कमजोर मॉनसून से लिक्विड फर्टिलाइजर की डिमांड बढ़ी, खाद के सस्ते विकल्प तलाश रहे किसान
Water Soluble Fertilizers Demand Rises: भारत हर साल लगभग 4 लाख टन घुलनशील फर्टिलाइजर आयात करता है और यह आंकड़ा हर साल बढ़ रहा है. इस फाइनेंशियल ईयर में जून तक लगभग 1 लाख टन आयात किया जा चुका है.
खरीफ सीजन में अनिश्चित मॉनसून घुलनशील फर्टिलाइजर बनाने वाली कंपनियों के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन कीमतों में भारी बढ़ोतरी से मांग पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. इंडस्ट्री बॉडी SFAI ने रविवार को कहा कि सूखे और कम सिंचाई सुविधाओं के चलते लिक्विड फर्टिलाइजर की मांग बढ़ रही है. लेकिन, इसके दाम में बढ़ोत्तरी से किसान इसका इस्तेमाल बंद कर देते हैं. उन्होंने कहा कि अगर बारिश नहीं होती है, तो फसलों की पत्तियां पीली पड़ जाएंगी. इसलिए किसान घुलनशील खाद के साथ अन्य विकल्पों की तलाश कर रहे हैं.
सूखे की स्थिति में बढ़ेगा लिक्विड खाद का इस्तेमाल
सॉल्यूबल फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SFAI) के प्रेसिडेंट राजीव चक्रवर्ती ने पीटीआई से कहा कि इस सीजन में अनियमित बारिश से पानी में घुलनशील (Water Soluble) प्रोडक्ट की मांग बढ़ सकती है, क्योंकि पारंपरिक खाद की तुलना में इनमें बहुत कम पानी का इस्तेमाल होता है. कपास जैसी फसलों में आमतौर पर एक सीजन में घुलनशील फर्टिलाइजर का दो बार छिड़काव किया जाता है. इस सीजन कपास फसलों में सूखे की स्थिति के चलते इस खाद का इस्तेमाल बढ़ सकता है.
इनपुट कीमतों में बढ़ोत्तरी ने बढ़ाई मुश्किल
SFAI अध्यक्ष ने कहा कि पिछले एक साल में चीन के एक्सपोर्ट पर रोक और वेस्ट एशिया में तनाव के कारण जरूरी इनपुट की कीमतों में 60-100 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने बताया कि मोनोअमोनियम फॉस्फेट (MAP) पिछले कुछ सालों में लगभग 1,000 डॉलर प्रति टन बिकता था. अब 1,500-1,600 डॉलर प्रति टन पर बिक रहा है. उन्होंने कहा कि 600 डॉलर प्रति टन की बढ़ोतरी एक बड़ी बात है. ऐसा किसानों के सस्ते विकल्प ढूंढने की वजह से है.
चीन की रोक और वेस्टर्न एशिया संकट बड़ा खतरा
उन्होंने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी के कारण खपत में कमी आने की संभावना है. जैसे ही लिक्विड फर्टिलाइजर बहुत महंगा हो जाता है, किसान इसका इस्तेमाल बंद कर देते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कीमतों पर नियंत्रण करना संभव नहीं है या यह इंडस्ट्री के नियंत्रण में नहीं है. उन्होंने कहा कि चीन की ओर से जरूरी प्रोडक्ट के एक्सपोर्ट पर रोक और वेस्ट एशिया संकट के कारण भारत में शिपमेंट में रुकावट आई है, जिससे इम्पोर्टर्स को रूस और CIS क्षेत्र जैसे विकल्पों पर विचार करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि इन स्रोतों से भी उपलब्धता सीमित है.
लिक्विड फर्टिलाइजर का घरेलू उत्पादन बेहद कम
उन्होंने कहा कि घुलनशील फर्टिलाइजर का घरेलू उत्पादन बहुत कम है. इसलिए देश के भीतर से इम्पोर्ट की कमी को पूरा करने की गुंजाइश बहुत कम है. कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सप्लाई की स्थिति फिलहाल चिंताजनक नहीं है. क्योंकि पिछले साल का स्टॉक बचा हुआ है. पिछले साल मुख्य खेती वाले इलाकों में ज्यादा बारिश के कारण खपत कम रही थी. उन्होंने कहा कि देश में आमतौर पर हर साल लगभग 4 लाख टन घुलनशील फर्टिलाइजर इम्पोर्ट की जाती है और यह आंकड़ा हर साल बढ़ रहा है. इस फाइनेंशियल ईयर में कुल इम्पोर्ट 2.5 लाख टन तक रहने का अनुमान है, जिसमें से जून तक लगभग 1 लाख टन इम्पोर्ट हो चुका है. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ज्यादातर खपत सितंबर से मार्च के बीच होती है.
सस्ते विकल्पों की बढ़ सकते हैं किसान
चक्रवर्ती ने कहा कि ज्यादा कीमतों की वजह से किसान सस्ते विकल्पों की ओर बढ़ सकते हैं. कई किसान पहले ही SSP जैसे फॉस्फेटिक विकल्पों को अपना रहे हैं, जिनमें MAP के 61 फीसदी की तुलना में फॉस्फोरस की मात्रा कम (20-22 फीसदी) होती है, लेकिन इनकी कीमत भी काफी कम होती है. उन्होंने बताया कि यूरिया और DAP जैसे पारंपरिक फर्टिलाइजर की ओर वापस लौटने से सरकार का सब्सिडी बिल भी बढ़ जाएगा.