छत्रिय धान, बैंगनी अरहर समेत 4 फसलों को मिला जीआई टैग.. रिकॉर्ड 27 कृषि उत्पादों को मिल चुका GI Tag 

Madhya Pradesh GI Tag Crops List : मध्य प्रदेश की चार पारंपरिक कृषि फसलों को को जीआई टैग का तमगा दिया गया है. कृषि विभाग के सचिव निशांत वरवड़े ने मीडिया से कहा कि जीआई टैग हासिल होने से इन चारों उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों में नई पहचान, कानूनी संरक्षण और बेहतर कीमत मिलेगी.

नोएडा | Updated On: 29 Jun, 2026 | 12:35 PM

Madhya Pradesh Crops GI Tags : मध्यप्रदेश के कृषि और उद्यानिकी उत्पादों को दुनिया में पहचाना जाएगा. इसके लिए जीआई टैग दिलवाने की प्रक्रिया में सफलता मिली है और छत्रिय धान, बैंगनी अरहर समेत 4 फसलों को जीआई टैग हासिल हुआ है. इन फसलों को जीआई टैग के लिए भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री कार्यालय चैन्नई भेजा गया था, जहां से नतीजे आ गए हैं. अब मध्य प्रदेश के 27 से अधिक उत्पादों को पहले ही जीआई टैग हासिल हो चुका है. बता दें कि जीआई टैग मिलने से फसल की शुद्धता और गुणवत्ता की गारंटी मिलेगी. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग बढ़ेगी. वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी.

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कृषि और उद्यानिकी विभाग की समीक्षा बैठक में बीते माह बताया था कि राज्य के कई कृषि उत्पादों और फसलों को जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया की जा रही है. उन्होंने कहा कि फसलों को जीआई टैग मिलने से देशभर में इनकी बिक्री आसान हो जाएगी और इन्हें उगाने वाले किसानों की कमाई बढ़ेगी और आर्थिक मजबूती मिलेगी. बता दें कि जीआई टैग फसलों को ऊंची कीमत मिलती है और उनके खरीदार और बाजार का दायरा भी बढ़ जाता है.

4 पारंपरिक फसलों ने जीता जीआई टैग का तमगा

मध्य प्रदेश सरकार के अनुसार राज्य की 4 पारंपरिक कृषि उपजों को जीआई टैग मिला है. जीआई टैग हासिल करने वाली फसलों में सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैंगनी अरहर और छत्रिय धान शामिल हैं. यह सभी फसलें मध्य प्रदेश की पारंपरिक फसलें हैं और आदिवासी इलाकों में इनकी खूब खेती की जाती है. ये चारों उपजें मुख्य रूप से डिंडोरी, मंडला, अनूपपुर, बालाघाट और शहडोल जैसे आदिवासी बहुल महाकौशल क्षेत्र में उगाई जाती हैं.

सिताही कुटकी को मिला जीआई टैग

सिताही कुटकी (Sitahi Kutki) एक कम अवधि (60 दिन) वाली ‘लिटिल मिलेट’ यानी बाजरा की छोटी की देशी किस्म है. यह बारिश आधारित क्षेत्रों और देर से बुवाई की स्थितियों के लिए उपयुक्त है. यह सूखे की मार, नमी की कमी, प्रमुख कीटों (शूट फ्लाई), ग्रेन स्मट और ब्राउन स्पॉट जैसी बीमारियों का सामना करने में सक्षम है. सिताही कुटकी की मध्यम ऊंचाई और मोटे तने के कारण फसल के गिरने की समस्या नहीं रहती. इसे पहाड़ी, ऊबड़-खाबड़ तथा कमजोर मिट्टी वाली स्थितियों में भी उगाया जा सकता है. मध्य प्रदेश के डिण्डोरी के बैगा और गोंड जनजातियों के किसान इसे खूब पैदा करते हैं. डिंडोरी में सिताही कुटकी की खेती की 10,395 हेक्टेयर क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई है. जबकि, पैदावार में 10-11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर का इजाफा हुआ है.

नागदमन कुटकी ने जीता जीआई टैग

मध्य प्रदेश सरकार के जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय की कोशिशों से खास किस्म की कुटकी नागदमन कुटकी (Nagdaman Kutki) को जीआई टैग हासिल हुआ है. नागदमन कुटकी डिंडोरी जिले में उगाई जाने वाली कुटकी की एक विशिष्ट स्थानीय किस्म है. यह अपने औषधीय गुणों और उच्च पोषण मूल्य के लिए जानी जाती है. नागदमन कुटकी की खेती आदिवासी किसान खूब करते हैं. जीआई टैग हासिल होने से अब इनकी कीमत और अधिक मिल सकेगी. हालांकि, सरकार पहले से ही कोदो और कुटकी उपज को एमएसपी और बोनस देकर किसानों का प्रोत्साहन बढ़ा रही है.

20 क्विंटल पैदावार वाली बैंगनी अरहर को जीआई टैग मिलेगा

मध्य प्रदेश की अरहर दाल की देसी किस्म बैंगनी अरहर (Purple Pigeon Pea) को जीआई टैग मिला है. बैंगनी अरहर में पौधे या फलियों पर बैंगनी रंग की झलक होती है. इसमें भरपूर प्रोटीन होता है. रोगों से लड़ने की जबरदस्त क्षमता होती है. अच्छी देखभाल होने पर 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन हो सकता है. जीआई टैग मिलने के बाद इसकी खेती को और बढ़ावा मिलेगा. इस खरीफ सीजन सरकार ने किसानों को धान की बजाय बैंगनी अरहर की खेती की सलाह दी है.

धनिया, मिर्च, लहसुन, आलू और केला को जीआई टैग दिलाने की तैयारी

कृषि विभाग के सचिव निशांत वरवड़े ने मीडिया से कहा कि जीआई टैग हासिल होने से इन चारों उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों में नई पहचान, कानूनी संरक्षण और बेहतर कीमत मिलेगी. उन्होंने कहा कि जबलपुरी मटर को कुछ सप्ताह पहले ही जीआई टैग मिला है. वहीं, गुना का कुंभराज धनिया, बुरहानपुर का केला, रतलाम का रियावन लहसुन, खरगोन की मिर्च, इंदौर का मालवी आलू और बरमन भटा को भी जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया की जा रही है.

अब तक 27 कृषि उत्पादों को मिल चुका जीआई टैग

सरकारी आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 तक मध्य प्रदेश के कृषि, खाद्य और हस्तशिल्प सहित कुल 27 प्रतिष्ठित उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्राप्त हो चुके हैं. इनमें से प्रमुख कृषि और खाद्य उत्पादों में बालाघाट का चिन्नौर चावल, झाबुआ का कड़कनाथ चिकन मीट, रीवा का सुंदरजा आम और मुरैना की गजक शामिल हैं.

Published: 29 Jun, 2026 | 12:36 PM

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