गेहूं की बालियां मुड़ रही हैं? खेत में दिखे ये संकेत तो तुरंत करें उपाय, वरना 30 फीसदी तक घट सकती है पैदावार

Boron Deficiency In Wheat: गेहूं की बालियों का मुड़ना अक्सर बोरॉन की कमी का संकेत होता है. यदि समय पर इसकी पहचान न की जाए तो दानों का विकास प्रभावित हो सकता है और पैदावार में 10-30% तक कमी आ सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार बोरेक्स जैसे बोरॉन युक्त उर्वरकों का प्रयोग, संतुलित पोषण प्रबंधन और मिट्टी परीक्षण से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.

नोएडा | Published: 12 Mar, 2026 | 05:23 PM

Gehun Ki Kheti: भारत में गेहूं प्रमुख खाद्यान्न फसलों में से एक है और देश की खाद्य सुरक्षा में इसकी अहम भूमिका है. पिछले कुछ सालें में उन्नत किस्मों, बेहतर उर्वरक प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से गेहूं की पैदावार में काफी बढ़ोतरी हुई है. इसके बावजूद कई क्षेत्रों में किसानों को पोषण संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसी ही एक समस्या है गेहूं की बालियों का मुड़ना या टेढ़ा हो जाना. कई बार किसान इसे किसी कीट या रोग का असर समझ लेते हैं.

ऐसे में बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, (Boron) नामक सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी का संकेत होता है. अगर समय रहते इस समस्या की पहचान और समाधान नहीं किया गया तो इससे फसल की पैदावार पर गंभीर असर पड़ सकता है.

खेतों में देखने को मिल रही समस्या

कई क्षेत्रों में किसानों ने देखा है कि गेहूं की विकसित होती बालियां सामान्य रूप से सीधी रहने के बजाय हुक के आकार में मुड़ जाती हैं या उनका विकास असामान्य हो जाता है.बिहार के शेखपुरा जिले के लोहान गांव के किसान मनोज कुमार सिंह के अनुसार उनके क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसानों ने श्रीराम-303 और DBW-222 जैसी गेहूं की किस्में लगाई हैं. कई किसानों ने खरपतवार नियंत्रण के लिए यूरिया के साथ 2,4-D, मेटासल्फ्यूरॉन या सल्फोसल्फ्यूरॉन का प्रयोग भी किया है.

उनका कहना है कि इलाके में बड़ी संख्या में खेतों में गेहूं की बालियों के मुड़ने की समस्या दिखाई दे रही है. ऐसे में सही कारण की पहचान करना बेहद जरूरी है.

पौधों के लिए क्यों जरूरी है बोरॉन

बोरॉन एक महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrient) है, जिसकी पौधों को बहुत कम मात्रा में आवश्यकता होती है, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा होता है.

यह पौधों की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है, जैसे:

जब मिट्टी में बोरॉन की कमी हो जाती है तो पौधों के नई पत्तियां, फूल और बालियां सबसे पहले प्रभावित होती हैं.

बोरॉन की कमी के प्रमुख लक्षण

गेहूं में बोरॉन की कमी होने पर कुछ खास लक्षण दिखाई देते हैं, जिनकी मदद से किसान समस्या को पहचान सकते हैं.

बोरॉन की कमी के कारण

बोरॉन की कमी कई कारणों से हो सकती है, जैसे:

फसल पर पड़ने वाला असर

बोरॉन की कमी का असर सीधे फसल की पैदावार पर पड़ता है. इसके कारण:

इससे कुल मिलाकर 10 से 30 प्रतिशत तक उपज में कमी आ सकती है.

समस्या का समाधान कैसे करें

यदि खेत में बोरॉन की कमी की पुष्टि हो जाए तो किसान कुछ उपाय अपनाकर इसे नियंत्रित कर सकते हैं.

समय रहते पहचान जरूरी

कृषि विशेषज्ञ के अनुसार गेहूं की बालियों का मुड़ना अक्सर बोरॉन की कमी का संकेत होता है. अगर किसान समय रहते मिट्टी परीक्षण कराकर सही पोषण प्रबंधन अपनाते हैं, तो इस समस्या से बचा जा सकता है.

Note: डॉ. एस.के. सिंह बिहार के डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (पूसा-848125, समस्तीपुर) में पोस्ट ग्रेजुएट डिपार्टमेंट ऑफ प्लांट पैथोलॉजी एवं नेमेटोलॉजी के विभागाध्यक्ष एवं पूर्व सह निदेशक अनुसंधान हैं. इन्होंने कृषि क्षेत्र में कई उल्लेखनीय शोध किए हैं.

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