पंजाब में धान बुवाई शुरू, बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की आशंका.. 30 लाख हेक्टेयर में होगी खेती
पंजाब में धान सीजन शुरू होने के साथ बिजली और पानी की मांग तेजी से बढ़ रही है. 30 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बुवाई और 14 लाख ट्यूबवेलों से भूजल दोहन हो रहा है पीक बिजली मांग 18,000 मेगावाट से अधिक पहुंचने का अनुमान है, जिससे ऊर्जा और जल संकट गहरा सकता है.
पंजाब में रविवार से धान की खेती का नया सीजन शुरू हो गया है. यह राज्य सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण समय माना जा रहा है, क्योंकि इस बार 30 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान की बुवाई होने की संभावना है. इसके साथ ही बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस साल पिछले साल की तुलना में ज्यादा हीटवेव और सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाया है. ऐसे में बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि इस सीजन में पंजाब की पीक बिजली मांग लगभग 6 प्रतिशत बढ़कर 18,000 मेगावाट से भी अधिक हो सकती है.
धान की खेती के लिए पंजाब में भूजल पर बहुत अधिक निर्भरता है. राज्य में करीब 13.94 लाख ट्यूबवेल खेतों की सिंचाई के लिए पानी खींचते हैं. इनमें से ज्यादातर ट्यूबवेल उन जिलों में हैं, जहां भूजल स्तर पहले से ही काफी नीचे जा चुका है और अत्यधिक दोहन की स्थिति है. विशेषज्ञों की बार-बार सलाह के बावजूद पंजाब में धान की रोपाई को जून के अंत तक टालने के बजाय जून की शुरुआत से ही इसकी अनुमति दी जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि रोपाई अगर मॉनसून के करीब की जाए तो पानी और बिजली की खपत कम हो सकती है.
रोजाना 8 घंटे बिजली आपूर्ति
बिजली क्षेत्र के अनुमानों के अनुसार, इस बार धान सीजन में राज्य की अधिकतम बिजली मांग 18,000 मेगावाट से अधिक पहुंच सकती है. यह पिछले वर्ष 2025 के लगभग 17,200 मेगावाट की तुलना में ज्यादा है. आगामी वर्ष विधानसभा चुनाव होने के कारण यह मौजूदा सरकार का अंतिम धान सीजन माना जा रहा है. ऐसे में सरकार का प्रयास है कि बढ़ती मांग के बावजूद किसानों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए. पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) ने कृषि ट्यूबवेलों के लिए रोजाना 8 घंटे बिजली आपूर्ति देने की व्यवस्था की है.
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बिजली की अधिकतम मांग 12,000 मेगावाट से ज्यादा
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अप्रैल में ही बिजली की अधिकतम मांग 12,000 मेगावाट से ज्यादा पहुंच गई, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में करीब 800 मेगावाट अधिक है. मई महीने में यह मांग बढ़कर 14,000 मेगावाट तक पहुंच गई. यह जानकारी ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के प्रवक्ता वीके गुप्ता ने दी. बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) की खुद की उत्पादन क्षमता लगभग 6,500 मेगावाट है. बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बाकी बिजली की आपूर्ति पावर खरीद और बैंकिंग व्यवस्था के जरिए की जाएगी, जो 10,500 मेगावाट से अधिक हो सकती है. इसमें 3,000 से 3,500 मेगावाट बिजली बैंकिंग सिस्टम से ली जाएगी.
16,000 मिलियन यूनिट तक पहुंचने का अनुमान
इसके अलावा राज्य को केंद्रीय परियोजनाओं और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से लगभग 4,800 मेगावाट का हिस्सा मिलता है. दिन के समय सस्ती सौर ऊर्जा का भी उपयोग किया जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि धान सीजन के दौरान शॉर्ट-टर्म पावर खरीद 2,000 मिलियन यूनिट से अधिक हो सकती है, जबकि केवल कृषि क्षेत्र में ही बिजली की खपत 16,000 मिलियन यूनिट (MU) तक पहुंचने का अनुमान है.
रोजाना 8 घंटे बिजली आपूर्ति
पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के एक अधिकारी ने कहा कि राज्य में बिजली की सबसे ज्यादा मांग आमतौर पर जून के दूसरे पखवाड़े में देखने को मिलती है, जब सभी ट्यूबवेलों को रोजाना 8 घंटे बिजली आपूर्ति शुरू हो जाती है. अधिकारियों के अनुसार, धान की खेती के दौरान ट्यूबवेलों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से भूजल पर भारी दबाव पड़ता है. एक ट्यूबवेल औसतन 8 घंटे की बिजली आपूर्ति में प्रति सप्ताह करीब 30.24 लाख लीटर पानी निकालता है. कुल मिलाकर, राज्य में लगभग 14 लाख ट्यूबवेल मिलकर धान सीजन के दौरान हर हफ्ते करीब 4,385 अरब लीटर भूजल निकाल लेते हैं. इससे पंजाब के भूजल संसाधनों पर लगातार गंभीर दबाव बना हुआ है.