UP में दलहन खेती को मिलेगा बढ़ावा, सरकार ने 20 फीसदी उत्पादन बढ़ाने के लिए तय किया टारगेट

उत्तर प्रदेश सरकार ने जायद, खरीफ और रबी सीजन में दलहन उत्पादन 20 फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. बुवाई क्षेत्र 27 से बढ़ाकर 30 लाख हेक्टेयर किया जाएगा. उरद, मूंग, अरहर और मसूर पर फोकस रहेगा, जिससे राज्य आत्मनिर्भर बनेगा और किसानों की आय बढ़ेगी

नोएडा | Updated On: 3 Mar, 2026 | 01:24 PM

Pulse cultivation News: उत्तर प्रदेश में दलहन का उत्पादन बढ़ाया जाएगा. इसके लिए उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने अगले जायद, खरीफ और रबी मौसम में दालों का उत्पादन लगभग 20 फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है. सरकार को उम्मीद है कि दलहन की पैदावार बढ़ने से राज्य दाल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा. साथ ही आयात पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी और किसानों की कमाई में बढ़ोतरी होगी.

कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक एके पाठक ने कहा कि कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जायद मौसम में उरद (काली उड़द) और मूंग (हरी मूंग) की पैदावार बढ़ाने पर काम किया जाएगा. उन्होंने कहा कि खरीफ मौसम (जून-सितंबर) में अरहर (तुअर), उरद और मूंग पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा. रबी मौसम (अक्टूबर-मार्च) में मटर और मूंग की पैदावार बढ़ाने के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे.

30 लाख हेक्टेयर में दलहन बुवाई का लक्ष्य

एके पाठक ने कहा कि ऐसे राज्य सरकार का लक्ष्य दालों की खेती  के लिए बुवाई क्षेत्र को वर्तमान 27 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 30 लाख हेक्टेयर करना है. वर्तमान में उत्तर प्रदेश लगभग 30 लाख टन दालें उत्पादन करता है, जिसकी औसत उत्पादकता 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जो राष्ट्रीय औसत 9.26 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से काफी अधिक है. इस योजना से राज्य की दाल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी.

दलहन उत्पादन में यूपी का चौथा स्थान

उत्तर प्रदेश ने 2024-25 में राष्ट्रीय स्तर पर दालों के उत्पादन में चौथा स्थान हासिल किया और भारत की कुल दाल उत्पादन  का 12 फीसदी हिस्सा राज्य ने दिया. राज्य सरकार ने दाल उत्पादन बढ़ाने के लिए कई पहलें शुरू की हैं. इनमें पल्सेस सेल्फ-रिलायंस मिशन, उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का वितरण (जिसमें मुफ्त मिनी बीज किट शामिल हैं) और मजबूत खरीदारी नीति (2024-25 में 75,000 टन से अधिक की खरीदी) शामिल हैं. विशेष योजनाओं के तहत, जायद मौसम में उरद और मूंग की बुवाई बढ़ाई जाएगी, रबी में मसूर की खेती का विस्तार किया जाएगा, और गन्ने के साथ इंटरक्रॉपिंग को बढ़ावा दिया जाएगा.

आवश्यकता का लगभग 15-20 फीसदी होता है आयात

केंद्र सरकार ने भी इस दिशा में सहयोग किया है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यूपी में दाल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 125 करोड़ रुपये की राशि जारी की. भारत हर साल अपनी कुल दाल आवश्यकता का लगभग 15-20 फीसदी आयात करता है, ताकि उत्पादन की कमी पूरी की जा सके. दाल उत्पादन बढ़ाना पोषण सुरक्षा, ग्रामीण आय और व्यापार घाटा कम करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इस योजना से न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी बल्कि देश की दाल आपूर्ति पर आयात का दबाव भी कम होगा.

30.82 लाख मीट्रिक टन दलहन उत्पादन किया

बता दें कि उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों में शामिल है. वर्ष 2024-25 में राज्य ने 30.82 लाख मीट्रिक टन दलहन उत्पादन किया, जिससे वह देश में चौथे स्थान पर रहा. भारत के कुल 256.83 लाख मीट्रिक टन दलहन उत्पादन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 12 प्रतिशत है. ऐसे बलरामपुर जिले में किसान सबसे अधिक दलहन की खेती करते हैं. यहां मसूर दाल की खेती मुख्य रूप से होती है. यहां मसूर दाल की पांच प्रमुख किस्में पाई जाती हैं. बलरामपुर की उच्च गुणवत्ता वाली मसूर दाल न केवल प्रदेश के अन्य हिस्सों में बल्कि बंगाल और असम तक भी भेजी जाती है.

केंद्र भी दे रहा है दलहन को बढ़ावा

वहीं, केंद्र सरकार भी देश में दलहन की खेती को बढ़ावा दे रही है. इसके लिए केंद्र सरकार ने दलहन में आत्मनिर्भरता  मिशन की घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में की थी. इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 अक्टूबर 2025 को मंजूरी दी थी. इसे 2025-26 से 2030-31 के दौरान कार्यान्वित किया जाएगा. इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना और दलहन में आत्मनिर्भर भारत की राह प्रशस्त करना है.

Published: 3 Mar, 2026 | 01:22 PM

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