रबी सीजन की 3 कमाऊ फसलें, देरी से भी कर सकते हैं बुवाई और पा सकते हैं अच्छा मुनाफा

किसान रबी की फसलों की बुवाई कर चुके हैं. लेकिन, कुछ किस्में ऐसी भी हैं, जिन्हें देरी से बोया जा सकता है. देश के कुछ हिस्सों में खरीफ फसलों की देरी से कटाई पर रबी फसलों की बुवाई में भी देरी देखी जाती है.

नोएडा | Updated On: 14 Jan, 2026 | 09:24 PM

खरीफ सीजन की धान की कटाई के बाद किसान ने रबी फसलों की बुवाई की है. कृषि विशेषज्ञों ने देरी से जनवरी तक बोई जाने वाली सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाले 3 रबी की फसलों के बारे में जानकारी दी है. मुख्य रूप से रबी की फसल अक्टूबर – नवंबर के महीने में बोई जाती है. लेकिन, कई बार देरी से भी कई किस्में बोई जाती हैं. अलसी, गेहूं, सरसों, मटर, जौ, चना, मसूर आदि रबी सीजन की प्रमुख फैसले हैं. वही सब्जियों में गोभी, गाजर, टमाटर, बैंगन, पलक, शलजम, मेथी आदि प्रमुख रूप से उगाई जाती हैं. आईए जानते हैं नवंबर महीने में बोई जाने वाली 3 प्रमुख फसलों के बारे में जिनसे कम लागत में अधिक मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है.

गेहूं

रबी सीजन की सबसे प्रमुख फसल गेहूं है, जो हमारे आहार का अहम हिस्सा है और प्रोटीन का एक बड़ा भंडार भी है. रबी सीजन की प्रमुख फसल होने के नाते इसकी पैदावार बड़े पैमाने पर की जाती है. कुछ आसान टिप्स को अपना कर किसान इसकी पैदावार दो गुना बढ़ा सकते हैं. गेहूं की बुवाई का सबसे अच्छा समय मध्य अक्टूबर से नवंबर तक का माना जाता है. लेकिन, कुछ किस्में जनवरी में भी बोई जाती हैं. गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए बेहतर किस्म के बीजों जैसे- करण नरेंद्र, करण वंदना, पूसा यशस्वी, करण श्रिया, डीडीडब्ल्यू -47 आदि का प्रयोग करना चाहिए.

गेहूं की बुवाई के लिए कम तापमान और फसल पकते समय शुष्क व गर्म वातावरण की आवश्यकता होती है. मटियार दोमट मिट्टी गेहूं की फसल के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है और इसका पीएच वैल्यू 6 से 8 तक होना आवश्यक है. बीजों की बुवाई से पहले अंकुरण क्षमता की जांच के साथ बीजों को फफूंदी नाशक दवा से उपचारित करना चाहिए. गेहूं की सिंचाई बुवाई के 20 – 25 दिन बाद करें, कुल 3 – 4 बार सिंचाई पर्याप्त हैं.

चना

चना रबी सीजन की सबसे लोकप्रिय दलहनी फसल है, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ अच्छा मुनाफा भी देती है. इसकी बुवाई के लिए मध्य अक्टूबर से नवंबर तक का समय उपयुक्त माना जाता है. लेकिन, कुछ हिस्सों में देरी से भी कुछ चना किस्मों बोई जाती हैं. चना की खेती कम वर्षा और ठंडी जलवायु में अच्छे से की जाती है. इसके लिए दोमट या मटियारा मिट्टी उपयुक्त है साथ ही मिट्टी का पीएच वैल्यू 6 – 7.5 के बीच होना जरूरी है. अच्छे उत्पादन के लिए उन्नत किस्म के बीजों जैसे पूसा -256, केडब्ल्यूआर -108, डीसीपी 92-3, आधार (आरएसजी-936) आदि है. खेत में पानी का जमाव न होने दें और बुवाई के 30 – 35 दिन बाद निराई – गुड़ाई करें.

सरसों

तिलहनी फसलों में सरसों रबी सीजन की प्रमुख फसल है, जो कम लागत में अच्छा लाभ देती है. सरसों की खेती सिंचित व असिंचित दोनों प्रकार से की जाती है. इसकी बुवाई के लिए नवंबर माह सबसे उपयुक्त माना जाता है. सरसों की खेती के लिए 25 – 30 डिग्री सेल्सियस तापमान और दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है. सरसों की उन्नत किस्म – पूसा बोल्ड, क्रांति, पूसा जयकिशन (बायो 902), पूसा विजय आदि शामिल है. इसकी पहली सिंचाई 25 से 30 दिन बाद की जानी चाहिए. कुल 2 से 3 सिंचाई पर्याप्त हैं, लेकिन ध्यान रखें की फलियों में दाना भरते समय सिंचाई न करें, इससे उत्पादन घट सकता है. समय पर निराई – गुड़ाई से खरपतवार नियंत्रण करके फसल की गुणवत्ता और पैदावार में बढ़ोतरी की जा सकती है.

Published: 14 Jan, 2026 | 10:30 PM

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