कमजोर मॉनसून से फसल बुवाई पर ब्रेक, दलहन का रकबा 43 फीसदी घटा.. किसानों की बढ़ी चिंता
कमजोर और देरी से आए मॉनसून के कारण खरीफ दलहन की बुवाई इस साल धीमी रही है. 12 जून तक देश में दलहन रकबा पिछले साल के मुकाबले 43 फीसदी कम रहा. कर्नाटक और महाराष्ट्र के किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जबकि सरकार के पास पर्याप्त दलहन बफर स्टॉक मौजूद है.
Pulse Sowing: देश के कई हिस्सों में मॉनसून की कमजोर और देरी से हुई शुरुआत का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर दिखने लगा है. खासकर दलहन फसलों की बुवाई की रफ्तार इस साल काफी धीमी चल रही है. 12 जून तक देश में दलहन की कुल बुवाई पिछले साल के मुकाबले 43 फीसदी कम दर्ज की गई है. कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जिससे तुअर, उड़द और मूंग जैसी फसलों की बुवाई शुरू हो सके. बारिश में देरी से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है.
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 12 जून तक तुअर की बुवाई सिर्फ 0.09 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के मुकाबले 57 फीसदी कम है. उड़द की बुवाई 0.27 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले साल यह 0.35 लाख हेक्टेयर थी. वहीं मूंग की बुवाई 0.69 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के 1.54 लाख हेक्टेयर की तुलना में 55 फीसदी कम है.
12 जून तक दलहन बुवाई की स्थिति
| फसल | 2025 (लाख हेक्टेयर) | 2026 (लाख हेक्टेयर) | बदलाव |
|---|---|---|---|
| तुअर (अरहर) | 0.21 | 0.09 | 57 फीसदी कमी |
| उड़द | 0.35 | 0.27 | 23 फीसदी कमी |
| मूंग | 1.54 | 0.69 | 55 फीसदी कमी |
कर्नाटक के कालबुर्गी में कर्नाटक प्रदेश रेड ग्राम ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बसवराज इनगिन ने ‘बिजनेसलाइन’ से कहा कि अभी तक बारिश नहीं हुई है और आगे बारिश समय पर आएगी या नहीं, इसे लेकर किसान चिंतित हैं. उन्होंने कहा कि कर्नाटक के साथ-साथ महाराष्ट्र के लातूर और सोलापुर जैसे दलहन उत्पादक इलाकों और तेलंगाना में भी हालात ऐसे ही हैं, जहां मुख्य रूप से तुअर की खेती की जाती है. इन सभी क्षेत्रों में किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं, ताकि बुवाई शुरू की जा सके.
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मॉनसून सामान्य से 32 फीसदी कम
IMD के आंकड़ों के अनुसार 15 जून तक देश में मॉनसून सामान्य से 32 फीसदी कम रहा है. इस अवधि में जहां सामान्य बारिश 62.1 मिमी होनी चाहिए थी, वहीं केवल 42.4 मिमी बारिश दर्ज की गई. महाराष्ट्र के लातूर में मिल संचालक एन. कलंत्री ने कहा कि वहां अभी तक बारिश नहीं हुई है, इसलिए तुअर (अरहर) की बुवाई शुरू नहीं हो पाई है. वहीं, कालबुर्गी के कुछ हिस्सों में कुछ हफ्ते पहले बारिश हुई थी, जहां किसानों ने मूंग की बुवाई कर दी है. बसवराज इनगिन ने कहा कि अब इस शुरुआती फसल को जीवित रखने के लिए फिर से बारिश की जरूरत है और सरकार को इस स्थिति से निपटने की तैयारी करनी चाहिए.
किसानों को बारिश का इंतजार
गडग और यादगीर के कुछ इलाकों में भी जहां बारिश हुई, वहां मूंग की बुवाई की गई है, लेकिन किसान अब फसल की बेहतर बढ़वार के लिए फिर से बारिश का इंतजार कर रहे हैं, यह जानकारी गडग के मिल संचालक सुजय हुबली ने दी. भारत पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के मानद सचिव सतीश उपाध्याय ने कहा कि अभी बारिश को लेकर स्थिति अनिश्चित बनी हुई है. उन्होंने कहा कि अल नीनो का असर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान जैसे प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों पर चिंता बढ़ा रहा है. तुअर और उड़द जैसी फसलों की बुवाई जुलाई के मध्य तक की जा सकती है, लेकिन बारिश में देरी होने से फसल का चक्र प्रभावित हो सकता है और उत्पादन देर से होगा. उपाध्याय के अनुसार, सरकार के पास 4.3 से 4.5 मिलियन टन दलहन का बफर स्टॉक मौजूद है, जिससे बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी.