त्योहारों की बढ़ती मांग के बीच बाजार में मिलावट का जाल, जानिए कैसे बचें नकली केसर से

बाजार में कई जगह नकली या मिलावटी केसर बेची जा रही है, जिसे पहचान पाना आम ग्राहक के लिए आसान नहीं होता. कई बार लोग ऊंची कीमत देकर भी असली के नाम पर नकली केसर खरीद लाते हैं. ऐसे में जरूरी है कि खरीदारी करते समय थोड़ी सावधानी बरती जाए.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 25 Feb, 2026 | 02:38 PM

Fake saffron detection tips: केसर को मसालों का राजा कहा जाता है. दूध, मिठाई, खीर, बिरयानी और कई आयुर्वेदिक नुस्खों में इसका खास इस्तेमाल होता है. त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में केसर की मांग और भी बढ़ जाती है. लेकिन जितनी महंगी और कीमती यह चीज है, उतना ही ज्यादा इसमें मिलावट का खतरा भी रहता है. बाजार में नकली या मिलावटी केसर खुलेआम बेची जा रही है. कई बार लोग ऊंची कीमत चुकाने के बावजूद असली के नाम पर नकली केसर खरीद लाते हैं. ऐसी मिलावटी केसर न सिर्फ जेब पर भारी पड़ती है, बल्कि सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकती है.

खाद्य पदार्थों में बढ़ती मिलावट को देखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) भी लगातार लोगों को जागरूक कर रहा है, जिसके तहत घरेलू स्तर पर मिलावट पहचानने के आसान टेस्ट बताए गए हैं.

क्यों होती है केसर में मिलावट?

केसर बेहद महंगा मसाला है क्योंकि इसे तैयार करने में काफी मेहनत लगती है. केसर के फूल से केवल कुछ पतले लाल रेशे ही निकाले जाते हैं. यही वजह है कि इसकी कीमत लाखों में होती है.

मुनाफा कमाने के लालच में कुछ व्यापारी रंगे हुए धागे, सूखे फूल या कॉर्न सिल्क जैसी चीजों को केसर बताकर बेच देते हैं. कुछ मामलों में केसर के रेशों पर कृत्रिम रंग भी चढ़ा दिया जाता है, जिससे वह असली जैसा दिखे.

रंग छोड़ने के तरीके से करें पहचान

असली केसर की सबसे बड़ी पहचान उसका रंग छोड़ने का तरीका है. जब आप केसर के कुछ धागे पानी या दूध में डालते हैं, तो असली केसर तुरंत गहरा लाल रंग नहीं छोड़ती. यह धीरे-धीरे हल्का पीला या सुनहरा रंग देती है.

अगर केसर डालते ही पानी तुरंत गहरा लाल हो जाए, तो समझ जाइए कि उसमें कृत्रिम रंग मिलाया गया हो सकता है. असली केसर अपना रंग धीरे-धीरे छोड़ती है और उसके धागे काफी देर तक अपनी बनावट बनाए रखते हैं.

स्वाद और खुशबू से पहचान

असली केसर की खुशबू हल्की लेकिन खास होती है. इसमें मीठी और मिट्टी जैसी मिली-जुली सुगंध आती है. अगर केसर में तेज या कृत्रिम खुशबू महसूस हो, तो वह नकली हो सकती है.

स्वाद के मामले में असली केसर थोड़ा कड़वा और कसैला होता है. अगर स्वाद बिल्कुल मीठा या फीका लगे, तो सावधान हो जाएं. नकली केसर में अक्सर स्वाद और सुगंध प्राकृतिक नहीं होती.

रेशों की बनावट पर ध्यान दें

असली केसर के धागे पतले और थोड़े अनियमित आकार के होते हैं. एक छोर थोड़ा मोटा और दूसरा पतला दिखाई देता है. अगर सभी धागे एक जैसे और पूरी तरह सीधी आकृति के हों, तो शक की गुंजाइश रहती है.

असली केसर को हल्के दबाव से तोड़ने पर वह आसानी से टूट जाती है क्योंकि यह सूखी होती है. नकली केसर कई बार ज्यादा सख्त या रबर जैसी लग सकती है.

बेकिंग सोडा से आसान जांच

घर पर एक आसान तरीका यह भी है कि एक कटोरी में थोड़ा पानी लें और उसमें चुटकी भर बेकिंग सोडा मिलाएं. अब इसमें केसर के कुछ धागे डालें. अगर घोल का रंग हल्का पीला होता है, तो यह असली होने का संकेत है. अगर रंग लाल या गहरा नारंगी हो जाए, तो मिलावट की संभावना है.

गर्म पानी का परीक्षण

एक गिलास गुनगुने पानी में केसर डालें और कुछ मिनट इंतजार करें. असली केसर पानी को सुनहरा रंग देगी, लेकिन उसके धागे तुरंत नहीं घुलेंगे. नकली केसर अक्सर अपना रंग तुरंत छोड़ देती है और धागे का आकार भी जल्दी बिगड़ जाता है.

खरीदते समय क्या ध्यान रखें

हमेशा भरोसेमंद दुकानदार या प्रमाणित ब्रांड से ही केसर खरीदें. पैकेट पर गुणवत्ता प्रमाणन और उत्पादन संबंधी जानकारी जरूर देखें. बहुत सस्ती कीमत पर मिलने वाली केसर से सावधान रहें, क्योंकि असली केसर कभी भी बहुत सस्ती नहीं होती.

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Published: 25 Feb, 2026 | 02:24 PM

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