चीनी महंगी हुई तो गन्ना किसानों ने उठाया SAP का मुद्दा, 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग तेज

हरियाणा में चीनी के बढ़ते दाम के बीच गन्ना किसानों ने SAP बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है. किसानों का कहना है कि 415 रुपये का मौजूदा SAP बढ़ती खेती लागत के मुकाबले पर्याप्त नहीं है.. लागत बढ़ने से किसान मक्का और पॉपलर जैसी फसलों की ओर जा रहे हैं, जिससे गन्ने का रकबा और उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

नोएडा | Published: 25 Aug, 2026 | 01:30 PM

हरियाणा में चीनी की कीमतों में तेजी के बाद गन्ना किसानों ने गन्ने का स्टेट एडवाइज्ड प्राइस (SAP) बढ़ाने की मांग की है. किसानों का कहना है कि मौजूदा SAP 415 रुपये प्रति क्विंटल है, जिसे बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए. किसानों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में SAP में हुई बढ़ोतरी खेती की बढ़ती लागत के मुकाबले पर्याप्त नहीं रही है. कीटनाशक, खाद, डीजल और मजदूरी महंगी होने से गन्ने की खेती का खर्च लगातार बढ़ रहा है. इसके चलते कई किसान दूसरी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं.

गन्ना किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष विनोद राणा ने द ट्रिब्यून से कहा कि चीनी की कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है, लेकिन गन्ने का SAP उसी अनुपात में नहीं बढ़ा है. उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत के कारण किसान गन्ने की जगह दूसरी फसलें लगाने लगे हैं, जिसका असर आगे गन्ने के उत्पादन  पर पड़ सकता है. राणा ने कहा कि चीनी मिलों को भी पर्याप्त गन्ना नहीं मिल रहा है, जिससे उनका उत्पादन प्रभावित हो रहा है. उन्होंने बताया कि अंबाला और यमुनानगर में गन्ने का रकबा घटने की जानकारी मिली है. किसानों ने सरकार से गन्ने का SAP बढ़ाकर खेती को फिर से लाभकारी बनाने की मांग की है.

मिलों की रिपोर्ट पर निर्भरता घटाने की मांग

गन्ना किसानों ने हरियाणा सरकार से गन्ने का स्टेट एडवाइज्ड प्राइस (SAP) बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग दोहराई है. किसानों का कहना है कि बढ़ती खेती लागत को देखते हुए मौजूदा कीमत पर्याप्त नहीं है. इससे किसान गन्ने की जगह दूसरी फसलों की ओर जा रहे हैं. किसानों ने सरकार से गन्ने के रकबे और उत्पादन का सही आंकड़ा जुटाने के लिए अपना स्वतंत्र और भरोसेमंद सिस्टम बनाने की भी मांग की है. उनका कहना है कि सरकार को सिर्फ चीनी मिलों  से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर फसल का आकलन नहीं करना चाहिए. सही आंकड़ों के आधार पर ही सरकार को नीतियां बनानी चाहिए.

गन्ने का भाव बढ़ाने से बढ़ेगी खेती

भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि किसान पिछले कई वर्षों से गन्ने का लाभकारी मूल्य बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन SAP में बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं हुई. उन्होंने कहा कि पिछले साल भी किसानों ने SAP को 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की थी, लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिली. चढूनी के मुताबिक, गन्ने का उचित दाम नहीं मिलने से इसकी खेती का रकबा लगातार घट रहा है. सरकार अगर SAP बढ़ाती है तो किसानों को गन्ने की खेती बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा. इससे गन्ने की उपलब्धता बढ़ सकती है और चीनी की कीमतों को स्थिर रखने में भी मदद मिल सकती है.

गन्ने से किसानों का मोहभंग

नारायणगढ़ शुगर मिल्स के यूनिट हेड वीके सिंह ने कहा कि गन्ना किसान अब मक्का और पॉपलर जैसी दूसरी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. कुछ किसान गन्ना क्रशरों को भी बेच रहे हैं, क्योंकि वहां उन्हें ज्यादा कीमत मिल रही है. उन्होंने कहा कि पिछले साल गन्ने की पैदावार में गिरावट का असर चीनी मिलों के उत्पादन पर भी पड़ा था. सर्वे के मुताबिक, नारायणगढ़ शुगर मिल्स के क्षेत्र में इस साल करीब 22,000 एकड़ में गन्ना लगा है, जबकि पिछले साल यह रकबा करीब 24,000 एकड़ था. वीके सिंह ने कहा कि गन्ने के रकबे में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन अच्छी पैदावार से इसकी भरपाई हो सकती है. उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर सरकार गन्ने का SAP बढ़ाती है तो किसान गन्ने का रकबा बढ़ाएंगे और मिलों को ज्यादा गन्ना मिल सकेगा.

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