पंजाब में कमजोर मॉनसून की आशंका, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता.. गहराएगा जल संकट

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अल नीनो के प्रभाव के कारण इस वर्ष राज्य में सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कमजोर मॉनसून से भूजल संकट बढ़ सकता है. किसानों को जल संरक्षण, सूखा सहनशील फसलों और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाने की सलाह दी गई है.

नोएडा | Updated On: 8 Jun, 2026 | 10:17 AM

Punjab Agriculture News: मॉनसून शुरू होने से पहले पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पंजाब में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका जताई है. वैज्ञानिकों के अनुसार, उभरती हुई अल नीनो (El Nino) स्थिति के कारण इस वर्ष मॉनसून कमजोर पड़ सकता है और राज्य में औसत से कम वर्षा हो सकती है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि बारिश कम होती है तो इसका सीधा असर पंजाब के पहले से घटते भूजल भंडार पर पड़ेगा. राज्य में सिंचाई के लिए बड़े पैमाने पर भूजल का उपयोग किया जाता है, ऐसे में कम वर्षा से जल संकट और गहरा सकता है.

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों का कहना है कि कमजोर मॉनसून कृषि क्षेत्र के लिए भी नई चुनौतियां पैदा कर सकता है. इससे फसलों की सिंचाई, उत्पादन और किसानों की लागत पर असर पड़ने की आशंका है. इसलिए किसानों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और जल संरक्षण  के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है. वैज्ञानिकों ने किसानों को संभावित कमजोर मॉनसून को देखते हुए अभी से पानी बचाने वाले उपाय अपनाने की सलाह दी है. उन्होंने कहा है कि किसान कम अवधि में तैयार होने वाली और सूखा सहन करने वाली फसलों की खेती करें. साथ ही ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों का अधिक उपयोग करें तथा खेतों में नमी बनाए रखने के उपाय अपनाएं, ताकि कम बारिश की स्थिति में फसलों पर असर कम पड़े.

किसानों को सतर्क रहने की सलाह

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के जलवायु परिवर्तन एवं कृषि मौसम विज्ञान विभाग की वैज्ञानिकों कुलविंदर कौर गिल, हरलीन कौर और प्रभज्योत कौर के अनुसार, पिछले 25 वर्षों के वर्षा आंकड़ों से पता चलता है कि अल नीनो और सूखे के बीच गहरा संबंध रहा है. इस अवधि में पंजाब में दर्ज 13 सूखा प्रभावित वर्षों में से आठ साल ऐसे थे, जब अल नीनो की स्थिति बनी हुई थी. इसी आधार पर वैज्ञानिकों ने इस वर्ष भी सामान्य से कम बारिश की आशंका जताते हुए किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है.

औसतन करीब 500 मिमी बारिश होती है

वैज्ञानिकों के अनुसार, पंजाब में मॉनसून के दौरान औसतन करीब 500 मिमी बारिश होती है. हालांकि पिछले 25 वर्षों में कई बार बारिश सामान्य से काफी कम दर्ज की गई.  वर्ष 2014 में राज्य में सबसे कम वर्षा हुई, जो सामान्य से 49 प्रतिशत कम थी. इसके अलावा 2012 में भी बारिश में भारी कमी  दर्ज की गई थी और उस वर्ष वर्षा सामान्य से 46 प्रतिशत कम रही. विशेषज्ञों ने कहा कि 2012 और 2014 दोनों ही वर्षों में अल नीनो की स्थिति बनी हुई थी. यही कारण है कि इस साल भी अल नीनो के संकेतों को देखते हुए वैज्ञानिकों ने कम बारिश की आशंका जताई है और किसानों को पहले से तैयारी करने की सलाह दी है.

पंजाब में आमतौर पर सामान्य से अधिक बारिश

वैज्ञानिकों के अनुसार, अनीनो के विपरीत ला नीना (La Nina) वाले वर्षों में पंजाब में आमतौर पर सामान्य से अधिक बारिश होती है. वर्ष 2025 में राज्य में 620.9 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से लगभग 41 प्रतिशत अधिक थी. यह हाल के वर्षों के सबसे अधिक बारिश वाले वर्षों में से एक रहा. इसी तरह 2008 और 2018 में भी सामान्य से ज्यादा वर्षा हुई थी और उन वर्षों में ला नीना की स्थिति बनी हुई थी.

पंजाब का मॉनसून जलवायु बदलावों से होता है प्रभावित

विशेषज्ञों ने कहा कि पंजाब का मॉनसून प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में होने वाले बड़े जलवायु बदलावों  से काफी प्रभावित होता है. अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री तापमान बढ़ जाता है, जिससे भारतीय मॉनसून कमजोर पड़ सकता है. इससे बादल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और बारिश कम होने की संभावना बढ़ जाती है. वहीं, ला नीना की स्थिति में नमी वाली हवाएं मजबूत होती हैं, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप में अच्छी बारिश होने की संभावना बढ़ जाती है. इसी कारण ला नीना वाले वर्षों में पंजाब समेत कई क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की जाती है.

किसान इन फसलों की करें खेती

वहीं, संभावित जोखिम को कम करने के लिए वैज्ञानिकों ने किसानों को अधिक उत्पादन के बजाय संसाधनों के संरक्षण पर ध्यान देने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि जहां संभव हो, वहां ज्यादा पानी मांगने वाली फसलों की जगह मोटे अनाज (मिलेट्स), दलहन और तिलहन जैसी कम अवधि में तैयार होने वाली तथा सूखा सहन करने वाली फसलों की खेती की जाए.

 

Published: 8 Jun, 2026 | 10:11 AM

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