मिलावटी और नकली कीटनाशक उत्पादों की वजह से खेती को नुकसान पहुंच रहा है तो वहीं छिड़काव करने से किसानों को भी स्किन और सांस संबंधी बीमारियां फैल रही हैं. खुद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से किसान ऐसे उत्पादों पर लगाम लगाने की मांग कर चुके हैं. कई बार खुले मंचों से चेतावनी देने के बाद भी नकली, घटिया और खतरनाक केमिकल्स के इस्तेमाल से कीटनाशक बनाने और बिक्री पर रोक नहीं लग पा रही है. ऐसे में अब कृषि मंत्रालय नया पेस्टीसाइड एक्ट लाने जा रहा है. इसके लिए एक्ट के ड्राफ्ट पर किसानों, ग्रामीणों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे गए हैं.
नए एक्ट में सजा और जुर्माना बढ़ेगा, नियम सख्त होंगे
कृषि मंत्रालय ने पेस्टिसाइड्स मैनेजमेंट बिल 2025 का ड्राफ्ट जारी किया है. इस कानून का मकसद 57 साल पुराने इंसेक्टिसाइड्स एक्ट 1968 और इंसेक्टिसाइड्स रूल्स 1971 को बदलना है. क्योंकि, मौजूदा कानून में उल्लंघन करने वाली कंपनियों या लोगों पर ज्यादा सजा और जुर्माने का प्रावधान नहीं है. सरकार चाहती है कि नकली और घटिया कीटनाशकों पर पूरी तरह रोकथाम लगाई जा सके. इसलिए नए कानून का ड्राफ्ट पेश किया गया है.
4 फरवरी तक अपने सुझाव भेजें किसान और अन्य लोग
एक बयान के अनुसार नए पेस्टीसाइड एक्ट में उल्लंघन करने वालों के लिए सजा और जुर्माना बढ़ाया जाएगा. इसके साथ ही उत्पाद बनाने से लेकर बिक्री और किसान के उपयोग के बाद परिणाम आने तक को लेकर नियम शामिल होंगे और पहले से लागू नियमों को और भी सख्त किया जाएगा. मंत्रालय ने सभी स्टेकहोल्डर्स से 4 फरवरी 2026 तक नए बिल के ड्राफ्ट पर फीडबैक मांगा है, ताकि संसद में पेश करने से पहले कानून को बेहतर बनाया जा सके.
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नए पेस्टीसाइड एक्ट ड्राफ्ट में ये सुधार शामिल होंगे
किसान केंद्रित पेस्टीसाइड एक्ट के कानून में कई सुधार के उपाय शामिल हैं, जिसमें किसानों को बेहतर सेवाएं देने के लिए पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी के प्रावधान शामिल हैं. नया बिल प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए डिजिटल तरीकों और टेक्नोलॉजी को शामिल करता है, साथ ही नकली कीटनाशकों पर ज्यादा सजा के जरिए सख्त नियंत्रण लगाता है. टेस्टिंग लैब्स का अनिवार्य मान्यता शामिल है, ताकि किसानों तक अच्छी क्वालिटी के कीटनाशक पहुंचें और राज्य स्तरीय अधिकारियों द्वारा तय की जाने वाली बढ़ी हुई सजा के साथ अपराधों के कंपाउंडिंग के प्रावधान शामिल किया गया है.
इंडस्ट्री और किसानों के बीच संतुलन बनाना आसान होगा
नए कानून में किसानों के लिए जीवन की आसानी और इंडस्ट्री के स्टेकहोल्डर्स के लिए व्यापार करने में आसानी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है. नए कानून में इंडस्ट्री से किसानों को कनेक्ट करना भी शामिल है. नए संशोधनों का मकसद पूरे देश में कीटनाशकों पर प्रशासनिक नियंत्रण और प्रबंधन को मजबूत करना भी है.
नए बिल के लिए ऐसे भेजें अपने सुझाव
कानून बनने से पहले की सलाह-मशविरे के हिस्से के रूप में ड्राफ्ट बिल मंत्रालय की वेबसाइट https://agriwelfare.gov.in पर उपलब्ध है. स्टेकहोल्डर्स और आम जनता MS Word या PDF फॉर्मेट में अपनी टिप्पणियां और सुझाव pp1.pesticides@gov.in, rajbir.yadava@gov.in, या jyoti.uttam@gov.in पर ईमेल के ज़रिए भेज सकते हैं.
नकली, खाद-बीज और कीटनाशकों की रोकथाम के लिए 3 मंत्रालय साथ आए
बीते दिन दिल्ली में खेती के विकास के लिए और नकली, घटिया बीज, खाद और कीटनाशकों पर रोक लगाने के लिए 3 मंत्रालयों ने हाथ मिलाया है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय, केंद्रीय संचार मंत्रालय खेती से जुड़े उत्पादों, तकनीक और बैंकिंग सेवाओं को किसानों और ग्रामीणों तक पहुंचाएंगे. इसके साथ ही नकली उत्पादों की जांच के लिए बारकोड और क्यूआर कोड से निगरानी भी की जाएगी.