Potato Farming: खेतों में आलू की खुदाई का समय हमेशा उत्साह लेकर आता है. किसान मेहनत से उगाई फसल को देखते हैं और अच्छी पैदावार की उम्मीद करते हैं. लेकिन खुदाई के दौरान जब कुछ आलू हरे रंग के निकल आते हैं, तो चिंता बढ़ जाती है. बहुत से लोग ऐसे आलू को बेकार समझकर फेंक देते हैं. सच यह है कि हरा आलू खाने के लिए सुरक्षित नहीं होता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह पूरी तरह बेकार है. सही जानकारी होने पर किसान इसका उपयोग कई कामों में कर सकते हैं.
आलू हरा क्यों हो जाता है
आलू के हरा होने की सबसे बड़ी वजह सूर्य की रोशनी होती है. जब बुवाई के समय आलू के बीज पर पर्याप्त मिट्टी नहीं चढ़ाई जाती, तो बढ़ते समय वह बाहर दिखने लगता है. जैसे ही आलू पर धूप पड़ती है, उसमें हरापन आ जाता है. यही कारण है कि खुदाई के समय कुछ आलू हरे दिखाई देते हैं. यह समस्या आम है और थोड़ी सावधानी से इसे रोका जा सकता है.
हरापन रोकने के आसान उपाय
आलू को हरा होने से बचाने के लिए बुवाई के समय सही तरीके से मिट्टी चढ़ाना जरूरी है. खेत में आलू बोते समय पैड़ी थोड़ी चौड़ी बनानी चाहिए, ताकि बढ़ते हुए आलू पूरी तरह मिट्टी में ढके रहें. भंडारण के समय भी ध्यान रखना चाहिए कि आलू को ठंडी और अंधेरी जगह पर रखा जाए. धूप या तेज रोशनी में रखने से भी आलू हरे हो सकते हैं. इन छोटे उपायों से फसल की गुणवत्ता बनी रहती है.
हरा आलू खाने में क्यों खतरनाक
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हरे आलू में सोलानिन नाम का एक तत्व ज्यादा मात्रा में बन जाता है. यही वजह है कि इसे खाने की सलाह नहीं दी जाती. अगर कोई हरा आलू खा ले, तो पेट दर्द, उल्टी या दस्त जैसी समस्या हो सकती है. खासकर बच्चों को इससे दूर रखना चाहिए. अगर आलू का थोड़ा हिस्सा हरा हो, तो उसे काटकर हटाया जा सकता है. लेकिन अगर पूरा आलू ज्यादा हरा या कड़वा हो, तो उसे फेंक देना ही सुरक्षित रहता है.
हरे आलू का सही उपयोग
हरे आलू को फेंकने के बजाय किसान उसका दूसरा उपयोग कर सकते हैं. इसे बीज के रूप में अगली फसल के लिए रखा जा सकता है. इसके अलावा हरे आलू से जैविक खाद और वर्मी कंपोस्ट भी बनाया जा सकता है. इससे खेत की मिट्टी को पोषण मिलता है और बेकार समझा जाने वाला आलू काम का बन जाता है. आलू की खेती में छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से नुकसान कम किया जा सकता है. अगर कभी हरे आलू निकल आएं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. बस सही जानकारी और सावधानी से किसान नुकसान को कम कर सकते हैं और उसी आलू को खेती के लिए उपयोगी बना सकते हैं.