पंजाब में तेजी से बढ़ी हाइब्रिड धान की खेती, वैज्ञानिकों का अलर्ट.. मिलर्स को नुकसान की आशंका
पंजाब में हाइब्रिड धान की खेती तेजी से बढ़ रही है, जिससे राइस मिलर्स और कृषि वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है. विशेषज्ञों के अनुसार, इन किस्मों की मिलिंग में टूटे चावल की मात्रा अधिक निकलती है, जो एफसीआई मानकों से ज्यादा हो सकती है. इससे खरीद, मिलिंग और भंडारण प्रक्रिया प्रभावित होने के साथ मिलर्स को आर्थिक नुकसान का खतरा है.
Hybrid Rice Variety: पंजाब में बड़े पैमाने पर हाइब्रिड धान की खेती बढ़ने से राइस मिलर्स और कृषि वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि अक्टूबर-नवंबर में फसल कटाई के बाद खरीद सीजन के दौरान राज्य को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि हाइब्रिड धान की मिलिंग के समय टूटे चावल (ब्रोकन राइस) की मात्रा अधिक निकलती है. अभी राज्य के किसान SAWA 7301, SAWA 7501, SAWA 134, SAWA 127, Kaveri 7299 और Kaveri 471 जैसी हाइब्रिड धान किस्मों की खेती तेजी से अपना रहे हैं. हालांकि, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के वैज्ञानिक किसानों को इन किस्मों की खेती से बचने की सलाह दे रहे हैं. उनका कहना है कि इन किस्मों से तैयार होने वाले चावल की गुणवत्ता सरकारी खरीद मानकों पर असर डाल सकती है.
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति सतबीर सिंह गोसल ने ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ से कहा कि विश्वविद्यालय लगातार किसानों को हाइब्रिड धान की खेती के प्रति सावधान कर रहा है. उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चिंता यह है कि इन किस्मों की मिलिंग के दौरान टूटे चावल की मात्रा अधिक निकलती है, जिससे भारतीय खाद्य निगम (FCI) के खरीद मानकों को पूरा करने में दिक्कत आ सकती है. पिछले सीजन में पंजाब सरकार ने हाइब्रिड धान की किस्मों पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन हाइब्रिड बीज बेचने वाली कंपनियों की याचिका पर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस प्रतिबंध को हटा दिया था.
टूटे चावल की मात्रा 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए
FCI केंद्रीय पूल के लिए खाद्यान्न खरीदता है और उसे राज्यों को उपलब्ध कराता है. इसके नियमों के अनुसार 100 किलोग्राम धान से 70 किलोग्राम चावल स्वीकार किया जाता है, लेकिन मिलिंग के बाद टूटे चावल की मात्रा 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए. यदि यह सीमा पार हो जाती है तो चावल की खेप को अस्वीकार किया जा सकता है या फिर आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है. इसलिए विशेषज्ञ हाइब्रिड धान की बढ़ती खेती को लेकर चिंता जता रहे हैं. ऐसे पंजाब में हर साल करीब 30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है. ऐसे में धान की खरीद और मिलिंग से जुड़ी किसी भी समस्या का असर राज्य के कृषि क्षेत्र और राइस उद्योग दोनों पर पड़ सकता है.
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राइस मिलर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा
पंजाब राइस मिलर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रणजीत सिंह जोसन ने कहा कि यदि हाइब्रिड धान की खेती इसी तरह बढ़ती रही तो राइस मिलर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि जब हाइब्रिड धान से तैयार चावल में टूटे हुए दानों की मात्रा तय सीमा से अधिक हो जाती है, तो एफसीआई ऐसे स्टॉक को खारिज कर सकता है. इससे मिलर्स को आर्थिक नुकसान होता है और कई मामलों में एफसीआई तथा राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के साथ कानूनी विवाद भी पैदा हो जाते हैं.
हाइब्रिड धान की खेती बढ़ने से बढ़ी चिंता
इस सीजन में पंजाब में हाइब्रिड धान की खेती तेजी से बढ़ने के कारण यह मुद्दा और गंभीर हो गया है. पंजाब राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत भूषण बिंटा ने कहा कि पहले हाइब्रिड धान की खेती मुख्य रूप से गुरदासपुर, अमृतसर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला और मुक्तसर के कुछ इलाकों तक सीमित थी, लेकिन अब यह पूरे राज्य में तेजी से फैल चुकी है. उन्होंने कहा कि रिपोर्टों के अनुसार पंजाब के कुल धान क्षेत्र के 50 प्रतिशत से अधिक हिस्से में अब हाइब्रिड धान की खेती हो सकती है. पिछले साल भी राइस मिलर्स को हाइब्रिड धान की मिलिंग में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा था और आने वाले खरीद सीजन में चुनौतियां और बढ़ने की आशंका है.