

नोएडा | Published: 15 Jul, 2026 | 03:13 PM

Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य में पेयजल, सीवरेज और बारिश के पानी की निकासी (स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज) व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए करीब 712 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिन पर 2,534.39 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा कि इन परियोजनाओं को मंगलवार को हुई हरियाणा जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड (WSSB) की 59वीं बैठक में मंजूरी दी गई.

उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के लागू होने से राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में पेयजल, सीवरेज और जल निकासी से जुड़ा बुनियादी ढांचा मजबूत होगा. इससे लोगों को बेहतर नागरिक सुविधाएं मिलेंगी और जलभराव जैसी समस्याओं को कम करने में भी मदद मिलेगी. मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना, मजबूत सीवरेज नेटवर्क तैयार करना और जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है. मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लोगों को बेहतर बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिलेगा.

18 शहरी सीवरेज परियोजनाओं को भी मंजूरी

तेजी से बढ़ रहे शहरों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 603.32 करोड़ रुपये की लागत से 69 जलापूर्ति परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. इनमें बहादुरगढ़, धारूहेड़ा, झज्जर, नारनौल, रेवाड़ी और कुरुक्षेत्र जैसे शहर शामिल हैं. इसके अलावा, 526.49 करोड़ रुपये की लागत वाली 18 शहरी सीवरेज परियोजनाओं को भी मंजूरी मिली है. ये परियोजनाएं बहादुरगढ़, झज्जर, नारनौल, रेवाड़ी, कुरुक्षेत्र, जगाधरी और रोहतक में लागू की जाएंगी. इनसे सीवरेज व्यवस्था बेहतर होगी और लोगों को बेहतर नागरिक सुविधाएं मिलेंगी.

इसके अलावा, 19.11 करोड़ रुपये की लागत से दो स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज (बरसाती पानी निकासी) परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. ये परियोजनाएं ऐलनाबाद और बवानी खेड़ा में लागू होंगी, जिससे बारिश के दौरान जलभराव की समस्या कम करने में मदद मिलेगी. मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दे रही है. इसी के तहत वित्त वर्ष 2026-27 में 1,108.28 करोड़ रुपये की लागत से 603 ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है.

3 महाग्राम जलापूर्ति परियोजनाओं को मंजूरी

ग्रामीण इलाकों में पानी और सीवरेज व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 203.58 करोड़ रुपये की लागत से 13 महाग्राम सीवरेज परियोजनाओं  और 71.58 करोड़ रुपये की लागत से 3 महाग्राम जलापूर्ति परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. इनमें उज्जीना, बाबैन, रामसरन माजरा, उमरी और टिकली समूह के पांच गांव प्रमुख रूप से शामिल हैं. इसके अलावा, ग्रामीण बस्तियों में पेयजल व्यवस्था मजबूत करने के लिए 44 लाख रुपये की लागत वाली दो परियोजनाओं को मंजूरी मिली है. वहीं, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) को मजबूत बनाने के लिए 1.58 करोड़ रुपये की लागत से दो संस्थागत विकास परियोजनाएं भी स्वीकृत की गई हैं.

समय सीमा में पूरा करने के निर्देश

मंत्री रणबीर गंगवा ने अधिकारियों को सभी परियोजनाएं तय समय सीमा में पूरी करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने विभागीय परिसरों में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और पानी के उपयोग शुल्क की वसूली बेहतर करने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2027 तक शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति का दायरा 90 प्रतिशत से बढ़ाकर 93 प्रतिशत करना है.

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