हरियाणा में भूजल का बिगड़ा हाल! 33 ब्लॉकों में TDS 1974 तक.. 71 गांवों का पानी बेहद खराब

हरियाणा में भूजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ रही है. राज्य के 33 ब्लॉकों में पानी का औसत TDS 1,000 से 1,974 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गया है. वहीं, 71 गांवों में TDS 3,000 से 9,553 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया. विशेषज्ञों के मुताबिक, ज्यादा TDS वाला पानी लंबे समय तक पीने से किडनी, पथरी, हाई BP और पेट की समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है.

नोएडा | Updated On: 29 Aug, 2026 | 12:19 PM

हरियाणा में भूजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ रही है. कई इलाकों में पानी में टीडीएस (कुल घुलनशील ठोस) का स्तर काफी ज्यादा पाया गया है. ज्यादा टीडीएस वाला पानी लंबे समय तक पीने से सेहत पर असर पड़ सकता है. राज्य के 142 ब्लॉकों में से 33 ब्लॉकों में भूजल का औसत टीडीएस 1,000 से 1,974 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गया है. वहीं, 71 गांवों में टीडीएस का स्तर 3,000 से 9,553 मिलीग्राम प्रति लीटर तक दर्ज किया गया है. आंकड़ों से साफ है कि इन गांवों में भूजल की गुणवत्ता गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है.

हिन्दी अखबार दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला के सवाल के जवाब में राज्य सरकार ने यह जानकारी विधानसभा में साझा की है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा के कई इलाकों में भूजल में टीडीएस का स्तर काफी ज्यादा है. वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार 1,000 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा टीडीएस वाला पानी लंबे समय तक पीना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे किडनी की बीमारी, पथरी, हाई ब्लड प्रेशर और पेट से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है.

इन ब्लॉकों में टीडीएस 1000 से ज्यादा

ज्यादा टीडीएस वाला पानी सेहत के लिए नुकसानदायक

चिकित्सकों के मुताबिक, ज्यादा टीडीएस वाला पानी पीने से पेट खराब, दस्त, उल्टी, कब्ज और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक ऐसे पानी का सेवन करने से कुछ मामलों में किडनी और लिवर पर भी असर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि पानी में कुछ मिनरल्स की मात्रा ज्यादा होने से हार्मोनल असंतुलन, ब्लड प्रेशर बढ़ने और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है.

पानी में TDS का सही स्तर सेहत के लिए जरूरी

पीने के पानी में TDS (कुल घुलित ठोस) की मात्रा बहुत ज्यादा या बहुत कम नहीं होनी चाहिए. आमतौर पर 50 से 150 PPM TDS वाला पानी पीने के लिए सबसे बेहतर माना जाता है. ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) की रिपोर्ट के मुताबिक, पीने के पानी में TDS की मात्रा 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होनी चाहिए. वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 300 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम TDS वाला पानी बेहतर माना जाता है. पानी में TDS बहुत ज्यादा होने पर इसका स्वाद और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और लंबे समय तक ऐसे पानी का सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. दूसरी ओर, बहुत कम TDS होने का मतलब है कि पानी में जरूरी खनिजों की मात्रा कम हो सकती है.

Published: 29 Aug, 2026 | 12:15 PM

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