DSR Paddy Cultivation: धान की खेती में पानी और मजदूरी की बढ़ती लागत को देखते हुए अब बड़ी संख्या में किसान सीधी बुवाई (डायरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक अपना रहे हैं. इस विधि में नर्सरी तैयार करने और रोपाई की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे समय, पानी और मेहनत तीनों की बचत होती है. लेकिन इस तकनीक से अच्छी पैदावार लेने के लिए सही समय पर संतुलित उर्वरक प्रबंधन बेहद जरूरी है. कृकृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, बुवाई के शुरुआती दिनों में पौधों को सही पोषण मिल जाए, तो फसल मजबूत बनती है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है.
बुवाई के समय दें संतुलित मात्रा में खाद
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, सीधी बुवाई वाले धान में शुरुआती खाद प्रबंधन ही पूरी फसल की नींव तैयार करता है. बुवाई के समय प्रति एकड़ लगभग 20 किलोग्राम नाइट्रोजन, 25 किलोग्राम फास्फोरस और 15 से 20 किलोग्राम पोटाश देना फायदेमंद माना जाता है. यह संतुलित पोषण बीजों के अच्छे अंकुरण में मदद करता है और पौधों की शुरुआती बढ़वार को तेज करता है. इससे पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं और वे मिट्टी से पानी व पोषक तत्व बेहतर तरीके से प्राप्त कर पाते हैं.
फास्फोरस और पोटाश से मजबूत होती हैं जड़ें
सीधी बुवाई में पौधे सीधे खेत में विकसित होते हैं, इसलिए शुरुआत में फास्फोरस और पोटाश की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है. फास्फोरस जड़ों के विकास को बढ़ावा देता है, जिससे पौधे गहराई तक फैलते हैं और सूखे या कम नमी की स्थिति में भी खुद को बेहतर तरीके से संभाल पाते हैं. वहीं पोटाश पौधों को मजबूती देता है और उन्हें अलग-अलग रोगों व कीटों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है. इससे फसल की सेहत अच्छी बनी रहती है.
ज्यादा कल्ले निकलेंगे तो बढ़ेगी उपज
धान की अच्छी पैदावार काफी हद तक कल्लों की संख्या पर निर्भर करती है. अगर पौधों को शुरुआत में पर्याप्त नाइट्रोजन और पोटाश मिल जाए, तो उनमें ज्यादा और मजबूत कल्ले निकलते हैं. जितने अधिक कल्ले होंगे, उतनी ज्यादा बालियां बनेंगी और उत्पादन बढ़ेगा. नाइट्रोजन पौधों को हरा-भरा बनाती है और उनकी बढ़वार को तेज करती है, जिससे खेत में फसल का विकास समान रूप से होता है.
खरपतवार की समस्या भी होगी कम
सीधी बुवाई वाले धान में शुरुआती दिनों में खरपतवार सबसे बड़ी चुनौती होते हैं. लेकिन जब पौधों को सही समय पर संतुलित पोषण मिलता है, तो उनकी बढ़वार तेजी से होती है.
तेजी से बढ़ने वाले पौधे खेत की सतह को जल्दी ढक लेते हैं, जिससे खरपतवारों को पर्याप्त धूप और जगह नहीं मिलती. इसका फायदा यह होता है कि खरपतवारों का फैलाव अपने आप कम होने लगता है और नियंत्रण पर खर्च भी घटता है.
कम लागत में बढ़ सकता है मुनाफा
सही उर्वरक प्रबंधन से खाद की बर्बादी रुकती है और फसल को जरूरत के अनुसार पोषण मिलता है. इससे दानों का भराव बेहतर होता है और उत्पादन की क्वालिटी भी बढ़ती है. कम पानी, कम मजदूरी और संतुलित खाद के साथ की गई सीधी बुवाई किसानों की लागत घटाने में मदद करती है. ऐसे में किसान कम खर्च में बेहतर पैदावार हासिल कर सकते हैं और अपनी आय बढ़ा सकते हैं. अगर किसान शुरुआत से ही पोषक तत्वों का सही प्रबंधन करें, तो सीधी बुवाई की तकनीक उन्हें अधिक मुनाफा दिला सकती है.