औसत से काफी कम हुई बारिश, 70 फीसदी रकबे में अभी तक नहीं हुई धान बुवाई.. टेंशन में किसान

हरियाणा में कमजोर मॉनसून के कारण धान की रोपाई प्रभावित हो रही है. जून में राज्य में सामान्य से 21 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई, जबकि रोपाई के अहम दौर में वर्षा बेहद कम रही. कृषि विभाग के अनुसार अभी 70 फीसदी क्षेत्र में धान की रोपाई बाकी है. किसान सिंचाई के लिए ट्यूबवेल पर निर्भर हैं, जिससे भूजल पर दबाव बढ़ रहा है.

नोएडा | Updated On: 30 Jun, 2026 | 03:28 PM

Paddy Cultivation: हरियाणा में मॉनसून की कमजोर शुरुआत का असर धान की खेती पर दिखाई देने लगा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, जून में राज्य में सामान्य से 21 फीसदी कम बारिश हुई. इस महीने हरियाणा में 47.4 मिमी के मुकाबले केवल 37.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई. इससे पहले मई में भी राज्य में 15 फीसदी बारिश की कमी रही थी. धान की रोपाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले 18 से 24 जून के बीच हालात और खराब रहे. इस दौरान राज्य में सामान्य 14.4 मिमी के मुकाबले सिर्फ 2.1 मिमी बारिश हुई. धान उत्पादक प्रमुख जिलों, खासकर यमुनानगर में बहुत कम या लगभग नहीं के बराबर बारिश हुई, जबकि कई अन्य जिले भी वर्षा की कमी वाले क्षेत्र बने रहे.

कमजोर मॉनसून के अनुमान के बीच हरियाणा में इस खरीफ सीजन में करीब 18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती  का लक्ष्य रखा गया है. हालांकि धान की रोपाई का आधिकारिक सीजन 15 जून से शुरू हो चुका है, लेकिन पूरे जून में कम बारिश होने से कई इलाकों में रोपाई की रफ्तार धीमी पड़ गई है. राज्य कृषि विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि अभी भी करीब 70 फीसदी क्षेत्र में धान की रोपाई होना बाकी है. किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होने पर रोपाई का काम तेज हो सकेगा.

किसानों को है बारिश का इंतजार

हरियाणा में धान की अधिकांश खेती सिंचाई सुविधाओं वाले क्षेत्रों में होती है, लेकिन किसानों का कहना है कि नहर या ट्यूबवेल का पानी समय पर होने वाली मॉनसूनी बारिश की पूरी भरपाई नहीं कर सकता. धान की रोपाई के बाद करीब एक महीने तक खेतों में पानी भरा रहना जरूरी होता है, इसलिए अच्छी बारिश फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. कृषि विशेषज्ञों और किसानों के अनुसार, मॉनसून में देरी का सबसे ज्यादा असर राज्य के मध्य, दक्षिणी और पश्चिमी इलाकों में धान की रोपाई पर पड़ा है. वहीं, उत्तरी जिलों में सिंचाई व्यवस्था  अपेक्षाकृत बेहतर होने के बावजूद किसान खेत तैयार करने और पौधशालाओं (नर्सरी) को बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर ट्यूबवेल का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे भूजल पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है.

किसान नहीं करें धान की रोपाई

हरियाणा कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक राम प्रताप सिहाग ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि कमजोर और देरी से पहुंचे मॉनसून को देखते हुए विभाग ने किसानों को पूरे खेत में धान की रोपाई करने से बचने की सलाह दी है. इसके बजाय किसानों को अपनी कुछ जमीन पर कम पानी वाली फसलें, जैसे कपास, लगाने या डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. उनका कहना है कि इससे पानी की बचत होगी और किसानों का जोखिम भी कम होगा.

किसानों के लिए जारी की गई खास सलाह

हरियाणा कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे फिलहाल पहले से रोपी गई धान की फसल की देखभाल पर ध्यान दें और मॉनसून के सक्रिय होने तक नई रोपाई को टाल दें. विभाग का मानना है कि पर्याप्त बारिश होने के बाद ही आगे की रोपाई करना बेहतर रहेगा. नई दिल्ली स्थित आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर ने कहा कि मॉनसून में देरी का असर केवल धान तक सीमित नहीं रहेगा. इससे दक्षिणी और पश्चिमी हरियाणा में वर्षा पर निर्भर फसलों, जैसे बाजरा, दलहन, ग्वार, ज्वार और तिलहन की बुवाई भी प्रभावित हो सकती है.

अन्य फसलों को भी पहुंच रहा नुकसान

विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश की लगातार कमी का असर केवल धान की फसल तक सीमित नहीं है. राज्य में गन्ना, कपास और सब्जियों की फसलें भी पानी की कमी के कारण दबाव में हैं. यदि आने वाले दिनों में मॉनसून सक्रिय  नहीं होता है, तो किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.

 

Published: 30 Jun, 2026 | 03:26 PM

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