Brinjal Farming Model: साल के 365 दिन मिलेंगे बैंगन, रोज बाजार में बेचकर होगी कमाई, इस मॉडल से करें खेती
बैंगन का पौधा तैयार होने में करीब डेढ़ महीना लगता है. यदि पौधा स्वस्थ रहे और रोगों से बचा रहे तो 7–8 महीने तक लगातार फल दे सकता है. एक लॉट में फल आने के दौरान दूसरे लॉट की बुवाई करनी चाहिए. इससे पूरे साल बैंगन का उत्पादन मिलेगा, जो बंंपर कमाई कराएगा.
Farming Tips: बिहार के किसानों ने खेती के नए मॉडल को अपनाकर बैंगन की खेती से ज्यादा उपज तो हासिल की ही है और ज्यादा कमाई भी पाई है. किसानों ने जैविक खेती के मॉडल को अपनाकर बैंगन उगाया है, जो 8 महीने तक फल दे रहा है. वहीं, जब एक खेत में फलों की शुरुआत होने वाली होती है तो दूसरे खेत में बैंगन लगाकर पूरे साल उत्पादन हासिल किया जा रहा है. खेती का यह पारंपरिक मॉडल किसानों की उपज और उनकी आर्थिक हालत को सुधार रहा है. इस मॉडल से किसान पूरे साल बैंगन की तुड़ाई कर पा रहे हैं. इससे किसानों की अतिरिक्त आमदनी में बड़ा इजाफा संभव हो सकेगा.
3 महीने की फसल को जैविक खेती मॉडल से 8 महीने उत्पादन लायक बनाया
बिहार के प्रगतिशील किसान ने बैंगन की खेती में ऐसा नवाचार किया है, जिसने किसानों के लिए सालभर उत्पादन की संभावनाएं खोल दी हैं. आम तौर पर बैंगन की पारंपरिक खेती 2–3 महीने तक उत्पादन देती है. लेकिन किसान ने एक ऐसा तरीका विकसित किया है, जिसमें किसान 365 दिन बैंगन की तुड़ाई कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि मौजूदा फसल तीन महीने फल देगी, जबकि अगली फसल छह महीने तक लगातार उत्पादन कर सकती है. बैंगन की खासियत है कि यदि पौधा मजबूत हो जाए तो 5–6 महीने तक फलन जारी रहता है और यही किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का साधन बन जाती है.
8 महीने लगातार फल देगा बैंगन का पौधा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार किसान बताते हैं कि बैंगन का पौधा तैयार होने में करीब डेढ़ महीना लगता है. यदि पौधा स्वस्थ रहे और रोगों से बचा रहे तो 7–8 महीने तक लगातार फल दे सकता है. वहीं, फलों की शुरुआत होने पर दूसरे लॉट की बुवाई कर दी जाती है. हालांकि, यदि पौधे में रोग लग जाए जैसे तना कमजोर होना या पत्तों का पीला पड़ना, तो उसकी उम्र कम होकर केवल तीन महीने तक सिमट जाती है. ऐसे में किसानों को बार-बार नई फसल लगाना पड़ता है, जिससे लागत और मेहनत दोनों बढ़ जाती हैं.
कैसे करें रोग की पहचान
किसान बताते हैं कि उनके खेतों में भी कुछ पौधों में रोग दिखाई दे रहा है. पत्तों का पीला पड़ना बैंगन की फसल में रोग का प्रमुख संकेत माना जाता है. समय रहते इसका उपचार न किया जाए तो पूरा पौधा खराब हो सकता है, और फिर उसे हटाकर दोबारा रोपाई करनी पड़ती है. उनका कहना है कि यदि किसान पौधों पर रोग लगने का संकेत दिखते ही पौधे का उपचार कर लें तो वही पौधा 7–8 महीने तक लगातार आय देता रहता है और यही उनके मॉडल की सबसे बड़ी खासियत है.
समय पर पौध की तैयारी और उपचार जरूरी
किसान का मॉडल जिले के किसानों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है .उनका कहना है कि किसानों को पौध की समय पर तैयारी करना चाहिए, जैविक या रासायनिक उपचार से रोग नियंत्रण करना चाहिए और मिट्टी में नमी व पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना चाहिए, जिससे बैंगन की दीर्घकालिक फलन क्षमता बढ़ाती है. कृषि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि यदि किसान बैंगन की निरंतर फलन क्षमता का लाभ उठाएं तो उनकी आय कई गुना हो सकती है. किसान का यह नवाचार अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है और पूरे जिले में इसे अपनाया जा रहा है.