मॉनसून में खीरा उगाकर कमाएं ज्यादा मुनाफा! कृषि विशेषज्ञ ने बताए खेती के आसान तरीके

मॉनसून में खीरे की खेती किसानों के लिए कम समय में अच्छी कमाई का मौका दे सकती है. पूसा उदय, पूसा बरखा, स्वर्ण पूर्णा जैसी किस्में बारिश में बेहतर उत्पादन देती हैं. सही जल निकासी, मचान विधि और संतुलित पोषण अपनाकर किसान पैदावार बढ़ा सकते हैं.

नोएडा | Updated On: 2 Aug, 2026 | 08:15 PM

Cucumber Farming: मॉनसून का मौसम सब्जी किसानों के लिए कई अवसर लेकर आता है. इस समय तापमान और नमी का संतुलन खीरे की फसल के लिए काफी अनुकूल रहता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसान सही किस्म का चयन, बेहतर जल निकासी और वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन करें, तो बरसात में खीरे की खेती से कम समय में अच्छी पैदावार और बेहतर मुनाफा हासिल किया जा सकता है. हालांकि इस मौसम में अधिक नमी के कारण जलभराव और फफूंद जनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए खेत की तैयारी और देखभाल पर विशेष ध्यान देना जरूरी है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, सही तकनीक अपनाकर किसान मॉनसून में खीरे की खेती को लाभकारी बना सकते हैं.

बरसात में इन किस्मों से मिलेगा बेहतर उत्पादन

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, मॉनसून के मौसम में खीरे की ऐसी किस्मों  का चयन करना चाहिए, जो अधिक नमी वाले वातावरण में अच्छी बढ़वार कर सकें और रोगों के प्रति सहनशील हों. इसके लिए पूसा उदय, पूसा बरखा, स्वर्ण पूर्णा, स्वर्ण अगेती, पंजाब नवीन और काशी खीरा-1 जैसी किस्में बेहतर मानी जाती हैं. इन किस्मों से अच्छी पैदावार मिलने के साथ फल की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है. हालांकि किसान अपने क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु और बाजार की मांग के अनुसार किस्म का चयन करें, ताकि उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ाया जा सके.

जल निकासी और मिट्टी प्रबंधन है बेहद जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, खीरे की खेती  के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है. खेत की गहरी जुताई करने के बाद अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों का विकास बेहतर होता है. बरसात के मौसम में खेत में पानी जमा होना फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे पौधों की जड़ों में सड़न की समस्या आ सकती है. इसलिए किसान ऊंची क्यारियां या मेड़ बनाकर बुवाई करें, जिससे अतिरिक्त पानी आसानी से निकल सके और पौधों की जड़ें सुरक्षित रहें.

मचान विधि से बढ़ेगी फसल की गुणवत्ता

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, खीरे की बेलों को सहारा देने के लिए मचान विधि अपनाना काफी फायदेमंद रहता है. इससे फल जमीन के संपर्क में नहीं आते और उनका आकार, रंग व गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है. इसके अलावा मचान विधि से खेत में हवा का संचार अच्छा रहता है, जिससे रोगों का खतरा  कम होता है और तुड़ाई करना भी आसान हो जाता है. फसल की अच्छी बढ़वार के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें और संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा पोटाश का इस्तेमाल करें.

कीट और रोग नियंत्रण से बढ़ेगा उत्पादन

बरसात के मौसम में खीरे की फसल में सफेद मक्खी, एफिड और फफूंद जनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए किसान नियमित रूप से खेत की निगरानी करते रहें और किसी भी बीमारी या कीट के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उचित उपचार करें.

विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर तुड़ाई करने से पौधों पर नए फल लगातार बनते रहते हैं और उत्पादन बढ़ता है. सही किस्म, संतुलित पोषण, जल निकासी व्यवस्था और वैज्ञानिक खेती तकनीक अपनाकर किसान मॉनसून में खीरे की खेती से अच्छी उपज के साथ बेहतर आमदनी प्राप्त कर सकते हैं.

Published: 2 Aug, 2026 | 10:32 PM

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