पंजाब- हरियाणा में पराली जलाने की घटना बढ़ी, 72 घंटे में आए 1973 मामले.. कार्रवाई भी तेज

पंजाब में कार्रवाई भी तेज हो गई है. बुधवार शाम तक 17 एफआईआर दर्ज की गईं, 25 मामलों में जमीन के रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' की गई और 34 मामलों में करीब 1.90 लाख रुपये का पर्यावरण जुर्माना लगाया गया. पांच राज्यों में इस सीजन में अब तक कुल 48,524 पराली जलाने के मामले सामने आ चुके हैं.

नोएडा | Published: 1 May, 2026 | 06:06 PM

Stubble Management: पंजाब और हरियाणा में पराली (फसल अवशेष) जलाने की घटनाओं में अचानक तेज बढ़ोतरी हुई है. पंजाब में 1,418 मामलों में से करीब 1,014 यानी लगभग 71 फीसदी घटनाएं सिर्फ 72 घंटों में दर्ज की गईं. वहीं हरियाणा में भी 1,565 मामलों में से करीब 959 यानी 60 फीसदी से ज्यादा घटनाएं इसी दौरान हुईं. यानी दोनों राज्यों के आंकड़े मिला दें, तो 72 घंटे में कुल 1,973 मामले हो जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि किसान धान की बुवाई से पहले खेत जल्दी साफ करने की कोशिश कर रहे हैं. इससे पराली जलाने के मामले बढ़ रहे हैं. खास बात यह है कि ज्यादातर मामले पिछले तीन दिनों में ही सामने आए हैं.

पंजाब में मंगलवार को 225, बुधवार को 447 और गुरुवार को पराली जलाने  के 342 मामले दर्ज किए गए. वहीं हरियाणा में भी मंगलवार को 345, बुधवार को 376 और गुरुवार को पराली जलाने के 238 मामले सामने आए. आने वाले दिनों में यह स्थिति और बढ़ सकती है, क्योंकि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 1 मई से धान की बुवाई के लिए नहरों का पानी छोड़ने का ऐलान किया है. 15 मई से डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (DSR) शुरू होगी और 1 जून से चरणबद्ध तरीके से रोपाई शुरू की जाएगी.

बुधवार शाम तक 17 एफआईआर दर्ज

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बीच पंजाब में कार्रवाई भी तेज हो गई है. बुधवार शाम तक 17 एफआईआर दर्ज की गईं, 25 मामलों में जमीन के रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ की गई और 34 मामलों में करीब 1.90 लाख रुपये का पर्यावरण जुर्माना लगाया गया. पांच राज्यों में इस सीजन में अब तक कुल 48,524 पराली जलाने के मामले सामने आ चुके हैं. इनमें मध्य प्रदेश सबसे आगे है, जहां 32,211 यानी करीब 66 फीसदी मामले दर्ज हुए हैं. इसके बाद उत्तर प्रदेश में 13,308 मामले सामने आए हैं.

ओलावृष्टि और बारिश से हुए नुकसान

वैज्ञानिक संस्था कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोइकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस के अनुसार, ऐसी बढ़ोतरी आमतौर पर फसल बदलने के समय होती है, लेकिन इस बार मामलों में तेजी से ज्यादा देखी जा रही है. भूमि स्तर पर कुछ जगह पर तनाव भी देखने को मिला. बरनाला के चीमा गांव में किसानों ने आग बुझाने आई टीम को घेर लिया और आरोप लगाया कि प्रशासन सिर्फ पहुंचकर मामलों में कार्रवाई कर रहा है, जबकि हाल ही में ओलावृष्टि और बारिश  से हुए नुकसान के समय कोई मदद नहीं मिली.

पंजाब को 576 करोड़ रुपये मंजूर किए गए

बता दें कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026 में पंजाब को फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) के लिए 576 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. यह लगातार नौवां साल है जब केंद्र इस दिशा में राज्य की मदद कर रहा है. इस बार मिला 576 करोड़ रुपये का बजट पंजाब के कृषि क्षेत्र के कुल फंड का करीब 58 प्रतिशत हिस्सा है. इससे यह साफ है कि सरकार पराली जलाने की समस्या को लेकर कितनी गंभीर है. राज्य कृषि विभाग अब इस फंड के इस्तेमाल के लिए विस्तृत योजना तैयार करेगा. इसमें किसानों को आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराना, पराली प्रबंधन के तरीके सिखाना और जागरूकता अभियान चलाना शामिल होगा.

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