तमिलनाडु में धान फसल पर संकट, पैदावार में 96 फीसदी गिरावट की आशंका.. खरीद भी होगी कम

तमिलनाडु के नागपट्टिनम में इस साल कुरुवई धान की पैदावार 96 फीसदी घटने का अनुमान है. रकबा 30,000 से घटकर 1,720 हेक्टेयर रह गया है. कावेरी पानी की कमी, कमजोर बारिश और खारे भूजल से फसल प्रभावित हुई है. किसानों को सांबा की खेती की भी चिंता है. किसानों ने पानी बढ़ाने की मांग की है.

नोएडा | Updated On: 13 Sep, 2026 | 01:44 PM

Tamil Nadu News: तमिलनाडु के नागपट्टिनम जिले में इस साल कुरुवई धान की पैदावार में 96 फीसदी तक घटने का अनुमान है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल सिर्फ 5,000 मीट्रिक टन धान की खरीद हो सकती है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 1.30 लाख मीट्रिक टन था. नागपट्टिनम तमिलनाडु के डेल्टा क्षेत्र का हिस्सा है, जिसे राज्य का ‘राइस बाउल’ यानी धान का कटोरा कहा जाता है. जिले में कुरुवई धान की खेती का रकबा भी तेजी से घटा है. पिछले साल करीब 30,000 हेक्टेयर में कुरुवई धान की खेती हुई थी, जो इस साल घटकर सिर्फ 1,720 हेक्टेयर रह गई है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मेट्टूर बांध खुलने में देरी के कारण सिंचाई के लिए कावेरी का पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया. इसके अलावा कमजोर बारिश  और जमीन के नीचे खारे पानी की समस्या ने भी खेती और उत्पादन को प्रभावित किया है. नागपट्टिनम जिले में कुरुवई धान की कम फसल को देखते हुए धान खरीद केंद्रों (DPC) की संख्या भी घटा दी गई है. इस साल सिर्फ 12 DPC खोले जाएंगे, जबकि पिछले साल 120 से ज्यादा केंद्र संचालित हुए थे. अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 6 केंद्र खोले जा चुके हैं और इनमें 270 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है.

कावेरी के पानी पर निर्भर है खेती

नागपट्टिनम में खेती के लिए मुख्य रूप से कावेरी के पानी पर निर्भरता है. जिले के कई हिस्सों में भूजल या तो पर्याप्त नहीं है या फिर उसमें खारापन ज्यादा है. इस वजह से इस सीजन में सिर्फ उन्हीं इलाकों में कुरुवई धान की खेती हो पाई, जहां इस्तेमाल योग्य भूजल उपलब्ध है. अधिकारियों के मुताबिक, इस साल जिले के 1,720 हेक्टेयर कुरुवई रकबे में से लगभग पूरा रकबा तिरुमारुगल ब्लॉक में है. इस ब्लॉक में पर्याप्त भूजल उपलब्ध होने के कारण किसान धान की फसल उगा सके हैं.

कुरुवई में नुकसान के बाद सांबा की खेती को लेकर किसान असमंजस में

नागपट्टिनम, किलवेलुर और थलैनायर ब्लॉक में कुछ ही खेतों में कुरुवई धान की खेती हो पाई. किसानों ने उपलब्ध पानी से फसल उगाने की कोशिश की, लेकिन लंबे समय तक पड़ी तेज गर्मी और पानी की कमी के कारण फसल को नुकसान हुआ. इससे उत्पादन भी काफी घट गया. तिरुमारुगल ब्लॉक के किसान के. रमेश ने बताया कि पिछले सीजन में उन्होंने 4 एकड़ जमीन से करीब 170 बोरी धान पैदा किया था. हर बोरी का वजन 62 किलो था. इस साल इसी जमीन से उन्हें सिर्फ 47 बोरी धान मिला. उन्होंने कहा कि कुछ खेतों में कटाई से पहले ही धान की बालियां सूखकर पूरी तरह भूरी हो गईं. रमेश ने कहा कि इससे उन्हें भारी नुकसान हुआ है और दूसरे इलाकों के किसान भी इसी तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं.

कावेरी का पानी नहीं पहुंचा, सांबा की खेती पर संकट

नागपट्टिनम जिले में अब तक कावेरी का पानी नहीं पहुंचने से किसान सांबा सीजन में धान की खेती को लेकर असमंजस में हैं. तमिलनाडु किसान संरक्षण संघ के एसआर तमिलसेल्वन ने कहा कि मेट्टूर बांध से छोड़ा गया कावेरी का पानी अभी तक जिले तक नहीं पहुंचा है. उन्होंने कहा कि मेट्टूर बांध से फिलहाल करीब 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जो पर्याप्त नहीं है. किसानों के मुताबिक, नागपट्टिनम तक पानी पहुंचाने और सांबा की खेती शुरू करने के लिए हर दिन कम से कम 22,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाना चाहिए.

Published: 13 Sep, 2026 | 01:43 PM

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