Pollination problem: देश के कई हिस्सों में इस समय प्याज के खेतों में सफेद-सफेद फूलों की सुंदर कतारें नजर आ रही हैं. दूर से देखने पर लगता है कि बीज उत्पादन का मौसम पूरी तरह तैयार है, लेकिन इन फूलों के बीच एक जरूरी कड़ी गायब है मधुमक्खियां. आमतौर पर इस दौर में खेतों के ऊपर मधुमक्खियों की गुनगुनाहट सुनाई देती है, लेकिन इस बार कई राज्यों में किसान उस आवाज को तरस गए हैं. यही वजह है कि प्याज के बीज उगाने वाले किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है.
प्याज के फूलों पर मधुमक्खियों की मौजूदगी सिर्फ एक प्राकृतिक दृश्य नहीं, बल्कि बीज उत्पादन की बुनियाद है. जब यह कड़ी कमजोर पड़ती है, तो उसका असर सीधे किसान की फसल, उसकी आमदनी और आने वाले सीजन की तैयारी पर पड़ता है.
मधुमक्खियों के न आने से क्यों बढ़ी परेशानी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्याज की खेती करने वाले कई किसान ऐसे होते हैं जो कंद निकालने के बजाय उसी पौधे को बीज उत्पादन के लिए छोड़ देते हैं. यह एक खास और मेहनत भरी खेती होती है, जिसमें सही समय, सही मौसम और प्राकृतिक परागण का बड़ा महत्व होता है. मधुमक्खियों के बिना प्याज के फूलों का परागण ठीक से नहीं हो पाता, जिससे बीज कम बनते हैं या उनकी गुणवत्ता कमजोर हो जाती है.
कई किसान बताते हैं कि इस बार फूल तो समय पर आ गए, लेकिन खेतों में मधुमक्खियों की संख्या बेहद कम है. इसका सीधा असर बीज की गांठों पर दिखने लगा है. जहां सामान्य तौर पर हर फूल से भरपूर बीज बनते थे, वहां अब बीज अधूरे या हल्के नजर आ रहे हैं.
प्याज के लिए परागण क्यों है इतना जरूरी
प्याज ऐसा पौधा नहीं है जो खुद-ब-खुद परागण कर सके. इसके फूलों को परागकण एक फूल से दूसरे फूल तक पहुंचाने के लिए बाहरी मदद की जरूरत होती है. मधुमक्खियां यही काम सबसे प्रभावी तरीके से करती हैं. फूलों से निकलने वाला मीठा रस उन्हें आकर्षित करता है. जब मधुमक्खी एक फूल पर बैठती है, तो परागकण उसके शरीर से चिपक जाते हैं और फिर वह उन्हें दूसरे फूल तक पहुंचा देती है.
यही प्रक्रिया बीज बनने की नींव है. वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि प्याज के बीज उत्पादन में मधुमक्खियों की भूमिका 60 से 70 प्रतिशत तक होती है. यानी अगर मधुमक्खियां नहीं हैं, तो बीज उत्पादन की पूरी प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है. यही कारण है कि उनकी अनुपस्थिति को हल्के में नहीं लिया जा सकता.
बदलता मौसम और रसायनों का असर
कई किसान और जानकार मानते हैं कि मधुमक्खियों के कम दिखने के पीछे मौसम में बदलाव एक बड़ी वजह हो सकता है. असमय ठंड, अचानक गर्मी या तेज हवाएं मधुमक्खियों की गतिविधि को प्रभावित करती हैं. इसके अलावा खेतों में बढ़ता रासायनिक छिड़काव भी एक बड़ा कारण बन रहा है. कीटनाशक और फफूंदनाशक दवाएं मधुमक्खियों के लिए जहरीली साबित होती हैं, जिससे वे उन इलाकों से दूर चली जाती हैं.
कुछ इलाकों में तो मधुमक्खी पालकों ने अपने बक्से ही हटा लिए हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि रसायनों की वजह से उनकी कॉलोनियां नष्ट हो जाएंगी. इसका सीधा नुकसान प्याज जैसे परागण-निर्भर फसलों को हो रहा है.
किसान कैसे संभाल सकते हैं स्थिति
हालांकि हालात मुश्किल हैं, लेकिन किसान पूरी तरह बेबस भी नहीं हैं. कई जगहों पर किसान हाथ से परागण करने की कोशिश कर रहे हैं. यह तरीका मेहनत वाला और समय लेने वाला है, लेकिन कुछ हद तक बीज उत्पादन को बचा सकता है. इसके साथ-साथ खेतों के आसपास ऐसे फूलदार पौधे उगाना भी मददगार हो सकता है, जो मधुमक्खियों को आकर्षित करें.
कुछ किसान अब मधुमक्खी पालन को भी खेती के साथ जोड़ने पर विचार कर रहे हैं. अगर खेत के पास ही मधुमक्खी के बक्से रखे जाएं, तो परागण की समस्या काफी हद तक हल हो सकती है. साथ ही, फूल आने के समय रासायनिक छिड़काव कम करने से भी मधुमक्खियों की वापसी संभव है.
मधुमक्खियों को आकर्षित करने के लिए किसान करें ये जरूरी काम
- फूल आने के समय खेत में कीटनाशकों और रासायनिक स्प्रे का प्रयोग बंद करें, ताकि मधुमक्खियां खेत की ओर आएं.
- प्याज के खेत के आसपास सरसों, धनिया, सूरजमुखी या अन्य फूलदार पौधे लगाएं, जिससे मधुमक्खियों को भोजन और आकर्षण मिले.
- खेत के पास छोटे स्तर पर मधुमक्खी बॉक्स या बी-हाइव लगाने पर विचार करें, इससे परागण की समस्या कम हो सकती है.
- जब मधुमक्खियां न आएं, तो सुबह के समय हाथ से फूलों का हल्का मैनुअल परागण करें, ताकि बीज बनने की प्रक्रिया बनी रहे.
- फूल आने के दौरान खेत में नमी बनाए रखें और समय पर सिंचाई करें, ताकि फूल स्वस्थ रहें और परागण आसान हो.
- फूलों के समय संतुलित खाद और सूक्ष्म पोषक तत्व (बोरॉन, जिंक) दें, जिससे फूल झड़ने से बचें.
- खेत के आसपास पानी के छोटे स्रोत रखें, क्योंकि मधुमक्खियों को पानी भी आकर्षित करता है.
- स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से परामर्श लेकर मधुमक्खी पालन से जुड़ी योजनाओं की जानकारी लें.