El Nino Alert: किसानों के लिए बड़ा खतरा, बदलते मौसम में कौन-सी फसल बचाएगी नुकसान? जानें
Super El Nino: बदलते मौसम और सुपर अल-नीनो की आशंका को देखते हुए कृषि विशेषज्ञ किसानों को फसल का चुनाव सोच-समझकर करने की सलाह दे रहे हैं. कम बारिश की स्थिति में धान जैसी ज्यादा पानी वाली फसलों के बजाय मक्का जैसी कम पानी में तैयार होने वाली फसलें बेहतर विकल्प हो सकती हैं.
Farmers Advisory: देश में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है. कभी कम बारिश तो कभी अचानक भारी बारिश, तेज गर्मी और लंबे सूखे जैसे हालात अब खेती के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस साल जुलाई से सितंबर के बीच सुपर अल-नीनो का असर देखने को मिल सकता है. इसका सीधा प्रभाव मॉनसून पर पड़ सकता है, जिससे कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है. ऐसे हालात में कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार किसानों को मौसम के अनुसार खेती की योजना बनाने की सलाह दे रहे हैं, ताकि फसलों का नुकसान कम हो और अच्छी आमदनी बनी रहे.
क्या होता है सुपर अल-नीनो?
अल-नीनो एक ऐसी मौसमी घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है. इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है. जब अल-नीनो ज्यादा मजबूत हो जाता है, तो इसे सुपर अल-नीनो कहा जाता है. इसकी वजह से कई जगहों पर बारिश कम हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में अचानक भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति भी बन सकती है. इसके अलावा गर्मी बढ़ने और सूखे का खतरा भी रहता है.
मॉनसून कमजोर पड़ने की आशंका
विश्व मौसम संगठन (WMO) के अनुसार, जुलाई से सितंबर के दौरान अल-नीनो के मजबूत होने की संभावना है. इसका असर भारत के मॉनसून पर भी पड़ सकता है. अगर बारिश सामान्य से कम होती है, तो सबसे ज्यादा परेशानी उन किसानों को होगी, जो अधिक पानी वाली फसलें उगाते हैं. ऐसे में कृषि वैज्ञानिक किसानों को मौसम के जोखिम को देखते हुए फसलों का चयन सोच-समझकर करने की सलाह दे रहे हैं.
कम पानी वाली फसलें बन सकती हैं बेहतर विकल्प
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी इलाके में कम बारिश की संभावना हो, तो किसान कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की ओर ध्यान दें. मक्का ऐसी ही एक फसल है, जिसे धान की तुलना में कम पानी और कम खाद की जरूरत होती है. सही समय पर बुवाई और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं. कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक पहली अच्छी बारिश के बाद मक्के की बुवाई सबसे बेहतर मानी जाती है.
वैज्ञानिक तरीके से करें खेती
हाइब्रिड मक्का की खेती में लाइन से लाइन की दूरी 60 से 70 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. बीज को 4 से 5 सेंटीमीटर की गहराई पर बोना चाहिए. अगर खेत में मेड़ और नाली बनाकर बुवाई की जाए तो पानी का बेहतर प्रबंधन होता है और फसल का विकास भी अच्छा होता है. इससे उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है.
कितनी हो सकती है कमाई?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से खेती करें और मौसम भी साथ दे, तो मक्के की फसल से 25 से 30 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन मिल सकता है. अच्छी क्वालियी के बीज और सही खेती तकनीक अपनाने पर किसान 30 हजार से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ तक का लाभ भी कमा सकते हैं. यही वजह है कि बदलते मौसम में मक्का जैसी फसल किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प मानी जा रही है.
मौसम के साथ बदलनी होगी खेती की सोच
जलवायु परिवर्तन का असर अब खेती पर साफ दिखाई देने लगा है. इसलिए सिर्फ पारंपरिक तरीके अपनाने के बजाय किसानों को मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार फसलों का चुनाव करना होगा. कृषि विशेषज्ञ का मानना है कि, कम पानी वाली फसलें, बेहतर सिंचाई व्यवस्था, उन्नत बीज और वैज्ञानिक खेती के तरीके अपनाकर किसान मौसम के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं. समय रहते सही फैसला लेने से फसल भी सुरक्षित रहेगी और किसानों की आय पर भी ज्यादा असर नहीं पड़ेगा.