जिस पुआल को किसान समझते हैं बेकार, वही बन सकता है कमाई का नया जरिया!

धान की कटाई के बाद बचने वाला पुआल अब किसानों के लिए कमाई का जरिया बन सकता है. पैडी स्ट्रॉ मशरूम की खेती कम जगह और कम लागत में शुरू की जा सकती है. सही तापमान और नमी मिलने पर महज 10 से 15 दिनों में उत्पादन शुरू हो सकता है.

नोएडा | Published: 5 Sep, 2026 | 06:24 PM

Paddy Straw Mushroom: धान की कटाई के बाद खेतों में बचने वाला पुआल अक्सर किसान बेकार समझकर जला देते हैं या खुले में छोड़ देते हैं. लेकिन इसी पुआल का इस्तेमाल पैडी स्ट्रॉ मशरूम यानी पुआल मशरूम की खेती में किया जा सकता है. यह कम जगह और कम लागत में शुरू होने वाला काम है, जिससे किसान पारंपरिक खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी हासिल कर सकते हैं. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, सही तापमान, नमी और साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए तो करीब 10 से 15 दिनों में मशरूम निकलना शुरू हो सकता है.

पुआल से तैयार करें मशरूम का बेड

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के मुताबिक पैडी स्ट्रॉ मशरूम की खेती  के लिए धान का पुआल सबसे जरूरी सामग्री है. किसान घर के किसी साफ कमरे, शेड या उपयुक्त पॉलीहाउस में इसकी शुरुआत कर सकते हैं. जगह ऐसी होनी चाहिए जहां हवा का आवागमन बना रहे और मशरूम पर सीधी तेज धूप न पड़े. इस मशरूम के लिए गर्म और नम वातावरण अनुकूल माना जाता है. लगभग 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान में इसकी वृद्धि अच्छी हो सकती है. खेती शुरू करने के लिए पुआल को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर पानी में भिगोया जाता है. पर्याप्त नमी आने के बाद पुआल को निकालकर अतिरिक्त पानी हटा दिया जाता है. इसके बाद साफ स्थान पर पुआल की परत लगाकर बेड तैयार किया जाता है.

पुआल की परत के साथ डालें स्पॉन

बेड तैयार करते समय पुआल की एक परत बिछाने के बाद उसके ऊपर मशरूम का बीज  यानी स्पॉन लगाया जाता है. इसके बाद दोबारा पुआल की परत और फिर स्पॉन की परत रखी जाती है. इसी तरह कई परतों में बेड तैयार किया जा सकता है. बेड को बहुत ज्यादा दबाने के बजाय व्यवस्थित तरीके से रखना जरूरी है, ताकि हवा और नमी का संतुलन बना रहे. प्रमोद कुमार के अनुसार, मशरूम उत्पादन में सबसे ज्यादा ध्यान स्वच्छता पर देना चाहिए. गंदगी, दूषित पानी या संक्रमित सामग्री से पूरा बेड खराब हो सकता है. इसलिए पुआल, कमरे और इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को साफ रखना बेहद जरूरी है.

10 से 15 दिन में शुरू हो सकता है उत्पादन

पैडी स्ट्रॉ मशरूम  की सबसे बड़ी खासियत इसका कम समय में तैयार होना है. अनुकूल तापमान और नमी मिलने पर करीब 10 से 15 दिनों में मशरूम निकलना शुरू हो सकता है. इसके बाद तैयार मशरूम की समय पर तुड़ाई करनी चाहिए. उत्पादन की मात्रा बेड के आकार, पुआल की गुणवत्ता, स्पॉन और रखरखाव पर निर्भर करती है. किसान अपनी उपलब्ध जगह के हिसाब से कम या ज्यादा संख्या में बेड तैयार कर सकते हैं. शुरुआत छोटे स्तर से करके अनुभव बढ़ने के साथ उत्पादन बढ़ाना बेहतर विकल्प हो सकता है.

बाजार की जानकारी लेकर शुरू करें खेती

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, मशरूम की खेती शुरू  करने से पहले किसानों को स्थानीय बाजार में इसकी मांग और बिक्री की संभावनाओं की जानकारी जरूर लेनी चाहिए. ताजा मशरूम की समय पर बिक्री होने से बेहतर आमदनी मिल सकती है. पैडी स्ट्रॉ मशरूम उन किसानों के लिए खास विकल्प बन सकता है, जिनके पास सीमित जमीन है और वे कम समय में अतिरिक्त आय का साधन तलाश रहे हैं. हालांकि, अच्छी सफलता के लिए किसानों को स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या प्रशिक्षित मशरूम उत्पादक से तकनीकी प्रशिक्षण लेकर ही बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू करना चाहिए.

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