SKM ने कृषि मंत्री के बयान पर जताई नाराजगी, कहा- किसानों की स्थिति बेहद खराब.. MSP कागजों तक ही सीमित
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि केंद्र सरकार का दावा किसानों की आय दोगुनी होने का सही नहीं है. MSP पर फसल खरीद कम, कर्ज और आत्महत्याओं की बढ़ती संख्या, और सरकार द्वारा लागू A2+FL फार्मूला किसानों को घाटे में डाल रहा है. किसान संगठन स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग कर रहे हैं.
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के उस बयान पर नाराजगी जताई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार के दौरान किसानों की आय दोगुनी हो गई है. SKM ने कहा कि देश में किसानों की स्थिति बेहद खराब है और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सिर्फ कागजों तक ही सीमित है. संगठन के मुताबिक, अभी 15 फीसदी से भी कम फसलों की खरीद MSP पर हो रही है. ऐसे में किसानों की आय दोगुनी होने का दावा सही नहीं है. SKM ने यह भी कहा कि कर्ज के कारण रोजाना करीब 31 किसान आत्महत्या कर रहे हैं और पिछले 12 साल में 5 लाख से ज्यादा किसान, खेत मजदूर और प्रवासी श्रमिक अपनी जान गंवा चुके हैं.
अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) के नेता पी. कृष्ण प्रसाद ने द ट्रिब्यून से कहा कि ये सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकट है. उनका कहना है कि किसान अपनी फसल MSP से कम दाम पर बेचने को मजबूर हैं, जबकि केंद्र सरकार किसानों को समर्थन देने का दावा करती है. उन्होंने कहा कि किसान संगठन लंबे समय से स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग कर रहे हैं. इस फार्मूले के अनुसार MSP फसल की कुल लागत (C2) से कम से कम 50 फीसदी ज्यादा होना चाहिए, जिसमें खेती का खर्च, परिवार की मेहनत, जमीन का किराया और पूंजी पर ब्याज शामिल होता है.
सरकार MSP तय करते समय A2+FL फार्मूले का इस्तेमाल करती है सरकार
पी. कृष्ण प्रसाद ने कहा कि अभी सरकार MSP तय करते समय A2+FL फार्मूले का इस्तेमाल करती है, जिसमें सिर्फ नकद खर्च और परिवार की मेहनत की लागत जोड़ी जाती है. इसमें जमीन का किराया और पूंजी पर ब्याज शामिल नहीं होता, इसलिए यह लागत C2 से कम रहती है. वहीं AIKS के महासचिव विजू कृष्णन ने कहा कि मौजूदा नीतियों के कारण किसान लगातार घाटे में जा रहे हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पंजाब के फरीदकोट में कर्ज के बोझ से दो भाइयों ने आत्महत्या कर ली. उनका कहना है कि किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, जबकि सरकार दावा कर रही है कि किसानों की आय बढ़ी है.
किसानों की रोजी-रोटी को खतरे में डाल दिया
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया का संघर्ष देश में कृषि स्थिति को और बिगाड़ चुका है. विजू कृष्णन ने कहा कि भारत का आधा कच्चा तेल खाड़ी देशों से आता है, फिर भी मोदी सरकार की लापरवाह विदेश नीति ने भारतीय किसानों की रोजी-रोटी को खतरे में डाल दिया है.
सांसद एमडी अबू ताहेर ने पूछा था सवाल
दरअसल, बीते दिनों लोकसभा सांसद एमडी अबू ताहेर खान ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से संसद में पूछा पूछा छा कि क्या सरकार किसानों की आय दोगुनी करने में सफल हुई है और अगर नहीं, तो इस लक्ष्य को पाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं. साथ ही, उन्होंने यह भी पूछा कि क्या पिछले पांच साल में ऋण न चुका पाने के कारण किसानों की मौत के आंकड़े दर्ज किए गए हैं.
क्या बोले थे शिवराज सिंह चौहान
इस पर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न केंद्रीय योजनाओं और कार्यक्रमों को सक्रिय रूप से लागू कर रही है. उन्होंने कहा कि कृषि विभाग के बजट में भी बड़ा इजाफा हुआ है, जो 2013-14 में 21,933.50 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 1,27,290.16 करोड़ रुपये (बजट अनुमान) हो गया है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 75,000 किसानों की सफलता की कहानियां साझा की हैं, जिनकी आय विभिन्न योजनाओं की मदद से दोगुनी या उससे ज्यादा हो गई है.