Tip Of The Day: धान की नर्सरी में दिख रहे हैं पीले पौधे? तुरंत करें ये काम नहीं तो पैदावार पर खतरा
Paddy Nursery Management: धान की नर्सरी तैयार करने में की गई छोटी सी गलती आगे चलकर पूरी फसल पर भारी पड़ सकती है. कई किसानों की शिकायत होती है कि पनीरी के पौधे अचानक पीले पड़ने लगते हैं या उनकी बढ़वार रुक जाती है, जिससे रोपाई में देरी होती है और पैदावार पर भी असर पड़ता है. कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार के अनुसार, अगर आपकी धान की नर्सरी में भी ऐसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है.

धान की फसल की सफलता काफी हद तक नर्सरी की गुणवत्ता पर निर्भर करती है. अगर शुरुआत में पौधों को सही पोषण और देखभाल नहीं मिलती, तो उनकी बढ़वार प्रभावित हो सकती है और आगे चलकर उत्पादन भी कम हो सकता है.

कई किसान खेत में गेहूं का भूसा, ठूंठ या कच्ची गोबर की खाद छोड़ देते हैं. ऐसी सामग्री सड़ने के दौरान मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव बड़ी मात्रा में पोषक तत्वों का उपयोग करने लगते हैं, जिससे धान के पौधों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता.

जब मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन और अन्य जरूरी तत्व कम हो जाते हैं, तो पौधों की बढ़वार धीमी पड़ जाती है. ऐसे में नर्सरी में पौधे छोटे रह जाते हैं और खेत में जगह-जगह पीले रंग के धब्बे या गोल घेरे दिखाई देने लगते हैं.

सामान्य परिस्थितियों में धान की नर्सरी 20 से 21 दिनों के अंदर रोपाई के लिए तैयार हो जानी चाहिए. अगर पौधों की बढ़वार धीमी है और वे तय समय पर तैयार नहीं हो रहे हैं, तो बाद में कल्ले कम निकलते हैं और उपज पर असर पड़ सकता है.

विशेषज्ञों के अनुसार पीलापन और कमजोर ग्रोथ की समस्या होने पर यूरिया, चूना और जिंक सल्फेट से तैयार घोल का छिड़काव फायदेमंद साबित हो सकता है. यह पौधों को तेजी से पोषण देता है और उनकी बढ़वार को दोबारा सामान्य करने में मदद करता है.

नर्सरी तैयार करते समय हमेशा अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट, एनपीके और सल्फर का संतुलित उपयोग करना चाहिए. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, पौधे मजबूत बनते हैं और समय पर रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं.