खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी, 787 लाख हेक्टेयर पहुंचा रकबा.. अब 3 फीसदी रह गई बारिश की कमी
देश में खरीफ फसलों की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है. 24 जुलाई तक 787.38 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है और पिछले साल के मुकाबले अंतर घटकर 4.7 फीसदी रह गया है. एक सप्ताह में रिकॉर्ड तेजी दर्ज हुई है. हालांकि धान का रकबा अभी भी कम है, लेकिन बेहतर बारिश से उत्पादन लक्ष्य हासिल होने की उम्मीद है.
देश में खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आई है. पिछले एक सप्ताह में किसानों ने पिछले साल की तुलना में 3 लाख हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त क्षेत्र में बुवाई की है. इससे खरीफ बुवाई का अंतर काफी कम हो गया है. जहां 5 जुलाई तक बुवाई 21 फीसदी पीछे थी, वहीं अब यह घटकर 5 फीसदी से भी कम रह गई है. कृषि मंत्रालय के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, 24 जुलाई तक देश में 787.38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 826.19 लाख हेक्टेयर था. यानी इस समय बुवाई पिछले साल के मुकाबले 4.7 फीसदी कम है.
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो के असर के बावजूद फिलहाल बड़ी चिंता की बात नहीं है, क्योंकि खरीफ सीजन की 71 फीसदी से अधिक बुवाई पूरी हो चुकी है. हालांकि, आने वाले दो महीने की बारिश फसलों की बढ़वार के लिए बेहद अहम होगी, इसलिए मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी. ऐसे 18 से 24 जुलाई के बीच 129.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 125.72 लाख हेक्टेयर थी. यानी इस बार एक सप्ताह में पिछले साल से अधिक क्षेत्र में बुवाई हुई है.
बारिश की कमी घटकर 16 फीसदी रह गई
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 1 जून से 27 जुलाई तक देश में बारिश की कमी घटकर 16 फीसदी रह गई है. जून में यह कमी 37 फीसदी थी. वहीं, 1 से 27 जुलाई के दौरान बारिश सामान्य से सिर्फ 3 फीसदी कम दर्ज की गई. सरकार ने खरीफ 2026 के लिए 1761.6 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है. इसमें 84 लाख टन दलहन, 310.4 लाख टन मक्का और 135.6 लाख टन मोटे अनाज का लक्ष्य शामिल है.
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234.43 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई
हालांकि, खरीफ की सबसे प्रमुख फसल धान का रकबा अभी भी पिछले साल से कम है. 24 जुलाई तक 234.43 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह 240.62 लाख हेक्टेयर थी. यानी धान का रकबा 2.6 फीसदी कम है. इसके बावजूद सरकार को उम्मीद है कि प्रमुख राज्यों में अच्छी बुवाई के चलते 1231.5 लाख टन धान उत्पादन का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
उत्तर प्रदेश में धान का रकबा बढ़ा
देश में खरीफ सीजन के दौरान धान की बुवाई कई राज्यों में बढ़ी है, जबकि कुछ राज्यों में इसमें गिरावट दर्ज की गई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सबसे बड़े धान उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में धान का रकबा बढ़कर 57.8 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 55.46 लाख हेक्टेयर था. पंजाब में भी धान की बुवाई बढ़कर 31.66 लाख हेक्टेयर पहुंच गई है. वहीं, बिहार, असम और आंध्र प्रदेश में भी धान का रकबा पिछले साल के मुकाबले बढ़ा है.
धान की बुवाई में सबसे बड़ी गिरावट
इसके विपरीत मध्य प्रदेश में धान की बुवाई में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. यहां धान का रकबा घटकर 19.54 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि पिछले साल यह 27.39 लाख हेक्टेयर था. महाराष्ट्र में भी धान का रकबा 8.59 लाख हेक्टेयर से घटकर 4.9 लाख हेक्टेयर रह गया. इसके अलावा छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, तेलंगाना और ओडिशा में भी धान की बुवाई पिछले साल से कम रही है.
दलहन और तिलहन का कितना है रकबा
वहीं, दलहन फसलों की बुवाई 84.57 लाख हेक्टेयर और तिलहन की बुवाई 147.09 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है. दलहन की बुवाई में कमी अब घटकर 7.5 फीसदी रह गई है, जो 10 जुलाई तक 23 फीसदी थी. इसी तरह तिलहन की बुवाई का अंतर भी 21 फीसदी से घटकर 2 फीसदी रह गया है. सरकार ने खरीफ 2026 के लिए 289.2 लाख टन तिलहन उत्पादन का लक्ष्य रखा है. इसमें 148.5 लाख टन सोयाबीन और 113.5 लाख टन मूंगफली उत्पादन का लक्ष्य शामिल है.
अरहर की बुवाई 31.17 लाख हेक्टेयर
दलहनों में अरहर की बुवाई 31.17 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले साल से 12 फीसदी कम है. मूंग का रकबा भी थोड़ा घटकर 26.89 लाख हेक्टेयर रह गया है. हालांकि, उड़द की बुवाई बढ़कर 18.67 लाख हेक्टेयर पहुंच गई है, जो पिछले साल 17.27 लाख हेक्टेयर थी. कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, खरीफ सीजन में सोयाबीन, मूंगफली, कपास और मोटे अनाज की बुवाई पिछले साल के मुकाबले कम रही है. सोयाबीन का रकबा घटकर 113.65 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले साल 117.24 लाख हेक्टेयर था. वहीं, मूंगफली की बुवाई 40.20 लाख हेक्टेयर और कपास का रकबा 98.72 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल से कम है.
57.58 लाख हेक्टेयर में गन्ना बुवाई
हालांकि, गन्ने की बुवाई पूरी हो चुकी है और इसका रकबा बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर हो गया है. वहीं, जूट और मेस्ता की बुवाई भी पूरी हो गई है और इनका रकबा पिछले साल से थोड़ा अधिक दर्ज किया गया है. मोटे अनाज (श्री अन्न) का कुल रकबा 142.21 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 12 फीसदी कम है. ज्वार, बाजरा, रागी और मक्का सभी फसलों की बुवाई में गिरावट दर्ज की गई है. मक्का का रकबा 86.15 लाख हेक्टेयर से घटकर 77.79 लाख हेक्टेयर रह गया है.