UP कृषि विभाग की एडवाइजरी! भीषण गर्मी में सब्जी फसल बचाने के लिए तुरंत करें ये 5 काम

Advisory For Farmers: देश में बढ़ते 40-45 डिग्री सेल्सियस तापमान के कारण सब्जी फसलों में हीट स्ट्रेस की समस्या बढ़ रही है, जिससे टमाटर, मिर्च, बैंगन, खीरा और करेला जैसी फसलें प्रभावित हो रही हैं. इस स्थिति में पौधों की ग्रोथ रुक जाती है और उत्पादन घट जाता है. ऐसे में सिंचाई, मल्चिंग, शेड नेट का इस्तेमाल इस नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं.

नोएडा | Updated On: 22 May, 2026 | 08:44 PM

Heat Stress In Vegetables: देश के कई हिस्सों में तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है. इस भीषण गर्मी का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि खेतों में खड़ी सब्जी फसलों पर भी साफ दिखाई दे रहा है. टमाटर, मिर्च, बैंगन, खीरा और करेला जैसी फसलें इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं. तेज धूप और लू के कारण फसलों में ‘हीट स्ट्रेस’ की समस्या बढ़ती जा रही है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है. इसी को लेकर उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने सब्जी उगाने वाले किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है.

क्या होता है हीट स्ट्रेस?

जब तापमान सामान्य सीमा से काफी ज्यादा बढ़ जाता है और मिट्टी में पर्याप्त नमी व पोषक तत्व नहीं रहते, तो पौधे और फसलें हीट स्ट्रेस की स्थिति में आ जाते हैं. इस दौरान पौधों की ग्रोथ धीमी हो जाती है, पत्तियां मुरझाने लगती हैं और फल बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है. लगातार तेज धूप और लू की वजह से पौधों पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे फसल की क्वालिटी और उत्पादन दोनों घट जाते हैं.

क्यों बढ़ रही है समस्या?

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार हीट स्ट्रेस के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं. इनमें 40 डिग्री से अधिक तापमान, मिट्टी में नमी की कमी, असंतुलित पोषण, तेज धूप और अनियमित सिंचाई प्रमुख हैं. इन परिस्थितियों में पौधे पानी और पोषक तत्वों को सही तरीके से ग्रहण नहीं कर पाते, जिससे उनका विकास प्रभावित होता है.

कौन सी फसलें ज्यादा प्रभावित हैं?

इस समय सबसे अधिक नुकसान इन सब्जियों में देखा जा रहा है:

इसके अलावा पत्तेदार और बेल वाली सब्जियां भी गर्मी से बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं. कई किसानों की शिकायत है कि फल समय से पहले गिर रहे हैं और पौधे पीले पड़ने लगे हैं.

हीट स्ट्रेस से बचाव के प्रभावी उपाय

सही समय पर सिंचाई, संतुलित पोषण और आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करके किसान हीट स्ट्रेस के नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं. इससे न केवल फसल की गुणवत्ता बनी रहती है, बल्कि उत्पादन भी बेहतर होता है.

Published: 23 May, 2026 | 06:00 AM

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