कपास पर गुलाबी सुंडी का हमला, टेंशन में किसान.. विशेषज्ञों ने जारी की एडवाइजरी

हरियाणा के सिरसा में कपास की फसल में गुलाबी सुंडी के शुरुआती संकेत मिले हैं. कृषि विभाग ने कहा है कि इसका प्रकोप फिलहाल आर्थिक नुकसान की सीमा से नीचे है. किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन फेरोमोन ट्रैप लगाकर नियमित निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर ही मंजूरशुदा कीटनाशकों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है.

नोएडा | Published: 1 Aug, 2026 | 12:36 PM

Cotton Cultivation: हरियाणा के सिरसा जिले में कपास की फसल में गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) का असर दिख रहा है. इससे किसानों की टेंशन बढ़ गई है. हालांकि कृषि विभाग का कहना है कि अभी इसका असर बहुत कम है और यह आर्थिक नुकसान की सीमा (ETL) से नीचे है. ऐसे में फिलहाल किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है.

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के रीजनल इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट सेंटर, फरीदाबाद के विशेषज्ञों और सिरसा के संयुक्त कृषि निदेशक (कपास) कार्यालय की टीम ने जिले के कपास खेतों का संयुक्त सर्वे किया. संयुक्त कृषि निदेशक (कपास) आत्मा राम गोदारा ने द ट्रिब्यून से कहा कि टीम ने विभिन्न खेतों का निरीक्षण किया और गुलाबी सुंडी की निगरानी के लिए लगाए गए फेरोमोन ट्रैप की भी जांच की. किसानों ने अधिकारियों को बताया कि इन ट्रैप से कीट की समय रहते पहचान और नियंत्रण में मदद मिल रही है. इसी वजह से कई किसान अब अपने खेतों में पहले से ज्यादा फेरोमोन ट्रैप लगा रहे हैं.

किसान प्रति एकड़ 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप लगाएं

कृषि अधिकारियों ने कहा कि हरियाणा के कपास उत्पादक जिलों सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, हांसी, भिवानी, चरखी दादरी और जींद में निगरानी के लिए करीब 120 फेरोमोन ट्रैप लगाए गए हैं. सर्वे के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि वे प्रति एकड़ 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप लगाएं, ताकि गुलाबी सुंडी की समय रहते पहचान की जा सके. इसके अलावा, रस चूसने वाले कीटों पर नजर रखने के लिए प्रति एकड़ 20 पीले या नीले स्टिकी ट्रैप लगाने की भी सलाह दी गई.

विशेषज्ञों ने किसानों को दी सलाह

विशेषज्ञों ने कहा कि इन ट्रैप की मदद से कीटों की संख्या  का सही आकलन किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर ही नियंत्रण के उपाय किए जा सकते हैं. इससे बिना जरूरत कीटनाशकों के छिड़काव से बचा जा सकेगा. अधिकारियों ने किसानों से केवल केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIBRC) से मंजूर कीटनाशकों का ही इस्तेमाल करने की अपील की है.

कीटनाशकों का छिड़काव करें

विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि जरूरत होने पर ही कीटनाशकों का छिड़काव करें. उनका कहना है कि इससे रासायनिक कीटनाशकों का अनावश्यक इस्तेमाल कम होगा और खेती की लागत भी घटेगी. इसके साथ ही किसानों को NPSS मोबाइल ऐप का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है. इस ऐप के जरिए किसान कीट और रोगों की पहचान, उनकी निगरानी और नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक सलाह आसानी से प्राप्त कर सकते हैं.

कमजोर बारिश से फसल प्रभावित

बता दें कि हरियाणा में इस साल कपास की बुवाई भी कमजोर बारिश से प्रभावित हुई है. इस बार 3.11 लाख हेक्टेयर में कपास बोई गई है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 3.94 लाख हेक्टेयर था. यानी करीब 0.83 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में कपास की खेती हुई है. राज्य ने अब तक कपास बुवाई के लक्ष्य का करीब 78 प्रतिशत हासिल किया है.

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