पंजाब में धान रोपाई के बीच किसानों को निर्बाध बिजली देने की तैयारी, PSPCL स्टाफ की छुट्टियों पर रोक

पंजाब में धान की रोपाई के दौरान किसानों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए PSPCL ने तकनीकी कर्मचारियों की छुट्टियों पर 15 सितंबर तक रोक लगा दी है. फील्ड स्टाफ को 24 घंटे उपलब्ध रहने के निर्देश दिए गए हैं. बढ़ती बिजली मांग और सिंचाई जरूरतों को देखते हुए विभाग ने पूरे तंत्र को अलर्ट मोड पर रखा है.

नोएडा | Updated On: 16 Jun, 2026 | 08:40 AM

Panjan Paddy Farmers: पंजाब में धान की रोपाई तेज होने और बिजली की मांग बढ़ने के बीच पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) ने लुधियाना जिले के तकनीकी कर्मचारियों की छुट्टियों पर 15 सितंबर तक रोक लगा दी है. निगम ने फील्ड स्टाफ को 24 घंटे उपलब्ध रहने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसानों को बिना रुकावट बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके. दरअसल, जिले में कृषि कार्य बढ़ने से बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है. वहीं हाल के दिनों में आए आंधी-तूफान से कई इलाकों में ट्रांसफॉर्मर, बिजली के खंभे और वितरण लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई थीं. इससे मरम्मत कार्य में लगी टीमों और फील्ड कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है. ऐसे में PSPCL ने बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया है.

केंद्रीय जोन के मुख्य अभियंता द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, तकनीकी कर्मचारियों और अधिकारियों को अब केवल विशेष परिस्थितियों में ही छुट्टी दी जाएगी. गंभीर बीमारी, मेडिकल इमरजेंसी या अन्य अपरिहार्य कारण होने पर ही अवकाश मंजूर किया जाएगा. इसके अलावा कर्मचारियों को बिना पूर्व अनुमति अपने मुख्यालय क्षेत्र से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी. सभी फील्ड कर्मचारियों को हर समय अपना मोबाइल फोन चालू रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि किसी भी बिजली संबंधी समस्या पर तुरंत कार्रवाई की जा सके.

छुट्टियों की मंजूरी प्रक्रिया भी सख्त

PSPCL ने छुट्टियों की मंजूरी प्रक्रिया को भी सख्त कर दिया है. पहले कई मामलों में कार्यकारी अभियंता (XEN) स्तर पर छुट्टियां स्वीकृत हो जाती थीं, लेकिन अब अवकाश आवेदन उच्च अधिकारियों की जांच के बाद ही मंजूर होंगे. धान सीजन  के दौरान वरिष्ठ अधिकारी कर्मचारियों की उपलब्धता पर लगातार नजर रखेंगे, ताकि किसानों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके.

ग्रामीण इलाकों में धान की रोपाई अपने चरम

PSPCL ने ये प्रतिबंध ऐसे समय में लागू किए हैं, जब राज्य के ग्रामीण इलाकों में धान की रोपाई अपने चरम पर है. किसानों को सिंचाई के लिए रोजाना आठ घंटे बिजली दी जा रही है. बिजली भार को संतुलित रखने और सभी किसानों को समान आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कृषि फीडरों को अलग-अलग समूहों में बांटकर रोटेशन के आधार पर बिजली दी जा रही है. बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस दौरान किसी भी खराबी को ठीक करने में देरी होने पर सिंचाई का कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है, जिससे हजारों किसानों को परेशानी उठानी पड़ सकती है. इसी वजह से नई व्यवस्था के तहत 66 केवी और 220 केवी बिजली लाइनों, ट्रांसफॉर्मरों तथा अन्य ट्रांसमिशन ढांचे से जुड़ी बड़ी खराबियों की सूचना तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों और कंट्रोल रूम को देना अनिवार्य किया गया है, ताकि मरम्मत कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जा सके.

धान सीजन के लिए बिजली है जरूरी

PSPCL के केंद्रीय जोन के मुख्य अभियंता जगदेव सिंह हंस ने कहा कि धान की रोपाई के दौरान किसानों को बिना रुकावट बिजली उपलब्ध कराना विभाग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि धान सीजन बिजली विभाग  के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है, इसलिए किसी भी खराबी या तकनीकी समस्या को ठीक करने में देरी नहीं की जा सकती. हंस ने कहा कि फील्ड कर्मचारियों को हर समय उपलब्ध रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बिजली आपूर्ति में किसी भी तरह की रुकावट आने पर उसे तुरंत दूर किया जा सके. इसी कारण कर्मचारियों को केवल वास्तविक आपात स्थितियों में ही छुट्टी दी जाएगी.

 

Published: 16 Jun, 2026 | 08:35 AM

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